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Bihar: जेल में गांजा बरामदगी के बाद FIR नहीं, सुरक्षा में लापरवाही; आरोपों से घिरे डिप्टी सुपरिटेंडेंट निलंबित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2026 01:02 PM IST
सार
गया केंद्रीय कारा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को गंभीर आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है। उन पर जेल सुरक्षा में लापरवाही, बंदियों से कथित सांठगांठ, बिना अनुमति बाहरी लोगों की एंट्री, एफआईआर दर्ज नहीं कराने और बंदियों से मारपीट जैसे आरोप हैं।
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फाइल फोटो- गया सेन्ट्रल जेल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
गया केंद्रीय कारा में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह के खिलाफ गंभीर आरोपों के बाद गृह विभाग (कारा) ने बड़ी कार्रवाई की है। जेल सुरक्षा नियमों की अनदेखी, बंदियों से कथित सांठगांठ, प्रशासनिक लापरवाही और अन्य गंभीर आरोपों के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान सुदर्शन प्रसाद सिंह का मुख्यालय मुंगेर केंद्रीय कारा रहेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि डिप्टी सुपरिटेंडेंट के कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए गए, जो जेल मैनुअल और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के विपरीत थे। विभाग अब इन सभी बिंदुओं की विस्तार से जांच करेगा।
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बिना अनुमति बाहरी लोगों की होती थी एंट्री
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ बंदियों के परिजनों और अन्य बाहरी लोगों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे डिप्टी सुपरिटेंडेंट के कार्यालय तक पहुंचने की अनुमति दी जाती थी। कई मामलों में मुलाकात का रिकॉर्ड भी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया, जिससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
गांजा बरामद होने के बाद एफआईआर नहीं कराने का आरोप
पूरे मामले की पृष्ठभूमि 16 जुलाई की उस घटना से जुड़ी बताई जा रही है, जब जेल के एक वार्ड की तलाशी के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से गांजा बरामद हुआ था। आरोप है कि उच्च अधिकारियों के निर्देश के बावजूद संबंधित बंदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई। इस मामले को भी विभागीय जांच का हिस्सा बनाया गया है।
ये भी पढ़ें- Bihar: मुजफ्फरपुर में मुहर्रम पर निकला मातमी जुलूस, या हुसैन के नारे गूंजे; चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा
कर्मचारियों और बंदियों के साथ व्यवहार पर भी सवाल
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिप्टी सुपरिटेंडेंट का व्यवहार जेल कर्मियों के प्रति अक्सर कठोर रहता था। नियमों का पालन कराने वाले कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से फटकारने और अपमानित करने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा, बिना पर्याप्त कारण कुछ बंदियों के साथ मारपीट करने के आरोप भी लगाए गए हैं। विभाग इन शिकायतों की भी गहन जांच करेगा।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी अगली कार्रवाई
गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सेवा से बर्खास्तगी समेत अन्य कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान सुदर्शन प्रसाद सिंह का मुख्यालय मुंगेर केंद्रीय कारा रहेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि डिप्टी सुपरिटेंडेंट के कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए गए, जो जेल मैनुअल और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के विपरीत थे। विभाग अब इन सभी बिंदुओं की विस्तार से जांच करेगा।
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बिना अनुमति बाहरी लोगों की होती थी एंट्री
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ बंदियों के परिजनों और अन्य बाहरी लोगों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे डिप्टी सुपरिटेंडेंट के कार्यालय तक पहुंचने की अनुमति दी जाती थी। कई मामलों में मुलाकात का रिकॉर्ड भी रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया, जिससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
गांजा बरामद होने के बाद एफआईआर नहीं कराने का आरोप
पूरे मामले की पृष्ठभूमि 16 जुलाई की उस घटना से जुड़ी बताई जा रही है, जब जेल के एक वार्ड की तलाशी के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से गांजा बरामद हुआ था। आरोप है कि उच्च अधिकारियों के निर्देश के बावजूद संबंधित बंदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई। इस मामले को भी विभागीय जांच का हिस्सा बनाया गया है।
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कर्मचारियों और बंदियों के साथ व्यवहार पर भी सवाल
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिप्टी सुपरिटेंडेंट का व्यवहार जेल कर्मियों के प्रति अक्सर कठोर रहता था। नियमों का पालन कराने वाले कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से फटकारने और अपमानित करने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा, बिना पर्याप्त कारण कुछ बंदियों के साथ मारपीट करने के आरोप भी लगाए गए हैं। विभाग इन शिकायतों की भी गहन जांच करेगा।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी अगली कार्रवाई
गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो सेवा से बर्खास्तगी समेत अन्य कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।