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Bihar: तिरंगे में लिपटकर घर लौटा सेना का जवान, 5 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि तो नम हो गईं सबकी आंखें

Tue, 11 Aug 2026 10:25 AM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Tue, 11 Aug 2026 10:25 AM IST
सार

मुंगेर के वासुदेवपुर निवासी सेना के हवलदार संजीव कुमार का लखनऊ के कमान अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। 41 वर्षीय संजीव कुमार भारतीय सेना की आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में तैनात थे और वर्ष 2004 में सेना में भर्ती हुए थे।

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ARMY HAVILDAR SANJEEV KUMAR CREMATED WITH MILITARY HONORS
तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा हवलदार संजीव का पार्थिव शरीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय सेना की एयर डिफेंस रेजीमेंट में तैनात मुंगेर के वासुदेवपुर निवासी हवलदार संजीव कुमार (41) का लखनऊ के कमान अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। निधन के बाद सेना के जवान उनके पार्थिव शरीर को ताबूत में रखकर एंबुलेंस से मुंगेर लेकर पहुंचे। सोमवार को श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

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पांच साल के बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि, नम हुईं लोगों की आंखें

श्मशान घाट पर सेना के जवानों ने सैन्य परंपरा के अनुसार हवलदार संजीव कुमार के पार्थिव शरीर को सलामी देकर अंतिम विदाई दी। सैन्य सम्मान के बाद उनके पांच वर्षीय बेटे योगेश राज ने पिता को मुखाग्नि दी। जिस उम्र में बेटे को पिता का हाथ पकड़कर चलना था, उसी उम्र में उसे पिता की चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। यह मार्मिक दृश्य देखकर श्मशान घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने ‘शहीद संजीव कुमार अमर रहें’ के नारे भी लगाए। सैन्य सम्मान और नारों के बीच हवलदार संजीव कुमार पंचतत्व में विलीन हो गए।

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2004 में सेना में हुए थे भर्ती, 22 साल दी सेवा

हवलदार संजीव कुमार वर्ष 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने करीब 22 वर्षों तक सेना में सेवा दी। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग ओडिशा के गोपालपुर में थी, जहां वह आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में कार्यरत थे। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के कमान अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

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दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

संजीव कुमार अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। बड़ा बेटा योगेश राज पांच वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा करीब तीन वर्ष का है। पांच वर्षीय योगेश द्वारा पिता को मुखाग्नि देने का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। अंतिम संस्कार के दौरान पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। पति का पार्थिव शरीर देखकर वह बार-बार बेसुध हो रही थीं। परिजन और आसपास के लोग उन्हें संभालते रहे।

गया से पहुंची सेना की यूनिट, दी अंतिम सलामी

हवलदार संजीव कुमार की अंतिम विदाई के लिए गया से सेना की यूनिट के जवान भी पहुंचे। सैन्य दल में सुबेदार किशोर कुमार, नायक सुभाष कुमार निराला, नायब सूबेदार रंजीत सिंह और सुबेदार दीपक चौधरी सहित अन्य जवान शामिल थे। सभी ने सैन्य परंपरा के अनुसार हवलदार संजीव कुमार को अंतिम सलामी दी।

पिता के निधन से इलाके में शोक की लहर

संजीव कुमार के पिता स्वर्गीय ओम प्रकाश मंडल थे। उनके निधन की खबर मिलते ही वासुदेवपुर सहित आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग शामिल हुए। लोगों ने नम आंखों से सेना के जवान को अंतिम विदाई दी।

 

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