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Bihar: समय बीता, आरोपी बूढ़ा हुआ, लेकिन कानून नहीं भूला 34 साल पुराना गुनाह, आज होगा सजा का एलान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 12:37 PM IST
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सार
Vaishali: वैशाली जिले के 34 साल पुराने फायरिंग और जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने दीप राय उर्फ जिसा राय को दोषी करार दिया है। 1992 में दर्ज इस मामले के पांच आरोपियों में से चार की मौत हो चुकी है, जबकि बचे एक आरोपी को अब अदालत ने दोषी पाया है।
बुजुर्ग आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिस उम्र में लोग राम-भजन करते हैं, उसी उम्र में एक वृद्ध को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ रहा है। 34 साल पहले की गलती की सजा अब न्यायालय ने 34 साल बाद सुनाई है। वैशाली से आई यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर में एक वृद्ध व्यक्ति न्यायालय परिसर से निकलता दिखाई दे रहा है, जिसका शरीर साथ नहीं दे रहा है। उठने-बैठने के लिए उसे दो लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन जब कानून का डंडा चला तो उम्र की लाचारी भी काम नहीं आई और उसे जेल जाना पड़ा।
34 साल पुराने हमले के मामले में आया बड़ा फैसला
यह पूरा मामला वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड स्थित जुड़ावनपुर का है। 1992 की एक घटना में आपसी विवाद को लेकर एक दंपति पर फायरिंग और जानलेवा हमला करने के आरोप में एक ही परिवार के पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। केस की सुनवाई के दौरान पांच में से चार आरोपियों की मौत हो गई, लेकिन एक आरोपी जीवित बच गया। उसका नाम दीप राय उर्फ जिसा राय बताया गया है। उसी मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने आईपीसी की धारा 147, 148, 307 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दीप राय को दोषी पाया है।
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दरवाजे पर बैठे दंपति पर हुई थी फायरिंग
पीड़ित अदालत राय ने 10 मई 1992 को शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह अपनी पत्नी के साथ दरवाजे पर बैठे थे, तभी आरोपियों ने हथियारों से लैस होकर उन पर हमला कर दिया था। इस दौरान फायरिंग भी की गई थी। घटना के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई।
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1993 में चार्जशीट, 2026 में आया फैसला
पुलिस ने वर्ष 1993 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चलती रही। करीब 34 साल बाद अब न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है। मामले में दोषी करार दिए गए दीप राय की सजा पर अंतिम फैसला आज मंगलवार को सुनाया जाएगा।
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युवाओं के लिए सबक बनी 34 साल पुरानी कहानी
यह मामला उन युवाओं के लिए भी एक सीख माना जा रहा है, जो जोश में आकर हथियार लहराते हैं, गोलियां चलाते हैं और अपराध के रास्ते पर निकल पड़ते हैं। कानून की पकड़ भले देर से पहुंचे, लेकिन अपराध का हिसाब कभी न कभी जरूर होता है।