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Bihar: जहानाबाद में न्यायिक पेच में उलझ सकता है जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव, 21 अप्रैल के फैसले पर टिकी निगाह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जहानाबाद Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 17 Apr 2026 10:45 PM IST
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सार

Bihar: जहानाबाद जिला परिषद अध्यक्ष पद का मामला एक बार फिर न्यायिक विवाद में फंस गया है। निवर्तमान अध्यक्ष रानी कुमारी ने अविश्वास प्रस्ताव और मत विभाजन की प्रक्रिया को नियमविरुद्ध बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।  

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Bihar news Jehanabadन्यायिक पेच में उलझ सकता है जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव, 21 अप्रैल के फैसल
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विस्तार

जहानाबाद जिला परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव एक बार फिर न्यायिक पेच में फंसता नजर आ रहा है। मत विभाजन के बाद पद गंवाने वाली निवर्तमान अध्यक्ष रानी कुमारी ने पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। अब पूरे मामले में 21 अप्रैल को संभावित न्यायालय के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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रानी कुमारी ने कोर्ट में दी चुनौती

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निवर्तमान अध्यक्ष रानी कुमारी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ अपनाई गई पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी। उनका कहना है कि प्रशासन ने पुराने पत्र के आधार पर कार्रवाई की, जबकि नियमानुसार पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जानी चाहिए थी। साथ ही, उन्हें इस संबंध में विधिवत सूचना भी नहीं दी गई, जिससे वे अपनी बात समय पर नहीं रख सकीं। रानी कुमारी का दावा है कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी और नियमसम्मत ढंग से पूरी की जाती, तो इस तरह का विवाद उत्पन्न नहीं होता।

सूचना अभाव को लेकर गंभीर आरोप

उन्होंने यह भी कहा कि सूचना के अभाव में उन्हें मजबूर होकर न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता से जुड़ा मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विरोधी गुट ने प्रक्रिया को बताया वैध
वहीं दूसरी ओर, विरोधी गुट पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहा है। उनका कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव से लेकर मत विभाजन तक की पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई है। विरोधी पक्ष का दावा है कि न्यायालय का निर्णय भी उनके पक्ष में आएगा और इसके बाद जल्द ही नए अध्यक्ष के चुनाव की तिथि घोषित कर दी जाएगी।

28 मार्च के मत विभाजन के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
गौरतलब है कि 28 मार्च को जिला परिषद अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मत विभाजन हुआ था, जिसमें रानी कुमारी को पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि एक सप्ताह के भीतर नए अध्यक्ष का चुनाव करा लिया जाएगा, लेकिन अब तक तिथि घोषित नहीं हो सकी है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी लगातार बनी हुई है।

2024 से चल रहा है विवाद 
जानकारी के अनुसार, अध्यक्ष के खिलाफ वर्ष 2024 में ही अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उस समय न्यायिक हस्तक्षेप के कारण मत विभाजन की प्रक्रिया लंबे समय तक टलती रही। अब एक बार फिर मामला न्यायालय में पहुंचने से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।

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उपाध्यक्ष के जिम्मे वित्तीय कार्य, प्रशासनिक काम जारी
फिलहाल जिला परिषद के सुचारु संचालन के लिए उपाध्यक्ष को वित्तीय शक्तियां सौंप दी गई हैं, जिनके आधार पर विकास योजनाओं का क्रियान्वयन जारी है। हालांकि अध्यक्ष पद को लेकर जारी खींचतान और न्यायालय में लंबित मामला आने वाले दिनों में जिले की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

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