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Bihar: वर्दी पर लगा दाग! थाने से चुराकर बेची गई जब्त कफ सिरप, चार पुलिसकर्मी गिरफ्तार; थानाध्यक्ष निलंबित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल Published by: कोसी ब्यूरो Updated Fri, 19 Jun 2026 07:27 AM IST
सार

सुपौल के प्रतापगंज थाना में जब्त 6162 बोतल कोडीन कफ सिरप गायब होने का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में मालखाने से कफ सिरप, बैटरी और वाहन पार्ट्स बेचने का मामला सामने आया। चार पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए गए हैं।

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Bihar four Arrested for Stealing and Selling Seized Cough Syrup From Police Station sho suspended
धर्मेंद्र कुमार, निलंबित थानाध्यक्ष - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुपौल जिले के प्रतापगंज थाने से एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां थाना परिसर से ही जब्त सामान चोरी करने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। खुद कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियां उड़ा रहे थे। दरअसल, पिछले कई महीनों से पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से थाने के मालखाने में जमा प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप को नशे के आदी ग्राहकों को चोरी-छिपे बेचा जा रहा था।
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मामले की गुप्त शिकायत डीजीपी से होने के बाद सुपौल एसपी द्वारा गठित विशेष त्रि-सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में यह गड़बड़झाला उजागर हुआ। इसके बाद तत्काल प्रभाव से प्रतापगंज थानाध्यक्ष पुअनि धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया। वहीं, सोमवार रात मामले में संलिप्त चार अन्य पुलिसकर्मियों — चौकीदार राहुल कुमार, अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और डायल 112 के चालक अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर मंगलवार सुबह न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है। हालांकि, पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने काफी गोपनीयता बरती।
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6162 बोतल कफ सिरप मालखाने से गायब
प्रतापगंज थाने में जारी अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), सुपौल की अध्यक्षता में एक त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। इसमें वीरपुर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार और पुलिस उपाधीक्षक (साइबर), सुपौल गौरव गुप्ता शामिल थे। 11 जून को सौंपी गई संयुक्त जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हुए हैं।
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कांड संख्या-216/25 में कुल 7560 बोतल कोडीन कफ सिरप जब्त किया गया था। अनुसंधानकर्ता द्वारा आठ बोतल एफएसएल जांच के लिए भेजने के बाद मालखाने में 7552 बोतलें होनी चाहिए थीं, लेकिन मौके पर मात्र 1390 बोतलें ही पाई गईं। यानी 6162 बोतल कफ सिरप गायब कर बेच दिया गया।

पकड़े जाने के डर से बदला स्टॉक
गायब स्टॉक को छिपाने के लिए मालखाने में 2842 बोतलें ऐसी रखी मिलीं, जो वर्ष 2026 में निर्मित थीं। यह स्टॉक जब्ती सूची में दर्ज ब्रांड और बैच नंबर से पूरी तरह अलग था। इससे साफ है कि हेरफेर छिपाने के लिए नया माल रखा गया था।

जांच में यह भी पाया गया कि थानाध्यक्ष द्वारा पूर्व में जब्त किए गए ट्रैक्टर का डायनमो, टायर और बैटरी तथा एक टोटो की बैटरी बेच दी गई। पूछने पर थानाध्यक्ष ने इस संबंध में पूरी तरह अनभिज्ञता जाहिर की। 6 मई को लूट कांड से जुड़ी एक अपाचे बाइक थाना लाने के बावजूद थानाध्यक्ष द्वारा उसे छोड़ दिया गया। थानाध्यक्ष पर कांड के शमन का आरोप सत्य पाया गया है और उनके अभिलेख संधारण में गंभीर त्रुटियां मिली हैं।

पकड़े जाने के डर से सीसीटीवी फुटेज किया डिलीट
जब जांच समिति ने थाने के सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की तो पता चला कि थाना परिसर के मुख्य कैमरे का 28 मई से पहले का पूरा फुटेज डिलीट कर दिया गया है, ताकि कोई सबूत हाथ न लगे। जांच समिति ने थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार के इस कृत्य को घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण का परिचायक मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, सुपौल निर्धारित किया गया है।

इधर, सोमवार रात गिरफ्तार किए गए चारों कर्मियों को पहले करजाईन थाने में रखा गया और फिर जेल भेज दिया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच में स्थानीय थानाध्यक्ष के साथ प्रतापगंज थाने के एएसआई और एसआई स्तर के पुलिसकर्मियों पर भी मामला दर्ज करने का आदेश था। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर मामले की गहराई से कार्रवाई करने के बजाय इसे दबाने और लीपापोती करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

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चौकीदार ने की थी लाइजनिंग, ऐसे बेचता था जब्त माल
दिसंबर 2023 में अनुकंपा पर नियुक्त चौकीदार राहुल ने प्रतापगंज अपर थानाध्यक्ष पूनम कुमारी के समक्ष दर्ज स्वीकारोक्ति में बताया कि ड्यूटी के दौरान उसका परिचय त्रिवेणीगंज निवासी आशीष से हुआ था, जिसने कफ सिरप और देसी शराब बेचने का प्रस्ताव दिया था। 13 अक्टूबर 2025 को पुलिस ने एक पिकअप से कफ सिरप जब्त किया था। राहुल ने अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और डायल 112 के चालक अखिलेश कुमार को आशीष के हाथों माल बेचने के लिए तैयार किया। थानाध्यक्ष अपनी बहन की शादी में छुट्टी पर गए तो नियमित रूप से रात करीब 12 बजे कफ सिरप निकालकर आशीष को सप्लाई शुरू कर दी गई।

नौकरी बचाने के लिए चौकीदार ने पिकअप में रखी सिरप
थानाध्यक्ष के लौटने पर बात खुली तो राहुल ने आशीष से बेचा हुआ माल वापस मांगा। लेकिन उसने 2026 में निर्मित अलग कंपनी और बैच का 2842 बोतल कफ सिरप देते हुए कहा कि असली माल सप्लाई हो चुका है। नौकरी बचाने के लिए चौकीदार ने मौका मिलते ही अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर वह सिरप उसी पिकअप पर रख दिया। लेकिन जांच में इसका भी खुलासा हो गया। इसके अलावा चौकीदार ने माना है कि वह पहले भी थाने में जब्त देसी शराब और कफ सिरप के अलावा जब्त बाइक और टोटो की बैटरी व पार्ट्स चुराकर बेचता था। इसका पैसा चारों आपस में बांट लेते थे।


एनडीपीएस और चोरी की धाराओं में केस
एसपी शरथ आरएस ने बताया कि शिकायत सामने आते ही त्रि-सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच कराई गई। प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर थानाध्यक्ष को निलंबित किया गया है। साथ ही एनडीपीएस और चोरी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की गई है। आगे केस के अनुसंधान के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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