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अमेरिकी सेना में बड़ा फेरबदल: ईरान से जंग के बीच हटाए गए आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज; हेगसेथ बोले- तत्काल रिटायर हों
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Pavan
Updated Fri, 03 Apr 2026 05:47 AM IST
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सार
US-Iran War: अमेरिका में सेना के शीर्ष स्तर पर बड़ा फैसला लिया गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी सेना के प्रमुख रैंडी जॉर्ज को तुरंत प्रभाव से रिटायर होने का आदेश दिया है। बता दें कि, जनरल रैंडी जॉर्ज का कार्यकाल सामान्य तौर पर 2027 तक चलना था, लेकिन उन्हें बीच में ही हटाया गया।
जनरल रैंडी जॉर्ज और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जंग लड़ रहे अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी सेना के सबसे वरिष्ठ अधिकारी रैंडी जॉर्ज को तुरंत प्रभाव से पद छोड़ने के लिए कह दिया है। पेंटागन ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की, लेकिन इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिका और इस्राइल, ईरान के खिलाफ लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें - West Asia Conflict: 'सभ्यताएं बमबारी से नहीं मिटाई जा सकती', ट्रंप की पाषाण युग वाली धमकी पर भड़का ईरान
अगस्त 2023 से अमेरिकी सेना का नेतृत्व कर रहे थे जॉर्ज
जनरल रैंडी जॉर्ज अगस्त 2023 से सेना प्रमुख के पद पर थे और उनका कार्यकाल सामान्य तौर पर चार साल का होता है, लेकिन उन्हें बीच में ही हटाया गया। वे एक अनुभवी सैन्य अधिकारी रहे हैं और उन्होंने खाड़ी युद्ध, इराक और अफगानिस्तान जैसे बड़े युद्धों में हिस्सा लिया था। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने पुष्टि करते हुए कहा कि जनरल रैंडी जॉर्ज अब 41वें आर्मी चीफ के पद से तुरंत हट रहे हैं। उन्होंने जॉर्ज की देश के लिए दशकों की सेवा की सराहना भी की, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि अब सेना में नेतृत्व बदलाव का समय आ गया था। दिलचस्प बात यह है कि रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले ही जनरल जॉर्ज वेस्ट प्वाइंट में कैडेट्स को प्रशिक्षण दे रहे थे और अपने अनुभव साझा कर रहे थे।
क्रिस्टोफर ला-नेव बनाए गए नए सेना प्रमुख
जनरल रैंडी जॉर्ज का कार्यकाल सामान्य तौर पर 2027 तक चलना था, लेकिन उन्हें बीच में ही हटाया गया। वे एक अनुभवी अधिकारी रहे हैं और उन्होंने खाड़ी युद्ध, इराक और अफगानिस्तान जैसे अहम मिशनों में हिस्सा लिया था। वे लॉयड ऑस्टिन के सैन्य सलाहकार भी रह चुके हैं। अब उनकी जगह अस्थायी तौर पर क्रिस्टोफर ला-नेव को आर्मी चीफ बनाया गया है। ला-नेव इससे पहले वाइस चीफ थे और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन का नेतृत्व कर चुके हैं। पेंटागन ने उन्हें 'अनुभवी और भरोसेमंद' बताया है, जो प्रशासन की नीतियों को सही तरीके से लागू कर सकते हैं।
पहले भी कई बड़े अधिकारियों को हटा चुके हैं हेगसेथ
ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिकी सेना यह बदलाव अकेला नहीं है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पहले ही सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटा चुके हैं। इनमें ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन सीक्यू ब्राउन और नेवी प्रमुख लिसा फ्रैंचेटी जैसे नाम शामिल हैं। कुल मिलाकर एक दर्जन से ज्यादा बड़े सैन्य अधिकारी बदले जा चुके हैं। हाल ही में एक और विवाद भी सामने आया था, जब पीट हेगसेथ ने एक हेलीकॉप्टर उड़ाने वाली टीम के खिलाफ कार्रवाई को रोक दिया था और सोशल मीडिया पर लिखा था, 'कोई सजा नहीं, कोई जांच नहीं।' हालांकि सूत्रों के मुताबिक आर्मी चीफ को हटाने का फैसला इस विवाद से जुड़ा नहीं है।
यह भी पढ़ें - US Tariffs: अमेरिका में विदेशी दवाओं पर अब लग सकता है 100% तक टैरिफ, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर किया हस्ताक्षर
पश्चिम एशिया में भेजे जा रहे हजारों अमेरिकी सैनिक
इस बीच, अमेरिका की सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स समेत हजारों सैनिकों को पश्चिम एशिया भेजा जा रहा है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी युद्ध (ग्राउंड ऑपरेशन) शुरू करेगा या नहीं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा कि आने वाले 2 से 3 हफ्तों में ईरान पर और भी कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान को 'पाषाण युग में वापस भेज दिया जाएगा।' इस बयान पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और संयुक्त राष्ट्र में अपने मिशन के जरिए कहा कि यह बयान ताकत नहीं बल्कि अज्ञानता को दिखाता है।
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अगस्त 2023 से अमेरिकी सेना का नेतृत्व कर रहे थे जॉर्ज
जनरल रैंडी जॉर्ज अगस्त 2023 से सेना प्रमुख के पद पर थे और उनका कार्यकाल सामान्य तौर पर चार साल का होता है, लेकिन उन्हें बीच में ही हटाया गया। वे एक अनुभवी सैन्य अधिकारी रहे हैं और उन्होंने खाड़ी युद्ध, इराक और अफगानिस्तान जैसे बड़े युद्धों में हिस्सा लिया था। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने पुष्टि करते हुए कहा कि जनरल रैंडी जॉर्ज अब 41वें आर्मी चीफ के पद से तुरंत हट रहे हैं। उन्होंने जॉर्ज की देश के लिए दशकों की सेवा की सराहना भी की, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि अब सेना में नेतृत्व बदलाव का समय आ गया था। दिलचस्प बात यह है कि रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले ही जनरल जॉर्ज वेस्ट प्वाइंट में कैडेट्स को प्रशिक्षण दे रहे थे और अपने अनुभव साझा कर रहे थे।
क्रिस्टोफर ला-नेव बनाए गए नए सेना प्रमुख
जनरल रैंडी जॉर्ज का कार्यकाल सामान्य तौर पर 2027 तक चलना था, लेकिन उन्हें बीच में ही हटाया गया। वे एक अनुभवी अधिकारी रहे हैं और उन्होंने खाड़ी युद्ध, इराक और अफगानिस्तान जैसे अहम मिशनों में हिस्सा लिया था। वे लॉयड ऑस्टिन के सैन्य सलाहकार भी रह चुके हैं। अब उनकी जगह अस्थायी तौर पर क्रिस्टोफर ला-नेव को आर्मी चीफ बनाया गया है। ला-नेव इससे पहले वाइस चीफ थे और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन का नेतृत्व कर चुके हैं। पेंटागन ने उन्हें 'अनुभवी और भरोसेमंद' बताया है, जो प्रशासन की नीतियों को सही तरीके से लागू कर सकते हैं।
पहले भी कई बड़े अधिकारियों को हटा चुके हैं हेगसेथ
ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिकी सेना यह बदलाव अकेला नहीं है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पहले ही सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटा चुके हैं। इनमें ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन सीक्यू ब्राउन और नेवी प्रमुख लिसा फ्रैंचेटी जैसे नाम शामिल हैं। कुल मिलाकर एक दर्जन से ज्यादा बड़े सैन्य अधिकारी बदले जा चुके हैं। हाल ही में एक और विवाद भी सामने आया था, जब पीट हेगसेथ ने एक हेलीकॉप्टर उड़ाने वाली टीम के खिलाफ कार्रवाई को रोक दिया था और सोशल मीडिया पर लिखा था, 'कोई सजा नहीं, कोई जांच नहीं।' हालांकि सूत्रों के मुताबिक आर्मी चीफ को हटाने का फैसला इस विवाद से जुड़ा नहीं है।
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पश्चिम एशिया में भेजे जा रहे हजारों अमेरिकी सैनिक
इस बीच, अमेरिका की सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के पैराट्रूपर्स समेत हजारों सैनिकों को पश्चिम एशिया भेजा जा रहा है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी युद्ध (ग्राउंड ऑपरेशन) शुरू करेगा या नहीं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में अपने संबोधन में कहा कि आने वाले 2 से 3 हफ्तों में ईरान पर और भी कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान को 'पाषाण युग में वापस भेज दिया जाएगा।' इस बयान पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और संयुक्त राष्ट्र में अपने मिशन के जरिए कहा कि यह बयान ताकत नहीं बल्कि अज्ञानता को दिखाता है।
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