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Bihar: गैस खत्म और चूल्हा जल उठा, गया मेडिकल कॉलेज में 600 मरीजों का खाना अब लकड़ी-कोयले पर, बढ़ी चुनौती

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 22 Mar 2026 08:13 PM IST
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सार

गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में LPG कमर्शियल गैस की भारी किल्लत के कारण 600 मरीजों का भोजन अब लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर बनाया जा रहा है। गैस सप्लाई ठप होने और सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों के कारण रसोई व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

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खाना बनाती जीवीका दीदी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गया शहर स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल, जो मगध क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है, इन दिनों LPG कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत से जूझ रहा है। इस संकट का सीधा असर अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन पर पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि अब यहां रोजाना करीब 600 मरीजों के लिए खाना कोयले और लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जा रहा है, जिससे रसोई व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

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‘जीविका दीदी’ पर बढ़ा काम का बोझ

अस्पताल में मरीजों के भोजन की जिम्मेदारी जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं, जिन्हें ‘जीविका दीदी’ कहा जाता है, के कंधों पर है। पहले ये महिलाएं गैस सिलेंडर पर आसानी से भोजन तैयार करती थीं, लेकिन अब गैस की कमी के चलते उन्हें पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ समय अधिक लग रहा है, बल्कि काम भी बेहद कठिन हो गया है।
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अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर, सप्लाई पर पड़ा प्रभाव

जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव का असर अब देश के कई हिस्सों में LPG सप्लाई पर दिखाई देने लगा है। गया भी इससे अछूता नहीं रहा है। अस्पताल के कैंटीन में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है, जिससे रसोई संचालन में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
 

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जीविका दीदियों की परेशानी

जीविका दीदी पारो देवी ने बताया कि वे रोजाना सैकड़ों मरीजों के लिए भोजन बनाती हैं और उसे वितरित करती हैं। पहले गैस पर काम आसान था, लेकिन अब लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि कभी मरीजों की संख्या बढ़ जाती है, तो परेशानी और भी बढ़ जाती है।
एक अन्य जीविका दीदी ने बताया कि गैस खत्म होने के बाद उन्हें मजबूरी में कोयले के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। इतने बड़े स्तर पर भोजन तैयार करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है और इसमें अधिक समय भी लग रहा है।

महंगे सिलेंडर, सीमित उपयोग

कैंटीन मैनेजर मनीष दीपक ने बताया कि अस्पताल में जीविका के तहत कैंटीन संचालित होता है, जहां मरीजों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन फिलहाल कमर्शियल गैस सप्लायर ने सिलेंडर देने से मना कर दिया है। जो कुछ सिलेंडर मिल भी रहे हैं, उनकी कीमत काफी बढ़ा दी गई है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल केवल रोटी बनाने के लिए ही गैस का उपयोग किया जा रहा है, जबकि बाकी भोजन कोयले और लकड़ी पर तैयार किया जा रहा है।

बढ़ी सफाई और समय की चुनौती

मनीष दीपक ने यह भी बताया कि कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने से बर्तन अधिक काले और गंदे हो जाते हैं, जिससे सफाई में अतिरिक्त मेहनत लगती है। साथ ही, भोजन तैयार करने में भी ज्यादा समय लग रहा है, जिससे काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस पूरे मामले ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर मरीजों को हर हाल में भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर संसाधनों की कमी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द गैस आपूर्ति बहाल करे, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके और रसोई कर्मियों को राहत मिल सके।

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