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Bihar: नीतीश कुमार की खाली सीट नहीं लेना चाहेंगे निशांत कुमार! जून में बिहार की राजनीति कौन नए चेहरे लाएगी?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Aditya Anand
Updated Tue, 19 May 2026 06:56 PM IST
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सार
Bihar News : बिहार की राजनीति में जून का महीना अहम होने वाला है। कई नए चेहरों के सदन में जाने पर मुहर लगेगी। रास्ता होगा विधान परिषद् का। खास बात यह भी कि नीतीश कुमार की खाली सीट उनके बेटे निशांत कुमार लेना चाहेंगे या नहीं?
बिहार विधान परिषद् चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार विधान परिषद् की एक सीट गंवाने के बाद अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पूरी तरह एक्टिव हो गई है। एनडीए के अंदर दलों के बीच चुनावी की चर्चा हो रही है। सभी दल इस पर मंथन कर रहा है। 28 जून को विधान परिषद् की नौ सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन नौ सीट में चार सीट फिलहाल जनता दल यूनाईटेड के पास है। दो-दो सीट भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के पास है। वहीं एक सीट कांग्रेस के पास है। वहीं नौ के अलावा एक सीट जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से खाली हुई है। इस पर उपचुनाव होना है।
दीपक प्रकाश का विधान परिषद् जाना तय
विधान परिषद् चुनाव से पहले सबसे अधिक चर्चा दो बड़े नेताओं के बेटों की है। इनमें जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नाम शामिल हैं। दोनों मंत्री बनाए गए हैं। दोनों किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। दोनों को लेकर चर्चा है कि इन्हें विधान परिषद् भेजने की तैयारी चल रही है। कुछ दिन पहले दीपक प्रकाश ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। सूत्र बता रहे हैं कि सम्राट चौधरी अपनी खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद् भेजेंगे। दीपक प्रकाश के मंत्री बनने से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। वहां से भी उन्हें दीपक प्रकाश को लेकर आश्वासन मिल चुका है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश एमएलसी बनेंगे।
निशांत कुमार को लेकर जदयू में मंथन जारी
इधर, जदयू से गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा, और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है। निशांत को लेकर चर्चा है कि वह नीतीश कुमार की खाली हुई सीट से विधान परिषद् भेजे जाएंगे। इस सीट का कार्यकाल 2030 में खत्म होगा। जदयू प्रदेश कार्यालय में बैठकों का दौर जारी है। भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन उपचुनाव में जदयू को राजद से हार का सामना करना पड़ा था। सियासी गलियारे में इसको लेकर अलग-अलग बातें भी होने लगी। इन सबको देखते हुए जदयू के वरिष्ठ नेता फिर से एक्टिव हुए हैं। वरिष्ठ नेताओं ने साफ संदेश दे दिया है कि वह किसी भी कीमत पर विधान परिषद् में अपनी संख्या कम करना नहीं चाहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि निशांत कुमार को लेकर दो बातें चल रही है। जदयू के कुछ नेता निशांत को हरनौत से विधानसभा लड़वाने चाह रहे हैं। वहीं कुछ नेता विधान परिषद् भेजना चाह रहे हैं। अगर हरनौत से निशांत कुमार चुनाव लड़ते हैं तो वहां से जदयू विधायक का इस्तीफा दिलवाकर उन्हें विधान परिषद् भेजा जाएगा। हालांकि, इस विषय पर जदयू में मंथन चल रही है। जल्द ही सारी तस्वीर साफ हो जाएगी।
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ये भी पढ़ें- Bihar: सभी जिलों की एयर कनेक्टिविटी पर बात कहां तक बढ़ी? मुख्यमंत्री के साथ केंद्र के अफसरों की बैठक
तेजस्वी के लिए एक सीट पर उम्मीदवार तय करना बड़ी चुनौती
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि राजद से मो. फारूक और सुनील कुमार सिंह की विधान परिषद की सदस्यता समाप्त हो रही है। राजद को इस विधान परिषद् चुनाव में एक सीट का नुकसान होगा। विधानसभा में सीटों की संख्या कम होने के कारण राजद के पास केवल एक ही सीट बचेगा। अब एक सीट पर तेजस्वी यादव किसे चुनाव लड़वाते हैं? यह उनके लिए चुनौती होगी। क्योंकि राज्यसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने विधान परिषद् की एक सीट चाहत में आकर ही महागठबंधन को वोट दिया था। सुनील सिंह राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई भी है। वह लालू परिवार के काफी करीबी भी हैं। अब देखना यह होगा कि तेजस्वी यादव राजद से किसी को भेजते हैं या एआईएमआईएम के साथ अपना वादा निभाते हैं। वहीं कांग्रेस के डॉ. समीर कुमार सिंह का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। कांग्रेस में भी एक सीट को लेकर मंथन चल रहा है।
ये भी पढ़ें- Bihar: 'देश में 123 बार लीक हुआ पेपर, फिर भी मौन है सरकार'; नीट पेपरलीक पर पप्पू यादव ने सरकार पर साधा निशाना
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दीपक प्रकाश का विधान परिषद् जाना तय
विधान परिषद् चुनाव से पहले सबसे अधिक चर्चा दो बड़े नेताओं के बेटों की है। इनमें जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नाम शामिल हैं। दोनों मंत्री बनाए गए हैं। दोनों किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। दोनों को लेकर चर्चा है कि इन्हें विधान परिषद् भेजने की तैयारी चल रही है। कुछ दिन पहले दीपक प्रकाश ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। सूत्र बता रहे हैं कि सम्राट चौधरी अपनी खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद् भेजेंगे। दीपक प्रकाश के मंत्री बनने से पहले उपेंद्र कुशवाहा ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। वहां से भी उन्हें दीपक प्रकाश को लेकर आश्वासन मिल चुका है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश एमएलसी बनेंगे।
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निशांत कुमार को लेकर जदयू में मंथन जारी
इधर, जदयू से गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा, और श्रीभगवान सिंह कुशवाहा का कार्यकाल 28 जून को समाप्त हो रहा है। निशांत को लेकर चर्चा है कि वह नीतीश कुमार की खाली हुई सीट से विधान परिषद् भेजे जाएंगे। इस सीट का कार्यकाल 2030 में खत्म होगा। जदयू प्रदेश कार्यालय में बैठकों का दौर जारी है। भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन उपचुनाव में जदयू को राजद से हार का सामना करना पड़ा था। सियासी गलियारे में इसको लेकर अलग-अलग बातें भी होने लगी। इन सबको देखते हुए जदयू के वरिष्ठ नेता फिर से एक्टिव हुए हैं। वरिष्ठ नेताओं ने साफ संदेश दे दिया है कि वह किसी भी कीमत पर विधान परिषद् में अपनी संख्या कम करना नहीं चाहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि निशांत कुमार को लेकर दो बातें चल रही है। जदयू के कुछ नेता निशांत को हरनौत से विधानसभा लड़वाने चाह रहे हैं। वहीं कुछ नेता विधान परिषद् भेजना चाह रहे हैं। अगर हरनौत से निशांत कुमार चुनाव लड़ते हैं तो वहां से जदयू विधायक का इस्तीफा दिलवाकर उन्हें विधान परिषद् भेजा जाएगा। हालांकि, इस विषय पर जदयू में मंथन चल रही है। जल्द ही सारी तस्वीर साफ हो जाएगी।
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तेजस्वी के लिए एक सीट पर उम्मीदवार तय करना बड़ी चुनौती
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि राजद से मो. फारूक और सुनील कुमार सिंह की विधान परिषद की सदस्यता समाप्त हो रही है। राजद को इस विधान परिषद् चुनाव में एक सीट का नुकसान होगा। विधानसभा में सीटों की संख्या कम होने के कारण राजद के पास केवल एक ही सीट बचेगा। अब एक सीट पर तेजस्वी यादव किसे चुनाव लड़वाते हैं? यह उनके लिए चुनौती होगी। क्योंकि राज्यसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने विधान परिषद् की एक सीट चाहत में आकर ही महागठबंधन को वोट दिया था। सुनील सिंह राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई भी है। वह लालू परिवार के काफी करीबी भी हैं। अब देखना यह होगा कि तेजस्वी यादव राजद से किसी को भेजते हैं या एआईएमआईएम के साथ अपना वादा निभाते हैं। वहीं कांग्रेस के डॉ. समीर कुमार सिंह का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। कांग्रेस में भी एक सीट को लेकर मंथन चल रहा है।
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