Bihar: ऑफिस नहीं, जमीन पर उतरकर जीता दिल, टॉप-100 IAS में सूबे के आठ अधिकारी शामिल, बढ़ाया बिहार का मान
गया के जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश के टॉप-100 आईएएस अधिकारियों की सूची में स्थान प्राप्त किया है। विकास, सुशासन और जनसेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए उन्हें यह सम्मान मिला है।
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गया जिले के लिए गर्व की बात है कि जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाते हुए देश के टॉप-100 आईएएस अधिकारियों की सूची में जगह बनाई है। विकास, सुशासन और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पहचान दिलाई है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल गया, बल्कि पूरे बिहार का सम्मान बढ़ा है।
काम से बनाई अलग पहचान
प्रशासनिक सेवा में कई अधिकारी आते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो अपने काम के बल पर लोगों के दिलों में जगह बना पाते हैं। शशांक शुभंकर उन्हीं अधिकारियों में शामिल हैं। गया में पदभार संभालने के बाद उन्होंने विकास योजनाओं की निगरानी, जनसमस्याओं के समाधान और प्रशासनिक पारदर्शिता को अपनी प्राथमिकता बनाया। यही वजह है कि उनकी कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
30 मई को हुई सूची की घोषणा, बिहार के आठ आईएएस शामिल
30 मई को जारी देश के टॉप-100 आईएएस अधिकारियों की सूची में बिहार के आठ अधिकारियों ने स्थान बनाया है। इनमें गया के डीएम शशांक शुभंकर के अलावा उनकी पत्नी और रोहतास की जिला पदाधिकारी उदिता सिंह भी शामिल हैं। सूची में शामिल अन्य अधिकारियों में पटना के डीएम डॉ. त्याग राजन, मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा, सहरसा के डीएम दिपेश कुमार, सारण के डीएम वैभव श्रीवास्तव, सीवान के डीएम विवेक रंजन मैत्रेय और मुजफ्फरपुर के डीएम सुब्रत कुमार सेन का नाम शामिल है।
जमीन पर उतरकर करते हैं काम
शशांक शुभंकर की पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में है जो केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहते। गांवों, प्रखंडों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का नियमित निरीक्षण उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वे जनसुनवाई कार्यक्रमों के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं को सीधे सुनते हैं और उनके समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं। उनकी यही सक्रियता, जवाबदेही और कार्य के प्रति समर्पण उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाता है। प्रशासनिक निर्णयों के साथ-साथ उनके मानवीय दृष्टिकोण की भी लोगों के बीच खूब चर्चा होती है।
प्रशासनिक परिवार से जुड़ाव, लेकिन पहचान अपने दम पर
शशांक शुभंकर का परिवार लंबे समय से प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा रहा है। उनके दादा और पिता भी प्रशासनिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी पत्नी उदिता सिंह वर्तमान में रोहतास की जिला पदाधिकारी हैं। हालांकि, शशांक शुभंकर की राष्ट्रीय पहचान उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि की वजह से नहीं, बल्कि उनके स्वयं के कार्यों, नेतृत्व क्षमता और उपलब्धियों के कारण बनी है।
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गया को मिली राष्ट्रीय पहचान
देश के टॉप-100 आईएएस अधिकारियों की सूची में शामिल होना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। यह सम्मान उनके नेतृत्व, कार्यक्षमता और जनहित में किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है। उनकी इस उपलब्धि ने गया जिले को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है और जिले के लोगों को गर्व का अवसर प्रदान किया है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने शशांक शुभंकर
शशांक शुभंकर की सफलता यह संदेश देती है कि ईमानदारी, मेहनत और जनसेवा के प्रति समर्पण के बल पर बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। आज वे केवल गया के डीएम नहीं, बल्कि सुशासन, विकास और जनविश्वास के प्रतीक बन चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि प्रशासनिक सेवा में आने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।