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Bihar: 'सीखिए CPR, बचाइए जान', बिहार में यहां लगा अनोखा स्वास्थ्य मेला, बच्चों से बुजुर्ग तक को मिली ट्रेनिंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Feb 2026 09:26 AM IST
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सार
बिहार के बेगूसराय जिले के केशावे गांव में रामानंद प्रसाद शर्मा की तीसरी पुण्यतिथि पर बड़े स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों समेत एक हजार से ज्यादा लोगों को सीपीआर की ट्रेनिंग दी गई।
बेगूसराय में सीपीआर ट्रेनिंग का महाअभियान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार के बेगूसराय जिले में स्कूली बच्चों समेत एक हजार से ज्यादा लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर गुरु रहमान को ऑनेस्टी अवॉर्ड दिया गया, जबकि डॉ निशांत रंजन और डॉ अशित कुमार को स्वास्थ्य नायक सम्मान से नवाजा गया। यह कार्यक्रम जिले के केशावे गांव में हुआ, जहां बिहार और झारखंड में अपनी ईमानदारी और संवेदनशीलता के लिए पहचाने जाने वाले अफसर रहे रामानंद प्रसाद शर्मा की तीसरी पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर उनके गांव केशावे में एक बड़ा स्वास्थ्य मेला लगा। इसमें अच्छे डॉक्टरों की टीम ने लोगों की मुफ्त जांच की, मेडिकल सलाह दी और दिल के मरीजों की जान बचाने के लिए सीपीआर और दूसरे जरूरी प्राथमिक इलाज की ट्रेनिंग दी गई।
“देश के हर दसवें व्यक्ति को सीपीआर आना चाहिए”
रामानंद बाबू के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार ने कहा कि जिस तरह हार्ट अटैक और अचानक दिल रुकने के मामले बढ़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए लोगों को समय से बचाने के लिए देश के हर दसवें व्यक्ति, यानी करीब 15 करोड़ लोगों को सीपीआर और ऐसे जरूरी प्राथमिक इलाज की ट्रेनिंग देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरे देश में एक ऐसी श्रृंखला बनानी होगी, जिसमें एक आदमी सीखकर दूसरे को सिखाए और यह सिलसिला आगे बढ़ता जाए।
तीन साल से चल रही है यह मुहिम
अभिरंजन कुमार ने बताया कि वे पिछले तीन साल से इस अभियान को चला रहे हैं। इस बार करीब 50 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मिलकर एक हजार से ज्यादा लोगों को नकली मानव शरीर यानी डमी पर सीपीआर की ट्रेनिंग दी। इसमें बेगूसराय के गंगा ग्लोबल स्कूल, रिवर वैली पब्लिक स्कूल और केशावे उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 8वीं, 9वीं और 11वीं कक्षा के छात्र खास तौर पर शामिल हुए। मैट्रिक और इंटर की परीक्षाओं को देखते हुए 10वीं और 12वीं के छात्रों को परीक्षा के बाद ट्रेनिंग देने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों के अलावा बिहार के अलग-अलग इलाकों से आए कई लोग और संगठन भी इसमें शामिल हुए। इस अभियान की खास बात यह रही कि सभी ट्रेनिंग लेने वाले छात्रों और बड़ों को प्रमाण पत्र दिए गए। साथ ही, सबको मिलकर यह शपथ भी दिलाई गई कि वे आगे ज्यादा से ज्यादा लोगों को सीपीआर सिखाएंगे और जरूरत पड़ने पर दिल के मरीजों की जान बचाने से पीछे नहीं हटेंगे।
जिले और राज्य भर के डॉक्टरों ने लिया हिस्सा
इस कार्यक्रम में कई जाने-माने डॉक्टर शामिल हुए। इनमें डॉ राहुल कुमार, डॉ रंजन चौधरी, डॉ प्रिय रंजन कुमार, डॉ निशांत रंजन, डॉ अशित कुमार, डॉ रमण कुमार झा, डॉ अनामिका, सनशाइन हेल्थ केयर के प्रमोद कुमार और ऑडियोलॉजिस्ट सौरभ समेत कई लोग मौजूद रहे। इस अनोखे अभियान को देखने और समर्थन देने के लिए बीबीसी के पूर्व पत्रकार मणिकांत ठाकुर भी पहुंचे। पद्मविभूषण शारदा सिन्हा के बेटे और स्वर शारदा फाउंडेशन के अध्यक्ष अंशुमान सिन्हा ने कहा कि वे अपनी बहन और मशहूर गायिका वंदना सिन्हा के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए एक म्यूजिकल कैंपेन शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां की जान भी सीपीआर देने से ही बची थी, वरना लोग मान चुके थे कि उनकी मौत हो चुकी है। वहीं, बेगूसराय में बनी नई सिविल सोसाइटी के संयोजक अमरेन्द्र कुमार अमर ने कहा कि वे इस सीपीआर ट्रेनिंग अभियान को बेगूसराय के गांव-गांव तक पहुंचाने में हर तरह से मदद करेंगे।
ये भी पढ़ें: Bihar News: पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी गया था युवक, बदमाशों ने नशा देकर किया बेहोश, फिर कराई जबरन शादी
भजन संध्या के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
सीपीआर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और काउंसिलिंग के बाद शाम को भजन संध्या का आयोजन भी हुआ। पटना से आई उभरती गायिका वंशिका सिन्हा ने शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने “मधुबन खुशबू देता है, जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है” गीत गाकर लोगों की जान बचाने वाले इस अभियान को और खास बना दिया। इस मौके पर उन्हें रामानंद बाबू नवांकुर सम्मान भी दिया गया।
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“देश के हर दसवें व्यक्ति को सीपीआर आना चाहिए”
रामानंद बाबू के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार ने कहा कि जिस तरह हार्ट अटैक और अचानक दिल रुकने के मामले बढ़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए लोगों को समय से बचाने के लिए देश के हर दसवें व्यक्ति, यानी करीब 15 करोड़ लोगों को सीपीआर और ऐसे जरूरी प्राथमिक इलाज की ट्रेनिंग देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूरे देश में एक ऐसी श्रृंखला बनानी होगी, जिसमें एक आदमी सीखकर दूसरे को सिखाए और यह सिलसिला आगे बढ़ता जाए।
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तीन साल से चल रही है यह मुहिम
अभिरंजन कुमार ने बताया कि वे पिछले तीन साल से इस अभियान को चला रहे हैं। इस बार करीब 50 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मिलकर एक हजार से ज्यादा लोगों को नकली मानव शरीर यानी डमी पर सीपीआर की ट्रेनिंग दी। इसमें बेगूसराय के गंगा ग्लोबल स्कूल, रिवर वैली पब्लिक स्कूल और केशावे उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 8वीं, 9वीं और 11वीं कक्षा के छात्र खास तौर पर शामिल हुए। मैट्रिक और इंटर की परीक्षाओं को देखते हुए 10वीं और 12वीं के छात्रों को परीक्षा के बाद ट्रेनिंग देने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों के अलावा बिहार के अलग-अलग इलाकों से आए कई लोग और संगठन भी इसमें शामिल हुए। इस अभियान की खास बात यह रही कि सभी ट्रेनिंग लेने वाले छात्रों और बड़ों को प्रमाण पत्र दिए गए। साथ ही, सबको मिलकर यह शपथ भी दिलाई गई कि वे आगे ज्यादा से ज्यादा लोगों को सीपीआर सिखाएंगे और जरूरत पड़ने पर दिल के मरीजों की जान बचाने से पीछे नहीं हटेंगे।
जिले और राज्य भर के डॉक्टरों ने लिया हिस्सा
इस कार्यक्रम में कई जाने-माने डॉक्टर शामिल हुए। इनमें डॉ राहुल कुमार, डॉ रंजन चौधरी, डॉ प्रिय रंजन कुमार, डॉ निशांत रंजन, डॉ अशित कुमार, डॉ रमण कुमार झा, डॉ अनामिका, सनशाइन हेल्थ केयर के प्रमोद कुमार और ऑडियोलॉजिस्ट सौरभ समेत कई लोग मौजूद रहे। इस अनोखे अभियान को देखने और समर्थन देने के लिए बीबीसी के पूर्व पत्रकार मणिकांत ठाकुर भी पहुंचे। पद्मविभूषण शारदा सिन्हा के बेटे और स्वर शारदा फाउंडेशन के अध्यक्ष अंशुमान सिन्हा ने कहा कि वे अपनी बहन और मशहूर गायिका वंदना सिन्हा के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए एक म्यूजिकल कैंपेन शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां की जान भी सीपीआर देने से ही बची थी, वरना लोग मान चुके थे कि उनकी मौत हो चुकी है। वहीं, बेगूसराय में बनी नई सिविल सोसाइटी के संयोजक अमरेन्द्र कुमार अमर ने कहा कि वे इस सीपीआर ट्रेनिंग अभियान को बेगूसराय के गांव-गांव तक पहुंचाने में हर तरह से मदद करेंगे।
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भजन संध्या के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
सीपीआर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और काउंसिलिंग के बाद शाम को भजन संध्या का आयोजन भी हुआ। पटना से आई उभरती गायिका वंशिका सिन्हा ने शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने “मधुबन खुशबू देता है, जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है” गीत गाकर लोगों की जान बचाने वाले इस अभियान को और खास बना दिया। इस मौके पर उन्हें रामानंद बाबू नवांकुर सम्मान भी दिया गया।