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Bihar: 1100 रुपये की वृद्धावस्था पेंशन निकालने गया था बुजुर्ग, रसीद हाथ में आई तो बन चुका था अरबपति; ये है वजह
Mon, 13 Jul 2026 10:52 AM IST
दरभंगा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: दरभंगा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 10:52 AM IST
सार
समस्तीपुर के सरायरंजन में 80 वर्षीय पेंशनधारी भारत ईश्वर की ट्रांजेक्शन रसीद में 7 अरब रुपये से अधिक का बैलेंस दिखने से गांव में सनसनी फैल गई। जांच में बैंक ने स्पष्ट किया कि यह तकनीकी गड़बड़ी थी और खाते में वास्तविक शेष राशि केवल 500 रुपये है।
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1100 रुपये की पेंशन निकालने पहुंचे बुजुर्ग की रसीद में दिखे 7 अरब रुपये
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
समस्तीपुर जिले में एक ट्रांजेक्शन रसीद ने पूरे गांव में हलचल मचा दी। सरायरंजन प्रखंड के गावपुर गांव के एक 80 वर्षीय वृद्ध पेंशनधारी जब अपनी 1100 रुपये की वृद्धावस्था पेंशन निकालने ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) पहुंचे, तो उन्हें मिली रसीद में खाते का बैलेंस 7 अरब 40 करोड़ 68 लाख 72 हजार 895 रुपये 78 पैसे दर्ज था। यह आंकड़ा देखकर न सिर्फ बुजुर्ग, बल्कि सीएसपी संचालक और आसपास के लोग भी हैरान रह गए।
घटना सरायरंजन प्रखंड की नोआचक पंचायत के गावपुर गांव की है। वृद्ध पेंशनधारी भारत ईश्वर आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) के माध्यम से पेंशन की राशि निकालने पहुंचे थे। निकासी पूरी होने के बाद ट्रांजेक्शन रसीद में अरबों रुपये का बैलेंस दिखाई दिया, जिसके बाद गांव में यह चर्चा फैल गई कि एक सामान्य पेंशनधारी अचानक अरबपति कैसे बन गया।
रसीद देखने के लिए सीएसपी पर जुटने लगी भीड़
अरबों रुपये का बैलेंस दिखने की खबर कुछ ही देर में पूरे गांव और आसपास के इलाकों में फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण सीएसपी पहुंचकर रसीद देखने लगे। दिनभर इसी घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं और लोग इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाते रहे।
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बैंक पहुंचने पर सामने आई असलियत
बढ़ती चर्चाओं के बीच भारत ईश्वर सरायरंजन स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पहुंचे। शाखा प्रबंधक ने खाते की जांच की तो पता चला कि खाते में किसी प्रकार की बड़ी राशि जमा नहीं हुई है। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार खाते में वास्तविक शेष राशि मात्र 500 रुपये थी और किसी असामान्य लेन-देन का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
ये भी पढ़ें- ई-रिक्शा चलाने वाले के बैंक खाते में 7 अरब रुपये! किसने बनाया ऐसा दौलतमंद, आज पता करेगा CBI
तकनीकी गड़बड़ी बनी वजह
शाखा प्रबंधक रोहित कुमार ने बताया कि ट्रांजेक्शन रसीद में अरबों रुपये का बैलेंस दिखाई देना बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी त्रुटि का परिणाम है। इसकी सूचना क्षेत्रीय कार्यालय को भेज दी गई है, ताकि तकनीकी खामी की जांच कर उसे दूर किया जा सके। उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि यदि भविष्य में खाते से जुड़ी कोई असामान्य जानकारी दिखाई दे तो अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय सीधे बैंक से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि करें।
डिजिटल बैंकिंग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
हालांकि, मामला तकनीकी गड़बड़ी का निकला, लेकिन इस घटना ने डिजिटल बैंकिंग और एईपीएस आधारित लेन-देन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकी त्रुटियां ग्राहकों में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती हैं और बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा भी प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि बैंक समय रहते ऐसी खामियों को दूर करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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घटना सरायरंजन प्रखंड की नोआचक पंचायत के गावपुर गांव की है। वृद्ध पेंशनधारी भारत ईश्वर आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) के माध्यम से पेंशन की राशि निकालने पहुंचे थे। निकासी पूरी होने के बाद ट्रांजेक्शन रसीद में अरबों रुपये का बैलेंस दिखाई दिया, जिसके बाद गांव में यह चर्चा फैल गई कि एक सामान्य पेंशनधारी अचानक अरबपति कैसे बन गया।
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रसीद देखने के लिए सीएसपी पर जुटने लगी भीड़
अरबों रुपये का बैलेंस दिखने की खबर कुछ ही देर में पूरे गांव और आसपास के इलाकों में फैल गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण सीएसपी पहुंचकर रसीद देखने लगे। दिनभर इसी घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं और लोग इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाते रहे।
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बैंक पहुंचने पर सामने आई असलियत
बढ़ती चर्चाओं के बीच भारत ईश्वर सरायरंजन स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा पहुंचे। शाखा प्रबंधक ने खाते की जांच की तो पता चला कि खाते में किसी प्रकार की बड़ी राशि जमा नहीं हुई है। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार खाते में वास्तविक शेष राशि मात्र 500 रुपये थी और किसी असामान्य लेन-देन का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
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तकनीकी गड़बड़ी बनी वजह
शाखा प्रबंधक रोहित कुमार ने बताया कि ट्रांजेक्शन रसीद में अरबों रुपये का बैलेंस दिखाई देना बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी त्रुटि का परिणाम है। इसकी सूचना क्षेत्रीय कार्यालय को भेज दी गई है, ताकि तकनीकी खामी की जांच कर उसे दूर किया जा सके। उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि यदि भविष्य में खाते से जुड़ी कोई असामान्य जानकारी दिखाई दे तो अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय सीधे बैंक से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि करें।
डिजिटल बैंकिंग की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
हालांकि, मामला तकनीकी गड़बड़ी का निकला, लेकिन इस घटना ने डिजिटल बैंकिंग और एईपीएस आधारित लेन-देन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकी त्रुटियां ग्राहकों में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती हैं और बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा भी प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि बैंक समय रहते ऐसी खामियों को दूर करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।