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Bihar: 50 हजार की रिश्वत, घर से मिली थी अवैध पिस्टल; अब CBI रिमांड में रेल अधिकारी से खुलेंगे मिलीभगत के राज
Tue, 04 Aug 2026 11:50 AM IST
दरभंगा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
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Published by: दरभंगा ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:50 AM IST
सार
समस्तीपुर रेल मंडल के चर्चित रिश्वतखोरी मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। न्यायिक हिरासत में बंद APO-2 अरुण मंडल को रिमांड पर समस्तीपुर लाकर पूछताछ की जा रही है। एजेंसी रिश्वत नेटवर्क, विभागीय मिलीभगत और बरामद अवैध हथियार से जुड़े पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
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सहायक कार्मिक पदाधिकारी अरुण मंडल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
समस्तीपुर रेल मंडल के बहुचर्चित रिश्वतखोरी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच तेज कर दी है। पटना के बेउर केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में बंद रेल मंडल के सहायक कार्मिक पदाधिकारी (APO-2) अरुण मंडल को रिमांड पर लेकर CBI की टीम मंगलवार को समस्तीपुर पहुंची है। एजेंसी और नगर थाना पुलिस उनसे आमने-सामने पूछताछ कर पूरे रिश्वत नेटवर्क, विभागीय मिलीभगत तथा बरामद अवैध हथियार एवं अन्य साक्ष्यों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
23 जुलाई को रंगेहाथ हुई थी गिरफ्तारी
पूरे मामले की शुरुआत 23 जुलाई को हुई, जब सीबीआई की टीम ने समस्तीपुर रेल मंडल कार्यालय में जाल बिछाकर APO-2 अरुण मंडल को कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप था कि रेलवे से जुड़े डीलिंग क्लर्क अमृत राज के सेवा संबंधी कार्य के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। कार्रवाई के दौरान CBI ने कार्यालय से ही आरोपी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद कई घंटों तक मंडल कार्यालय में दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई। इस कार्रवाई से पूरे रेल मंडल में हड़कंप मच गया।
डीलिंग क्लर्क अमृत राज की 45 दिन पहले शिकायत
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, करीब 45 दिन पहले रेल मंडल के डीलिंग क्लर्क अमृत राज ने CBI से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि APO-2 अरुण मंडल सेवा संबंधी एक कार्य के बदले एक लाख रुपये रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद CBI ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन किया। कई दिनों तक बातचीत, गतिविधियों और लेन-देन के संकेतों पर नजर रखी गई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ट्रैप ऑपरेशन को मंजूरी दी गई।
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पहली किस्त के 50 हजार रुपये लेते ही रंगेहाथ गिरफ्तार
23 जुलाई को सीबीआई की टीम ने समस्तीपुर रेल मंडल कार्यालय में जाल बिछाया। योजना के अनुसार शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये की पहली किस्त ली जानी थी। जैसे ही अरुण मंडल ने कथित तौर पर ट्रैप की राशि स्वीकार की, पहले से मौजूद CBI टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद कार्यालय में घंटों तलाशी चली और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए।
तलाशी में मिला अवैध हथियार
रिश्वत मामले में गिरफ्तारी के बाद CBI ने आरोपी के सरकारी आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक पिस्टल, दो मैगजीन और नौ जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके बाद नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज की गई। इस बरामदगी ने जांच को नया मोड़ दे दिया। अब एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि हथियार कहां से आया और किस उद्देश्य से रखा गया था।
अब रिमांड में खुल सकती हैं कई परतें
न्यायिक हिरासत के बाद बेउर केंद्रीय कारागार भेजे गए अरुण मंडल को अब रिमांड पर समस्तीपुर लाया गया है। CBI उनसे यह जानने का प्रयास करेगी कि कथित रिश्वत की रकम केवल उनके लिए थी या किसी और तक भी पहुंचनी थी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या रेलवे के सेवा संबंधी कार्यों, पदस्थापन और अन्य प्रशासनिक मामलों में सुनियोजित तरीके से अवैध वसूली की जाती थी।
ये भी पढ़ें- जिंदा भी है या नहीं, खबर नहीं; विदेशी जेल में बंद हैं मर्चेंट नेवी अफसर, बेबस मां ने लगाई मदद की गुहार
इन सवालों के जवाब तलाश रही CBI
अरुण मंडल के रिमांड पर समस्तीपुर पहुंचने के बाद रेल मंडल कार्यालय में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों का कहना है कि रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारी के आधार पर CBI कुछ और अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है। यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो इस मामले में कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल पूरे रेल मंडल की निगाहें सीबीआई की रिमांड पूछताछ पर टिकी हैं। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि यह पूछताछ समस्तीपुर रेल मंडल के इस चर्चित घूसकांड की कई अहम परतों से पर्दा उठा सकती है।
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23 जुलाई को रंगेहाथ हुई थी गिरफ्तारी
पूरे मामले की शुरुआत 23 जुलाई को हुई, जब सीबीआई की टीम ने समस्तीपुर रेल मंडल कार्यालय में जाल बिछाकर APO-2 अरुण मंडल को कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप था कि रेलवे से जुड़े डीलिंग क्लर्क अमृत राज के सेवा संबंधी कार्य के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। कार्रवाई के दौरान CBI ने कार्यालय से ही आरोपी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद कई घंटों तक मंडल कार्यालय में दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई। इस कार्रवाई से पूरे रेल मंडल में हड़कंप मच गया।
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डीलिंग क्लर्क अमृत राज की 45 दिन पहले शिकायत
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, करीब 45 दिन पहले रेल मंडल के डीलिंग क्लर्क अमृत राज ने CBI से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि APO-2 अरुण मंडल सेवा संबंधी एक कार्य के बदले एक लाख रुपये रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद CBI ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय पहले पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन किया। कई दिनों तक बातचीत, गतिविधियों और लेन-देन के संकेतों पर नजर रखी गई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ट्रैप ऑपरेशन को मंजूरी दी गई।
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पहली किस्त के 50 हजार रुपये लेते ही रंगेहाथ गिरफ्तार
23 जुलाई को सीबीआई की टीम ने समस्तीपुर रेल मंडल कार्यालय में जाल बिछाया। योजना के अनुसार शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये की पहली किस्त ली जानी थी। जैसे ही अरुण मंडल ने कथित तौर पर ट्रैप की राशि स्वीकार की, पहले से मौजूद CBI टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद कार्यालय में घंटों तलाशी चली और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए।
तलाशी में मिला अवैध हथियार
रिश्वत मामले में गिरफ्तारी के बाद CBI ने आरोपी के सरकारी आवास की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक पिस्टल, दो मैगजीन और नौ जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके बाद नगर थाना में आर्म्स एक्ट के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज की गई। इस बरामदगी ने जांच को नया मोड़ दे दिया। अब एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि हथियार कहां से आया और किस उद्देश्य से रखा गया था।
अब रिमांड में खुल सकती हैं कई परतें
न्यायिक हिरासत के बाद बेउर केंद्रीय कारागार भेजे गए अरुण मंडल को अब रिमांड पर समस्तीपुर लाया गया है। CBI उनसे यह जानने का प्रयास करेगी कि कथित रिश्वत की रकम केवल उनके लिए थी या किसी और तक भी पहुंचनी थी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या रेलवे के सेवा संबंधी कार्यों, पदस्थापन और अन्य प्रशासनिक मामलों में सुनियोजित तरीके से अवैध वसूली की जाती थी।
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इन सवालों के जवाब तलाश रही CBI
- क्या रिश्वतखोरी का यह मामला किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा था?
- क्या विभाग के अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी इस नेटवर्क में शामिल थे?
- बरामद अवैध हथियार कहां से आया और उसे किस उद्देश्य से रखा गया था?
- क्या रेलवे में नियुक्ति, स्थानांतरण या अन्य सेवा संबंधी मामलों में भी अवैध वसूली की जाती थी?
- रेल मंडल कार्यालय में फिर बढ़ी हलचल
अरुण मंडल के रिमांड पर समस्तीपुर पहुंचने के बाद रेल मंडल कार्यालय में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों का कहना है कि रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारी के आधार पर CBI कुछ और अधिकारियों एवं कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है। यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो इस मामले में कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल पूरे रेल मंडल की निगाहें सीबीआई की रिमांड पूछताछ पर टिकी हैं। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि यह पूछताछ समस्तीपुर रेल मंडल के इस चर्चित घूसकांड की कई अहम परतों से पर्दा उठा सकती है।