Bihar : सरकारी अफसरों ने संविधान की शपथ लेकर रचाई शादी; दुल्हन बोली- मंत्र समझ में नहीं आते हैं
दुल्हन ने कहा कि हम दोनों ओबीसी समाज से आते हैं। इतिहास में हमारे समाज को कई तरह की सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक संसाधनों तक भी समान अधिकार नहीं थे। आज हम जिस पद पर हैं, वह संविधान द्वारा मिले अधिकारों की वजह से संभव हुआ है।
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बिहार के दरभंगा जिले के बहेड़ी थाना क्षेत्र के बिहरौना गांव निवासी 67वीं बीपीएससी परीक्षा में चयनित अनंत कुमार और नालंदा जिले की शिखा ने पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों की बजाय संविधान की शपथ लेकर विवाह किया। दोनों ने पटना के एक मैरिज हॉल में 27 फरवरी की रात आयोजित समारोह में बिना सात फेरे लिए, भारतीय संविधान की प्रस्तावना हाथ में लेकर एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।
अनंत कुमार वर्तमान में अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि शिखा प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी हैं। दोनों एक ही बैच के अधिकारी हैं और पहले से एक-दूसरे को जानते थे। शिखा की मां गीता देवी दरभंगा जिला परिषद की पूर्व सदस्य रह चुकी हैं।
परिवार के अनुसार, पटना में रहने के दौरान उनका संपर्क बौद्ध विचारधारा से जुड़े लोगों से हुआ, जिसके बाद उन्होंने समानता और संवैधानिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाया। इसी सोच के तहत परिवार में पारंपरिक पूजा-पाठ बंद कर दिए गए और सामाजिक समानता पर जोर दिया जाने लगा।
विवाह समारोह में पारंपरिक मंत्रोच्चार की जगह संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई। दुल्हन शिखा ने कहा कि जब पंडित जी मंत्र पढ़ते हैं तो वह हमें समझ में नहीं आता। लेकिन संविधान के शब्दों को पढ़ते समय लगा कि मैं उसे मन से स्वीकार कर रही हूँ। हमने संवैधानिक रूप से एक-दूसरे को स्वीकार किया है।
दूल्हा अनंत कुमार ने बताया कि उन्होंने ‘अर्जक पद्धति’ से विवाह किया है। उनका कहना है कि यह पद्धति सामाजिक समानता का संदेश देती है। उन्होंने कहा,हम दोनों ने संविधान पढ़ा है, इतिहास और परंपराओं को समझा है। हमें लगता है कि कुछ परंपराओं ने समाज के बड़े वर्ग को लंबे समय तक जकड़ कर रखा। हम समानता और अधिकारों के संदेश के साथ विवाह करना चाहते थे।”
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अनंत कुमार ने 2017 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उन्हें एक निजी कंपनी में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के पैकेज पर नौकरी मिली थी। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में भी काम किया। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्होंने नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। दो बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बावजूद अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा दी और 2024 में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी बने।
शिखा ने कहा, “हम दोनों ओबीसी समाज से आते हैं। इतिहास में हमारे समाज को कई तरह की सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ा। सार्वजनिक संसाधनों तक भी समान अधिकार नहीं थे। आज हम जिस पद पर हैं, वह संविधान द्वारा मिले अधिकारों की वजह से संभव हुआ है। इसलिए हमने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को याद करते हुए संविधान की शपथ लेकर विवाह किया। यह अनोखा विवाह इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।