Bihar: बिना देखे यकीं नहीं होगा! 35 वर्षो से लावारिस और मानसिक बीमारों की सेवा कर रहा है SI, जानें पूरी कहानी
गया जिले के कोठी थाना में पदस्थापित सब इंस्पेक्टर सच्चिदानंद राय पिछले 35 वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ, लावारिस और बेसहारा लोगों की मदद कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी सच्चिदानंद राय अब तक 200 से अधिक लोगों को सड़क से उठाकर अस्पताल, आश्रम और उनके परिवारों तक पहुंचा चुके हैं।
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जहां अधिकांश लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ और बेसहारा लोगों से दूरी बनाकर चलते हैं, वहीं गया में तैनात एक पुलिस अधिकारी पिछले 35 वर्षों से ऐसे लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगा रहे हैं। किसी के लिए जो लोग पागल, लावारिस या समाज पर बोझ माने जाते हैं, उन्हें सब इंस्पेक्टर सच्चिदानंद राय सबसे पहले इंसान मानते हैं। सड़क से लेकर आश्रम तक और अस्पताल से लेकर परिवार तक पहुंचाने की उनकी मुहिम आज इंसानियत की मिसाल बन चुकी है।
जहां लोग दूरी बनाते हैं, वहां बढ़ाते हैं मदद का हाथ
मानसिक रूप से अस्वस्थ या बेसहारा लोगों के पास जाने से आमतौर पर लोग कतराते हैं। गंदे कपड़े, बिखरे बाल और असामान्य व्यवहार के कारण ऐसे लोगों को अक्सर समाज की उपेक्षा झेलनी पड़ती है। लेकिन सब इंस्पेक्टर सच्चिदानंद राय ऐसे लोगों के पास बैठते हैं, उनकी बातें सुनते हैं और उन्हें सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास करते हैं। वर्तमान में सच्चिदानंद राय गया जिले के कोठी थाना में पदस्थापित हैं।
सेवा नहीं, जीवन का उद्देश्य बन गया अभियान
उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी सच्चिदानंद राय के लिए यह काम केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है। बचपन से ही उनके भीतर जरूरतमंदों की मदद करने की भावना रही है। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्हें इस कार्य को बड़े स्तर पर करने का अवसर मिला। वह बताते हैं कि अब तक 200 से अधिक मानसिक रूप से अस्वस्थ और लावारिस लोगों की मदद कर चुके हैं और यह अभियान लगातार जारी है।
अस्पताल, भोजन और आश्रय तक की करते हैं व्यवस्था
जब भी किसी बेसहारा व्यक्ति की सूचना उन्हें मिलती है, वह सबसे पहले उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। जरूरत पड़ने पर अस्पताल में इलाज कराते हैं, भोजन और कपड़ों की व्यवस्था करते हैं और उसके परिजनों की तलाश शुरू करते हैं। यदि परिवार का पता नहीं चल पाता, तो उन्हें आश्रम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। कई मामलों में उन्होंने परिवार से बिछड़े लोगों को दोबारा उनके अपनों से मिलाने में सफलता हासिल की है।
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वर्दी से आगे बढ़कर निभा रहे सामाजिक जिम्मेदारी
उनके सहयोगियों का कहना है कि सच्चिदानंद राय केवल निर्देश देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हर काम में खुद आगे बढ़कर हिस्सा लेते हैं। यही वजह है कि उनके मानवीय कार्यों की चर्चा पुलिस विभाग से लेकर आम लोगों के बीच होती है। स्थानीय लोग उन्हें ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में देखते हैं, जिन्होंने सेवा और संवेदना को अपनी पहचान बना लिया है।
रिटायरमेंट के बाद भी जारी रहेगा मानवता का मिशन
सच्चिदानंद राय का कहना है कि नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका यह मिशन नहीं रुकेगा। वह अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा बेसहारा और लावारिस लोगों की सहायता में खर्च करना चाहते हैं। उनका मानना है कि किसी इंसान की असली पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्यों से बनती है। आज जब समाज में रिश्तों और संवेदनाओं के कमजोर पड़ने की चर्चा होती है, ऐसे समय में सच्चिदानंद राय यह साबित कर रहे हैं कि मानवता अभी भी जिंदा है और उसे जिंदा रखने वाले लोग हमारे बीच मौजूद हैं।