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Bihar News: 5-6 रुपये किलो बिक रहा आलू, लागत भी नहीं निकल रही, किसान बेहाल; सरकारी हस्तक्षेप की मांग तेज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Sat, 28 Feb 2026 03:36 PM IST
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सार

समस्तीपुर जिले के ताजपुर, पूसा, मोरबा और सरायरंजन क्षेत्रों में आलू की कीमत गिरकर 5–6 रुपये प्रति किलो रह गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

samastipur potato prices low farmers worried
आलू का दाम कम होने से की किसान हुए परेशान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

समस्तीपुर जिले के ताजपुर को आलू उत्पादन का बड़ा केंद्र माना जाता है। ताजपुर के साथ-साथ पूसा, मोरबा और सरायरंजन प्रखंडों में इन दिनों आलू किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है। मंडियों में आलू की कीमत सिर्फ 5 से 6 रुपये प्रति किलो रह गई है। इतनी कम कीमत मिलने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि इस दाम पर बेचने से खेती की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। खास बात यह है कि इस बार ताजपुर समेत जिले के कई इलाकों में आलू की पैदावार भी अच्छी नहीं हुई है। इसके बावजूद कीमतें इतनी कम रहना किसानों, व्यापारियों और कृषि जानकारों की समझ से बाहर है।
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बाजार में मांग कम, बाहर से आवक ज्यादा

गद्दीदार मंजीत कुमार सिंह और श्यामबाबू सिंह ने बताया कि बाजार में मांग कमजोर है और बाहर के राज्यों से आलू की ज्यादा आवक हो रही है। इसी वजह से कीमतों में भारी गिरावट आई है। अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता और आलू उत्पादक किसान ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने कहा कि बीज, खाद, जुताई, सिंचाई, दवा, मजदूरी और परिवहन मिलाकर आलू की लागत करीब 15 रुपये प्रति किलो पड़ती है। लेकिन किसानों को 5 से 6 रुपये में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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25 साल में पहली बार इतनी कम कीमत

आलू उत्पादक किसान दिनेश प्रसाद सिंह ने कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से आलू की खेती कर रहे हैं, लेकिन आज तक इतनी कम कीमत कभी नहीं मिली। मोतीपुर के किसान राजदेव प्रसाद सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मोती लाल सिंह, फतेहपुर के मनोज कुमार सिंह और रतन सिंह, रहीमाबाद के मुंशीलाल राय, कस्बे आहर के संजीव राय तथा रामापुर महेशपुर के शिव कुमार सिंह ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की जगह सीमित है। ऊपर से भंडारण का अलग से शुल्क देना पड़ता है। छोटे और सीमांत किसान के पास नकदी की जरूरत रहती है, इसलिए वे मजबूरी में कम दाम पर ही फसल बेच रहे हैं।

सरकार से समर्थन मूल्य और राहत की मांग

किसानों ने सरकार से आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने और कोल्ड स्टोरेज शुल्क में राहत देने की मांग की है। भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि अगर समय रहते सरकार ने खरीद या बाजार को संभालने के कदम नहीं उठाए, तो अगली बार किसान आलू की खेती कम कर सकते हैं। इसका असर आगे चलकर बाजार पर भी पड़ेगा।

आंदोलन की चेतावनी

अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा माले ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन करेंगे। फिलहाल जिले के आलू किसान भारी नुकसान और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। आलू उत्पादक किसान राजदेव प्रसाद सिंह ने मांग की है कि पश्चिम बंगाल की तर्ज पर बिहार में भी आलू की सरकारी दर तय कर खरीद करने के लिए सरकार अध्यादेश जारी करे।

 

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