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H-1B और PERM वीजा पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई: जांच के दायरे में कॉग्निजेंट समेत कई कंपनियां, क्या है मामला?
Fri, 10 Jul 2026 07:15 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 10 Jul 2026 07:15 AM IST
सार
अमेरिका ने एच-1बी और PERM वीजा से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामलों की जांच तेज कर दी है। अमेरिकी श्रम विभाग ने दर्जनों समन जारी किए हैं और जांच के दायरे में कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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H-1B Visa
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका ने एच-1बी और परम (पीईआरएम) कार्य वीजा से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामलों की जांच शुरू कर दी है। संघीय श्रम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों में भारतीय आईटी कंपनी कॉग्निजेंट भी शामिल है। श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी एस्पोसिटो ने कहा, हम पहले ही दर्जनों समन जारी कर चुके हैं। यह कार्रवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में गठित ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ के तहत की गई है।
अमेरिकी श्रम विभाग के तहत आने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (ओआईजी) के मुताबिक, जांच में ऐसे व्यापक तौर-तरीकों का पता चला है, जिनमें नियोक्ताओं और श्रम दलालों ने कथित रूप से फर्जी आवेदन दाखिल किए, विदेशी कामगारों का वेतन वापस लेने जैसी जबरन व्यवस्थाओं के जरिये उनका शोषण किया तथा बहुत कम वेतन पाने वाले श्रमिकों की अधिक संख्या लाकर अमेरिकी कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचाया।
ये भी पढ़ें: US: वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप के 'विशाल मेहराब' प्रोजेक्ट की फिर होगी समीक्षा, नियमों में बदलाव की भी सलाह
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संदिग्ध विदेशी जालसाजों पर होगी सख्ती: वेंस
मिलवौकी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, अमेरिका में एच-1बी का दुरुपयोग करने वाले संदिग्ध विदेशी जालसाजों के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। वह बोले, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस योजना के जरिये अमेरिकियों के हितों को नुकसान न पहुंचे। वेंस ने कहा, यह कार्रवाई करदाताओं के पैसे की सुरक्षा और वीजा कार्यक्रमों के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक व्यापक धोखाधड़ी-विरोधी अभियान का हिस्सा है।
अमेरिकी श्रम मंत्रालय ने कहा, हमें पता चला है कि इनमें कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों का भी जिक्र है। इन कंपनियों का नाम पीईआरएम और एच-1बी वीजा से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में सामने आया है। कंपनी का जिक्र करने के बाद इसकी शाखाओं में हलचल है और अगली कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
बड़ी कंपनियां कर रहीं दुरुपयोग
एच-1बी कार्यक्रम के मूल उद्देश्य को समझाते हुए वेंस ने कहा कि इसका गठन वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों सहित अत्यंत कुशल पेशेवरों को अमेरिका में काम की अनुमति देने के लिए किया गया था। यह वीजा कार्यक्रम कुशल तकनीकी विशेषज्ञ, उत्कृष्ट वैज्ञानिक या बेहतरीन डॉक्टरों के लिए था, लेकिन बड़ी कंपनियां और विदेशी संस्थाएं अमेरिकी श्रमिकों की मजदूरी कम करने के लिए इस कार्यक्रम का दुरुपयोग कर रही हैं। इस दुरुपयोग को रोकने के लिए यूएससीआईएस में याचिका भी दी जाती है लेकिन इसका भी दुरुपयोग बढ़ने की शिकायतें मिली है।
ये भी पढ़ें: चीनी आक्रामकता से निपटने की तैयारी: विमानों की तैनाती, जहाजों की मरम्मत; हिंद-प्रशांत में रणनीतिक कवच मजबूत
विश्वसनीयता की कमजोरी
ओआईजी के बयान में कहा गया है कि इस तरह की कथित अनियमितताएं श्रम विभाग की अहम योजनाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। इनका उद्देश्य वास्तविक श्रम कमी को दूर करना है, न कि अमेरिकी नौकरियों की कीमत पर गलत तरीके अपनाने वाले लोगों को लाभ पहुंचाना। यह वीजा भारतीय कामगारों के बीच काफी लोकप्रिय है।
वीजा नियमों में बदलाव को लेकर हो रही कार्रवाई
एच-1बी एक गैर-आप्रवासी वीजा है जो अमेरिकी नियोक्ताओं को तकनीकी और विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में अस्थायी रूप से विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इसके लिए नियमित कोटा 65,000 वीजा का होता है और अमेरिका से मास्टर डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा आरक्षित होते हैं। इनमें बदलाव को लेकर ट्रंप प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।
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अमेरिकी श्रम विभाग के तहत आने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (ओआईजी) के मुताबिक, जांच में ऐसे व्यापक तौर-तरीकों का पता चला है, जिनमें नियोक्ताओं और श्रम दलालों ने कथित रूप से फर्जी आवेदन दाखिल किए, विदेशी कामगारों का वेतन वापस लेने जैसी जबरन व्यवस्थाओं के जरिये उनका शोषण किया तथा बहुत कम वेतन पाने वाले श्रमिकों की अधिक संख्या लाकर अमेरिकी कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचाया।
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संदिग्ध विदेशी जालसाजों पर होगी सख्ती: वेंस
मिलवौकी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, अमेरिका में एच-1बी का दुरुपयोग करने वाले संदिग्ध विदेशी जालसाजों के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। वह बोले, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस योजना के जरिये अमेरिकियों के हितों को नुकसान न पहुंचे। वेंस ने कहा, यह कार्रवाई करदाताओं के पैसे की सुरक्षा और वीजा कार्यक्रमों के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक व्यापक धोखाधड़ी-विरोधी अभियान का हिस्सा है।
अमेरिकी श्रम मंत्रालय ने कहा, हमें पता चला है कि इनमें कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों का भी जिक्र है। इन कंपनियों का नाम पीईआरएम और एच-1बी वीजा से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में सामने आया है। कंपनी का जिक्र करने के बाद इसकी शाखाओं में हलचल है और अगली कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
बड़ी कंपनियां कर रहीं दुरुपयोग
एच-1बी कार्यक्रम के मूल उद्देश्य को समझाते हुए वेंस ने कहा कि इसका गठन वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों सहित अत्यंत कुशल पेशेवरों को अमेरिका में काम की अनुमति देने के लिए किया गया था। यह वीजा कार्यक्रम कुशल तकनीकी विशेषज्ञ, उत्कृष्ट वैज्ञानिक या बेहतरीन डॉक्टरों के लिए था, लेकिन बड़ी कंपनियां और विदेशी संस्थाएं अमेरिकी श्रमिकों की मजदूरी कम करने के लिए इस कार्यक्रम का दुरुपयोग कर रही हैं। इस दुरुपयोग को रोकने के लिए यूएससीआईएस में याचिका भी दी जाती है लेकिन इसका भी दुरुपयोग बढ़ने की शिकायतें मिली है।
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विश्वसनीयता की कमजोरी
ओआईजी के बयान में कहा गया है कि इस तरह की कथित अनियमितताएं श्रम विभाग की अहम योजनाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। इनका उद्देश्य वास्तविक श्रम कमी को दूर करना है, न कि अमेरिकी नौकरियों की कीमत पर गलत तरीके अपनाने वाले लोगों को लाभ पहुंचाना। यह वीजा भारतीय कामगारों के बीच काफी लोकप्रिय है।
वीजा नियमों में बदलाव को लेकर हो रही कार्रवाई
एच-1बी एक गैर-आप्रवासी वीजा है जो अमेरिकी नियोक्ताओं को तकनीकी और विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में अस्थायी रूप से विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। इसके लिए नियमित कोटा 65,000 वीजा का होता है और अमेरिका से मास्टर डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा आरक्षित होते हैं। इनमें बदलाव को लेकर ट्रंप प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।