Bihar: विक्रमशिला सेतु पर सियासी संग्राम, मंत्री बोले- प्राकृतिक आपदा, सांसद ने कहा- लापरवाही का नतीजा
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु को लेकर ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल और जदयू सांसद अजय कुमार मंडल के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। बुलो मंडल ने सेतु के क्षतिग्रस्त होने को प्राकृतिक कारण बताया और कहा कि निर्माण कार्य तय समय पर होगा।
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भागलपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब इसके पुनर्निर्माण और बेली ब्रिज हटाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक ओर ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने सेतु के क्षतिग्रस्त होने को प्राकृतिक कारणों से जोड़ते हुए कहा कि पुल को किसी ने गिराया नहीं है, वहीं भागलपुर के जदयू सांसद अजय कुमार मंडल ने इसे विभागीय और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया है। सांसद का आरोप है कि पुल की खराब स्थिति की जानकारी उन्होंने करीब आठ महीने पहले ही पथ निर्माण विभाग को दे दी थी और तकनीकी रिपोर्ट भी उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन समय रहते जरूरी काम नहीं कराया गया।
29 अगस्त से बेली ब्रिज हटाकर शुरू होगा काम
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद वाहनों की आवाजाही को बनाए रखने के लिए बेली ब्रिज का निर्माण कराया गया था। अब 29 अगस्त से बेली ब्रिज को हटाकर सेतु के सब-स्ट्रक्चर और सुपर स्ट्रक्चर पर काम शुरू करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य पुल को दोबारा तैयार कर सभी वाहनों के लिए आवागमन बहाल करना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 नवंबर तक विक्रमशिला सेतु को पहले की तरह वाहनों के आवागमन के लिए तैयार करने की बात कही है। हालांकि, इस अवधि में कई बड़े पर्व-त्योहार हैं और गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बाढ़ के दौरान बेली ब्रिज हटने से लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
छठ के बाद काम कराने की मांग पर मंत्री ने कहा- ‘काम समय पर ही होगा’
विक्रमशिला सेतु का पुनर्निर्माण छठ पूजा के बाद कराने की मांग पर ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने कहा कि सेतु को किसी ने गिराया नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक कारणों से हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार पूरे मामले को देख रही है। उन्होंने कहा कि अगर तय समय पर काम नहीं हुआ तो जनता और मीडिया सवाल उठाएंगे। उनके मुताबिक, दुर्गा पूजा, दिवाली, बकरीद और मुहर्रम जैसे पर्व आते-जाते रहेंगे और विकास कार्य भी समय पर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के समय को देखते हुए सरकार वैकल्पिक रास्ते पर भी विचार करेगी।
सांसद अजय मंडल ने कहा- ‘पुल खराब होने की पहले ही दी थी जानकारी’
भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर त्योहारों के बाद बेली ब्रिज हटाकर सेतु का काम शुरू कराने का आग्रह किया है। सांसद का कहना है कि अगर त्योहारों के बीच बेली ब्रिज हटा दिया गया तो पूर्वांचल और सीमांचल के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अजय मंडल ने दावा किया कि सेतु के क्षतिग्रस्त होने से करीब आठ महीने पहले ही उन्होंने पथ निर्माण विभाग को पत्र लिखकर पुल की खराब स्थिति की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में तकनीकी रिपोर्ट भी तैयार कराई गई थी और विभाग को इसके लिए राशि भी उपलब्ध कराई गई थी।
‘कार्बन प्लेट नहीं बदली, एक्सपेंशन जॉइंट की जांच भी नहीं हुई’
सांसद अजय मंडल ने आरोप लगाया कि पुल की जरूरी मरम्मत समय पर नहीं कराई गई। उनके मुताबिक, सेतु की कार्बन प्लेट नहीं बदली गई और एक्सपेंशन जॉइंट की भी सही तरीके से जांच नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में पैसा आने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं किया गया। सांसद ने कहा कि अगर समय रहते जरूरी तकनीकी काम कराए जाते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों पर पैसे खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीन पर जरूरी काम नहीं हुआ।
‘यह प्राकृतिक आपदा नहीं, विभागीय लापरवाही की आपदा है’
अजय मंडल ने ऊर्जा मंत्री के बयान से अलग रुख अपनाते हुए कहा कि विक्रमशिला सेतु का क्षतिग्रस्त होना प्राकृतिक आपदा नहीं है। उन्होंने इसे ‘विभागीय लापरवाही की आपदा’ बताया। सांसद ने कहा कि जब पुल की खराब स्थिति की जानकारी पहले ही दे दी गई थी और तकनीकी रिपोर्ट भी सामने थी, तब समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों से लिया जाना चाहिए।
त्योहारों के बीच बेली ब्रिज हटाने पर चिंता
सांसद ने कहा कि सावन के बाद कई महत्वपूर्ण पर्व और त्योहार आने वाले हैं। इनमें काली पूजा, दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ महापर्व शामिल हैं। ऐसे समय में अगर बेली ब्रिज हटा दिया गया तो भागलपुर के साथ-साथ पूर्वांचल और सीमांचल के लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लोगों की परेशानी को देखते हुए त्योहारों के बाद ही बेली ब्रिज हटाकर विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण का काम कराया जाए। वहीं, सरकार की ओर से बाढ़ और यातायात की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक मार्ग तलाशने की बात कही गई है।