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राम मंदिर: अब तक नहीं हुई किसी पर FIR, कहीं अंदर सुबूत तो नहीं मिटाए जा रहे? ट्रस्ट ने कैसे जाने संदिग्ध

सूरज शुक्ला, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 19 Jun 2026 07:35 AM IST
सार

Ram Temple donation theft: राम मंदिर दान चोरी के मामले में अब तक केस दर्ज नहीं हुआ। इसको लेकर पूर्व पुलिस अधिकारियों से लेकर कानून के जानकार भी हैरान हैं।
 

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Ram Temple donation theft: No FIR has been filed yet, is evidence being destroyed?
राम मंदिर में दान चोरी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 राम मंदिर में दान की राशि चोरी होने के मामले में सवाल ही सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिल पा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ट्रस्ट ने अब तक एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई। वहीं दूसरा बड़ा सवाल यह है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों को यह किसने अधिकार दिया कि पिछले करीब दो सप्ताह से संदिग्धों को बैठाकर उनसे पूछताछ कर रहे हैं। यहां तक कि उनको लेकर घरों से रकम भी बरामद की गई थी। वहीं एसआईटी की जांच से पहले कहीं ऐसा तो नहीं कि सबूत मिटाए गए हों। ऐसी आशंका भी बढ़ गई है।

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छह जून को चोरी का मामला उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी मामला दबाने में जुट गए थे। गोपनीय तरीके से संदिग्धों को चिह्नित किया गया। फिर उनको पकड़कर बैठा लिया गया। उनसे पूछताछ शुरू की गई और फिर उनकी निशानदेही पर रकम की बरामदगी होने लगी। यह सब इसलिए किया जाता रहा, जिससे असल जिम्मेदार अपनी भूमिका से पल्ला झाड़ सकें। बाद में मामले में एसआईटी गठित की गई, जो जांच कर रही है।
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मामले में अब तक केस दर्ज नहीं हुआ। इसको लेकर पूर्व पुलिस अधिकारियों से लेकर कानून के जानकार भी हैरान हैं। वहीं बिना एफआईआर के संदिग्धों को इतने दिनों तक बैठाए रखना भी कानून के इतर है। जिन संदिग्धों को पकड़ा गया, उनमें लवकुश भी शामिल है। उसके दादा ने बताया कि कभी-कभार लवकुश घर आता था, बाकी समय वहीं रहता था। जब से मंदिर में चोरी का प्रकरण हुआ है, तब से ट्रस्ट वाले उसको लेकर आए थे, फिर अपने साथ ले गए। तब से उससे कोई संपर्क नहीं है। इसी तरह अन्य पकड़े गए संदिग्धों की स्थिति है। परिवार वाले भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हो रहे हैं।

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समझ से परे है ये रवैया

जब यह साबित हो गया है कि चोरी हुई है, संदिग्धों ने रकम भी बरामद कराई है, तो ट्रस्ट की तरफ से केस क्यों नहीं दर्ज कराया जा रहा है। एसआईटी का गठन भी चार-पांच दिन बाद हुआ था। ऐसे में कहीं ऐसा तो नहीं कि बड़े जिम्मेदार सबूत मिटाने में जुटे रहे, इसलिए तत्काल केस दर्ज नहीं कराया गया। हालांकि सूत्रों का दावा है कि एसआईटी की जांच में कई अहम साक्ष्य मिले हैं, जिनकी मदद से जांच आगे बढ़ रही है। कई बड़े लोग भी जांच की जद में आ सकते हैं।

अब शायद जांच पूरी होने का इंतजार

मामले में तीन शिकायतें हो चुकी हैं। तहरीर भी थाने में दी जा चुकी हैं। तहरीर देने वाले सभी बाहरी हैं। मतलब न तो उनका ट्रस्ट से कोई संबंध है और न ही वे मंदिर प्रबंधन आदि से जुड़े हैं। इसलिए शायद उनकी तहरीर पर केस दर्ज नहीं किया जा रहा है। वहीं ऊपर से दबाव होने की भी बात सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर अब एफआईआर दर्ज होगी तो वह एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद कराई जाएगी, जो एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर होगी।

चढ़ावे के जेवरातों का हिसाब नहीं दे पा रहे ट्रस्ट के पदाधिकारी

राम मंदिर की दान की रकम में हेरफेर कर गबन करने के मामले में एसआईटी की छानबीन चौथे दिन भी जारी रही। ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारी चढ़ावे के जेवरातों का हिसाब किताब सही से नहीं दे पा रहे हैं। अब आशंका बढ़ गई है कि करोड़ों की नकदी तो पार हुई ही है सोने, चांदी, हीरे जैसे दान किए गए कीमती जेवरातों में भी हेरफेर किया गया। एसआईटी सुबह दस बजे से देर रात तक पूछताछ कर साक्ष्य जुटाने में लगी रही।

चोरी का मामला उजागर होने के कुछ ही दिन बाद ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा केरल चले गए थे। जिसके पीछे उनका स्वास्थ्य कारण बताया जा रहा था। बृहस्पतिवार को वह अयोध्या पहुंचे। एसआईटी ने करीब तीन घंटे तक उनसे पूछताछ की। इसी तरह गोपाल राव और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी सवाल पूछे। सूत्रों के मुताबिक नकदी के रिकॉर्ड संबंधी तमाम खामियां एसआईटी को मिली हैं। दूसरी तरह दान किए गए जेवरात की सही रसीद आदि नहीं मिल पा रही हैं। मतलब जेवरातों का रिकाॅर्ड भी सही नहीं है। सूत्रों ने बताया कि पदाधिकारी एसआईटी के सवालों के जवाब भी सही से नहीं दे पा रहे थे। इस वजह से तमाम आशंकाएं और बढ़ गई हैं।


 

टिन्नू से दोबारा पूछताछ, अनिल मिश्रा भी कसेगा शिकंजा

चंपत राय के ड्राइवर व सबसे अधिक सवालों के घेरे में रहने वाले टिन्नू यादव से एसआईटी ने बृहस्पतिवार को दोबारा पूछताछ की। खासकर दान की राशि की प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका रहती थी? गिनती करने वाले लोगों में उसके खास कर्मचारी कौन लोग थे? उसकी मौजूदगी वहां क्यों रहती थी? क्योंकि वह ट्रस्ट का पदाधिकारी भी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक वह गोलमाल जवाब देता रहा। वहीं उसने गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम बताया है, इसलिए एसआईटी इन दोनों पर शिकंजा कस सकती है। खासकर अनिल मिश्रा पर। वह शुरू से मामले इधर उधर बचते रहे हैं।

18 लोगों से हुई पूछताछ

Ram Temple donation theft: No FIR has been filed yet, is evidence being destroyed?
राम मंदिर के चढ़ावे की राशि में गबन - फोटो : Amar Ujala

चौथे दिन एसआईटी ने ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों के अलावा कर्मचारियों व संदिग्ध लोगों समेत करीब 18 लोगों से पूछताछ की है। इसमें टिन्नू का भतीजा मनीष यादव और गोपाल राव का भतीजा सोमेश भी शामिल रहा। ये दोनों कोई पदाधिकारी नहीं हैं लेकिन इन सभी मंदिर की हर व्यवस्था में हस्ताक्षेप रहता था।

..आखिर कहां गया मेरा हार
कनार्टक निवासी एक श्रद्धालु ने सोशल मीडिया पर बयान दिया है। जिसमें बताया कि उसने मंदिर में कीमती हार दान किया था लेकिन उसकी रसीद आज तक नहीं मिली। पता ही नहीं चला कि हार का क्या किया गया। इसी तरह के कई और मामले सामने आए हैं। जिसमें चढ़ावे के जेवरात इधर से उधर करने की बात सामने आई है। एसआईटी इन सभी पहलुओं को गंभीरता से छानबीन रही है।

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