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अमेरिका की वीजा नीति का असर: घट सकते हैं 1.1 लाख विदेशी छात्र, होगा 3.4 अरब डॉलर का नुकसान; रिपोर्ट में दावा
Wed, 12 Aug 2026 11:07 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 12 Aug 2026 11:07 PM IST
सार
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में स्नातक स्तर पर विदेशी छात्रों के दाखिले में गिरावट आर्थिक नुकसान की सबसे बड़ी वजह है। इसका असर खासतौर पर उन संस्थानों पर पड़ रहा है, जहां विदेशी छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में और क्या-क्या कहा गया है? जानिए...
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अमेरिका की वीजा नीति का असर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका की सख्त वीजा नीति और बदलती नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता का असर विदेशी छात्रों के दाखिले पर पड़ सकता है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के शीतकालीन सत्र में अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले में 1.1 लाख तक की कमी आ सकती है।
शिक्षकों के संगठन (एनएएफएसए) एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल एजुकेटर्स और शोध संस्था जेबी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी छात्रों की संख्या घटने से अमेरिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था को 3.4 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 32,457.83 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इससे करीब 39,000 नौकरियों पर भी असर पड़ने का अनुमान है।
11.69 लाख से घटकर 10.57 लाख हो सकती है संख्या
रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 के शीतकालीन सत्र में अमेरिका में विदेशी छात्रों के दाखिले की अनुमानित संख्या 11.69 लाख थी। इस साल यह घटकर 10.57 लाख रह सकती है। अमेरिका में विदेशी छात्रों के सबसे बड़े स्रोत के तौर पर भारत की अहम भूमिका है। 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिका में अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था।
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अर्थव्यवस्था को भी लगेगा बड़ा झटका
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 के शीतकालीन सत्र में विदेशी छात्रों ने अमेरिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था में 41.77 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 3,98,754.02 करोड़ रुपये) का योगदान दिया था। 2026-27 में यह घटकर 38.37 अरब डॉलर (करीब 3,66,296.19 करोड़ रुपए) रहने का अनुमान है।
एनएएफएसए की कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी फैंटा आव ने कहा कि अमेरिका की नीतियां और नियम इस बात को प्रभावित करते हैं कि विदेशी छात्र अपना भविष्य कहां बनाने का फैसला करते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के ये फैसले अमेरिकी समाज और अर्थव्यवस्था पर छोटे और लंबे समय में बड़ा असर डालते हैं।
यह भी पढ़ें: 'ट्रंप के कार्यकाल में बदलेगा क्यूबा': मार्को रूबियो का बड़ा दावा, 70 साल पुरानी व्यवस्था पर क्या बोले?
विश्व कप टिकट धारकों को वीजा प्राथमिकता भी बनी वजह
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सख्त वीजा नीतियों के अलावा, विदेश विभाग की ओर से फीफा विश्व कप के टिकट धारकों को छात्रों की तुलना में वीजा जारी करने में प्राथमिकता देना भी विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से इस व्यस्त मौसम में विदेश विभाग छात्र और शोधकर्ता वीजा आवेदनों को प्राथमिकता देता रहा है। इससे छात्रों को समय पर विश्वविद्यालय परिसरों में पहुंचने में मदद मिलती थी।
कई देशों के यात्रियों पर पहले भी लगी थी पाबंदी
पिछले साल अमेरिकी सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अफगानिस्तान और यमन समेत दर्जनों देशों के यात्रियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एक नियम को अंतिम रूप दिया। इसके तहत विदेशी छात्रों को विस्तार की मंजूरी के बिना अमेरिका में चार साल से अधिक समय तक रहने की अनुमति नहीं होगी।
इस बदलाव से लंबे समय वाले डॉक्टरेट कार्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों के सामने मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। उन छात्रों पर भी असर पड़ सकता है जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अस्थायी तौर पर अमेरिका में काम करने की उम्मीद रखते हैं।
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शिक्षकों के संगठन (एनएएफएसए) एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल एजुकेटर्स और शोध संस्था जेबी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी छात्रों की संख्या घटने से अमेरिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था को 3.4 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 32,457.83 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इससे करीब 39,000 नौकरियों पर भी असर पड़ने का अनुमान है।
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11.69 लाख से घटकर 10.57 लाख हो सकती है संख्या
रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 के शीतकालीन सत्र में अमेरिका में विदेशी छात्रों के दाखिले की अनुमानित संख्या 11.69 लाख थी। इस साल यह घटकर 10.57 लाख रह सकती है। अमेरिका में विदेशी छात्रों के सबसे बड़े स्रोत के तौर पर भारत की अहम भूमिका है। 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिका में अलग-अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था।
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अर्थव्यवस्था को भी लगेगा बड़ा झटका
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 के शीतकालीन सत्र में विदेशी छात्रों ने अमेरिकी स्थानीय अर्थव्यवस्था में 41.77 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 3,98,754.02 करोड़ रुपये) का योगदान दिया था। 2026-27 में यह घटकर 38.37 अरब डॉलर (करीब 3,66,296.19 करोड़ रुपए) रहने का अनुमान है।
एनएएफएसए की कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी फैंटा आव ने कहा कि अमेरिका की नीतियां और नियम इस बात को प्रभावित करते हैं कि विदेशी छात्र अपना भविष्य कहां बनाने का फैसला करते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के ये फैसले अमेरिकी समाज और अर्थव्यवस्था पर छोटे और लंबे समय में बड़ा असर डालते हैं।
यह भी पढ़ें: 'ट्रंप के कार्यकाल में बदलेगा क्यूबा': मार्को रूबियो का बड़ा दावा, 70 साल पुरानी व्यवस्था पर क्या बोले?
विश्व कप टिकट धारकों को वीजा प्राथमिकता भी बनी वजह
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सख्त वीजा नीतियों के अलावा, विदेश विभाग की ओर से फीफा विश्व कप के टिकट धारकों को छात्रों की तुलना में वीजा जारी करने में प्राथमिकता देना भी विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से इस व्यस्त मौसम में विदेश विभाग छात्र और शोधकर्ता वीजा आवेदनों को प्राथमिकता देता रहा है। इससे छात्रों को समय पर विश्वविद्यालय परिसरों में पहुंचने में मदद मिलती थी।
कई देशों के यात्रियों पर पहले भी लगी थी पाबंदी
पिछले साल अमेरिकी सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अफगानिस्तान और यमन समेत दर्जनों देशों के यात्रियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने एक नियम को अंतिम रूप दिया। इसके तहत विदेशी छात्रों को विस्तार की मंजूरी के बिना अमेरिका में चार साल से अधिक समय तक रहने की अनुमति नहीं होगी।
इस बदलाव से लंबे समय वाले डॉक्टरेट कार्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों के सामने मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। उन छात्रों पर भी असर पड़ सकता है जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अस्थायी तौर पर अमेरिका में काम करने की उम्मीद रखते हैं।