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Bihar: थानेदार का खौफ दिखाकर मांगी घूस! 50 हजार की पहली किश्त लेते ही विजिलेंस ने दबोचा, रंगेहाथ गिरफ्तार
Sat, 01 Aug 2026 11:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 11:54 AM IST
सार
औरंगाबाद के रिसियप थाना में तैनात एसआई उमेश कुमार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने मारपीट के मामले में राहत देने के बदले पहले दो लाख रुपये मांगे और पॉक्सो एक्ट में फंसाने की धमकी दी। शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और पहली किश्त लेते ही दारोगा को गिरफ्तार कर लिया।
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निगरानी के गिरफ्त में रिश्वतखोर दारोगा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
औरंगाबाद जिले के रिसियप थाना में तैनात एक दारोगा को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दारोगा ने मारपीट के एक मामले में राहत देने के नाम पर पीड़ित से पहले दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी और रकम नहीं देने पर पॉक्सो एक्ट के तहत फंसाने की धमकी दी। बाद में सौदेबाजी के बाद एक लाख रुपये में मामला तय हुआ।पीड़ित ने शुक्रवार को तय राशि की पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये दिए। इसी दौरान पहले से जाल बिछाकर बैठी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने दारोगा को रंगेहाथ दबोच लिया।
गिरफ्तार दारोगा की पहचान रिसियप थाना के सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम उन्हें पटना स्थित निगरानी थाना ले गई, जहां शनिवार को विशेष निगरानी अदालत में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मारपीट मामले में राहत के नाम पर मांगी रिश्वत
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) संतोष कुमार ने बताया कि रिसियप थाना क्षेत्र के तेंदुआ गणपत गांव निवासी ग्रामीण चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण राम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि नाली विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले में जांच कर रहे एसआई उमेश कुमार उनसे दो लाख रुपये रिश्वत मांग रहे हैं। साथ ही रिश्वत नहीं देने पर पॉक्सो एक्ट में फंसाने की धमकी भी दे रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इसके बाद डीएसपी संतोष कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पीड़ित को दारोगा से बातचीत कर रिश्वत देने के लिए कहा गया। बातचीत के बाद मामला दो किश्तों में एक लाख रुपये पर तय हुआ।
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50 हजार रुपये लेते ही दबोचा गया दारोगा
रिश्वत की डील तय होने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम शुक्रवार को पटना से रिसियप पहुंची। पीड़ित लक्ष्मण राम दारोगा को रिश्वत देने के लिए रिसियप थाना पहुंचे। दारोगा उन्हें थाना परिसर के पीछे स्थित पंचायत सरकार भवन के पास ले गया। जैसे ही उसने 50 हजार रुपये की पहली किश्त ली, पहले से निगरानी कर रही टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। निगरानी की सात सदस्यीय टीम में डीएसपी संतोष कुमार के अलावा एएसआई रंजन कुमार, सतीश कुमार सिंह, एसआई संजीत कुमार, मो. नसीम अहमद, राहुल कुमार और राममोहन राम शामिल थे।
पीड़ित ने सुनाई पूरी आपबीती
शिकायतकर्ता डॉ. लक्ष्मण राम ने बताया कि तेंदुआ गणपत गांव में नाली-गली के पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। इसी विवाद में 14 जुलाई को दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसमें वह घायल हो गए थे। डायल-112 की टीम उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गई थी। दूसरे पक्ष की ओर से रंजीत राम की पत्नी रेशमी देवी ने भी रिसियप थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया था। दोनों मामलों की जांच की जिम्मेदारी एसआई उमेश कुमार को सौंपी गई थी।
ये भी पढ़ें- ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत? हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी कर सड़क निर्माण, ग्रामीणों का गुस्सा फूटा
एसआई लगातार रिश्वत देने का दबाव बना रहे थे
पीड़ित का आरोप है कि जांच के दौरान एसआई लगातार रिश्वत देने का दबाव बना रहे थे। पहले उन्होंने दो लाख रुपये की मांग की, बाद में डेढ़ लाख रुपये में मामला निपटाने की बात कही। निगरानी ब्यूरो में शिकायत करने के बाद पीड़ित ने दारोगा से बातचीत कर दो किश्तों में एक लाख रुपये में सौदा तय किया। पीड़ित ने बताया कि तय योजना के अनुसार पहली किश्त के 50 हजार रुपये देते समय उन्होंने अपने बालों पर हाथ फेरकर निगरानी टीम को इशारा किया। इशारा मिलते ही टीम ने दारोगा को रंगेहाथ पकड़ लिया। पीड़ित के अनुसार, दारोगा ने यह भी कहा था कि 'यह रकम ऊपर इंस्पेक्टर तक पहुंचेगी। सबको मैनेज करना पड़ता है। बहुत कम रकम में मामला निपटाया जा रहा है।'
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गिरफ्तार दारोगा की पहचान रिसियप थाना के सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम उन्हें पटना स्थित निगरानी थाना ले गई, जहां शनिवार को विशेष निगरानी अदालत में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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मारपीट मामले में राहत के नाम पर मांगी रिश्वत
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) संतोष कुमार ने बताया कि रिसियप थाना क्षेत्र के तेंदुआ गणपत गांव निवासी ग्रामीण चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण राम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि नाली विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले में जांच कर रहे एसआई उमेश कुमार उनसे दो लाख रुपये रिश्वत मांग रहे हैं। साथ ही रिश्वत नहीं देने पर पॉक्सो एक्ट में फंसाने की धमकी भी दे रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इसके बाद डीएसपी संतोष कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पीड़ित को दारोगा से बातचीत कर रिश्वत देने के लिए कहा गया। बातचीत के बाद मामला दो किश्तों में एक लाख रुपये पर तय हुआ।
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50 हजार रुपये लेते ही दबोचा गया दारोगा
रिश्वत की डील तय होने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम शुक्रवार को पटना से रिसियप पहुंची। पीड़ित लक्ष्मण राम दारोगा को रिश्वत देने के लिए रिसियप थाना पहुंचे। दारोगा उन्हें थाना परिसर के पीछे स्थित पंचायत सरकार भवन के पास ले गया। जैसे ही उसने 50 हजार रुपये की पहली किश्त ली, पहले से निगरानी कर रही टीम ने उसे रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। निगरानी की सात सदस्यीय टीम में डीएसपी संतोष कुमार के अलावा एएसआई रंजन कुमार, सतीश कुमार सिंह, एसआई संजीत कुमार, मो. नसीम अहमद, राहुल कुमार और राममोहन राम शामिल थे।
पीड़ित ने सुनाई पूरी आपबीती
शिकायतकर्ता डॉ. लक्ष्मण राम ने बताया कि तेंदुआ गणपत गांव में नाली-गली के पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। इसी विवाद में 14 जुलाई को दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, जिसमें वह घायल हो गए थे। डायल-112 की टीम उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गई थी। दूसरे पक्ष की ओर से रंजीत राम की पत्नी रेशमी देवी ने भी रिसियप थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया था। दोनों मामलों की जांच की जिम्मेदारी एसआई उमेश कुमार को सौंपी गई थी।
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एसआई लगातार रिश्वत देने का दबाव बना रहे थे
पीड़ित का आरोप है कि जांच के दौरान एसआई लगातार रिश्वत देने का दबाव बना रहे थे। पहले उन्होंने दो लाख रुपये की मांग की, बाद में डेढ़ लाख रुपये में मामला निपटाने की बात कही। निगरानी ब्यूरो में शिकायत करने के बाद पीड़ित ने दारोगा से बातचीत कर दो किश्तों में एक लाख रुपये में सौदा तय किया। पीड़ित ने बताया कि तय योजना के अनुसार पहली किश्त के 50 हजार रुपये देते समय उन्होंने अपने बालों पर हाथ फेरकर निगरानी टीम को इशारा किया। इशारा मिलते ही टीम ने दारोगा को रंगेहाथ पकड़ लिया। पीड़ित के अनुसार, दारोगा ने यह भी कहा था कि 'यह रकम ऊपर इंस्पेक्टर तक पहुंचेगी। सबको मैनेज करना पड़ता है। बहुत कम रकम में मामला निपटाया जा रहा है।'