Bihar: बिहार कृषि विश्वविद्यालय में हुआ 35 करोड़ का घोटाला! कैग की रिपोर्ट में क्या? PM मोदी तक पहुंची शिकायत
Bihar: बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कुलपति और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कैग की 186 पन्नों की रिपोर्ट में नियुक्तियों, खरीद प्रक्रियाओं, निविदाओं और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
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बिहार में भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दावा करने वाली सरकार अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में सामने आए कथित भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों को लेकर सवालों के घेरे में है। बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को विस्तृत पत्र लिखकर बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में नियुक्ति, खरीद, निविदा, प्रोन्नति, निर्माण कार्य एवं छात्र नामांकन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच प्रतिवेदन में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वर्तमान कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह एवं उनके सहयोगी अधिकारियों पर गंभीर आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना अत्यंत चिंताजनक है।
पहले राज्यपाल से मिलकर भी सौंपा गया था परिवाद
आपको बता दें कि सांसद सुधाकर सिंह इससे पूर्व बिहार के राज्यपाल से मिलकर भी इस पूरे मामले का विस्तृत परिवाद एवं दस्तावेज सौंप चुके हैं। राजभवन को कई बार शिकायतें एवं साक्ष्य उपलब्ध कराए गए, लेकिन अब तक किसी प्रकार की निर्णायक कार्रवाई नहीं होने से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली एवं सरकारी तंत्र की निष्क्रियता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, राजभवन द्वारा विश्वविद्यालय से कई मामलों में जवाब भी मांगा गया था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा समय पर जवाब नहीं दिए जाने के बावजूद आगे की कार्रवाई लंबित रही। इसे लेकर अब विपक्षी दलों एवं सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
कैग रिपोर्ट में 186 पृष्ठों में अनियमितताओं का उल्लेख
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा समर्पित लगभग 186 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट संख्या- फ्व-154313/2025-26 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में प्रशाखा पदाधिकारी, सहायक कुलसचिव, विषय-वस्तु विशेषज्ञ, सहायक प्रोफेसर, निदेशक कार्य एवं संयंत्र सहित लगभग 350 महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त लगभग 35 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया, निविदा प्रबंधन, मानव बल एवं सुरक्षा एजेंसियों के चयन, संविदा कर्मियों के वेतन से कथित अवैध वसूली तथा निर्माण कार्यों में अनियमितताओं को भी गंभीर रूप से चिन्हित किया गया है।
विभागीय अनुमति के बिना नियुक्तियों का आरोप
विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह भी आरोप है कि प्रशाखा पदाधिकारी, निदेशक कार्य एवं संयंत्र तथा सहायक कुलसचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर विभागीय अनुमति के बिना ही नियुक्तियां कर दी गईं। इतना ही नहीं, संविदा एवं नियमित नियुक्तियों के साथ-साथ मनमाने तरीके से प्रोन्नति दिए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कई नियुक्तियां नियमों को दरकिनार कर की गईं, जबकि सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन कर नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका था।
कृषि विभाग की जांच समितियों ने भी पाए थे आरोप सही
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा दो अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया था। दोनों समितियों ने प्रथम दृष्टया आरोपों को सही पाया था। बावजूद इसके, जांच प्रक्रिया आज तक अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। आरोप है कि विभागीय उदासीनता का लाभ कुलपति एवं उनके सहयोगी अधिकारियों को मिल रहा है और इसी कारण विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं का सिलसिला लगातार जारी है।
'जीरो टॉलरेंस' बनाम जमीनी हकीकत
बिहार सरकार लगातार भ्रष्टाचार के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सार्वजनिक मंचों से भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन बिहार कृषि विश्वविद्यालय में सामने आए इतने बड़े मामलों के बावजूद कार्रवाई नहीं होना सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कैग जैसी संवैधानिक संस्था की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे प्रशासनिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर गंभीर असर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री से दंडात्मक कार्रवाई की मांग
सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह एवं उनके सहयोगी अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक कुलपति की प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव राज्य की कृषि व्यवस्था, छात्रों और शोध कार्यों पर पड़ेगा।
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विश्वविद्यालय प्रशासन पर बढ़ता दबाव
कैग रिपोर्ट सार्वजनिक होने एवं सांसद द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शिक्षक संगठनों, कर्मचारियों एवं सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। अब सभी की नजरें केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं राजभवन पर टिकी हैं कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के इस बड़े मामले में आखिर कब कार्रवाई होती है।