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Munger News: बाढ़ से पहले गंगा का कहर शुरू, मुंगेर में नदी में समाई आधा किलोमीटर जमीन; गांव पर मंडराया खतरा
Tue, 07 Jul 2026 05:35 PM IST
मुंगेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 05:35 PM IST
सार
Bihar News: मुंगेर में संभावित बाढ़ से पहले ही गंगा नदी का कटाव तेज हो गया है। टीका रामपुर में एक महीने के भीतर करीब आधा किलोमीटर जमीन नदी में समा चुकी है। किसानों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू करने की मांग की है।
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गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण कई जगह पर कटाव हुआ शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मानसून के बीच संभावित बाढ़ से पहले ही मुंगेर जिले के दियारा क्षेत्रों में गंगा नदी का कटाव तेज हो गया है। सदर प्रखंड समेत जिले के कई इलाकों में जमीन धंसने और कटाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार हो रहे कटाव से किसानों की उपजाऊ जमीन, खड़ी फसलें और गांवों की सुरक्षा पर संकट गहराने लगा है। सबसे गंभीर स्थिति सदर प्रखंड की मोहली पंचायत के आदर्श ग्राम टीका रामपुर और नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत के मनियारचक गंगा घाट के आसपास देखी जा रही है।
40 किलोमीटर तट पर बढ़ा कटाव का खतरा
करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र में बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा और सदर प्रखंड के गंगा तटीय इलाकों की पड़ताल में कई घाट जर्जर स्थिति में मिले। बरियारपुर में फिलहाल सक्रिय कटाव नहीं दिखा, लेकिन अधिकांश घाट क्षतिग्रस्त पाए गए। वहीं, जमालपुर के सिंघिया, पड़हम और फरदा तथा धरहरा के शिवकुंड और हेमजापुर घाटों पर पहले कराए गए कटावरोधी कार्य भी कई स्थानों पर कमजोर नजर आए।
टीका रामपुर में आधा किलोमीटर जमीन गंगा में समाई
सबसे भयावह स्थिति टीका रामपुर के चंडिका स्थान के समीप है। यहां पिछले एक माह से लगातार जमीन धंस रही है और गंगा नदी किसानों की खेती योग्य भूमि को अपने आगोश में ले रही है। किसानों द्वारा बोई गई मक्का सहित अन्य फसलें भी कटकर नदी में समा चुकी हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बीते एक महीने में पश्चिम दिशा में लगभग आधा किलोमीटर भूमि गंगा में विलीन हो गई है, जबकि उत्तर दिशा में करीब 40 फीट जमीन कटाव की भेंट चढ़ चुकी है। कटाव लगातार गांव की ओर बढ़ रहा है और अब गांव की आबादी महज लगभग 300 मीटर की दूरी पर रह गई है।
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किसानों ने प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप
स्थानीय किसान रामरूप यादव, सकलदेव मंडल, रूपेश यादव, मनोज बिंद और राजेश कुमार ने बताया कि कटाव की सूचना कई बार अंचल कार्यालय और प्रखंड प्रशासन को दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि यदि जल्द कटावरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पूरा गांव खतरे की जद में आ सकता है। उनका आरोप है कि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए जाने से हर वर्ष उनकी उपजाऊ जमीन गंगा में समाती जा रही है।
मनियारचक घाट पर भी बढ़ा खतरा
उधर, मनियारचक गंगा घाट पर भी खतरे के संकेत मिलने लगे हैं। यहां पहले बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से कटावरोधी कार्य कराया गया था, लेकिन अब घाट के समीप फिर से मिट्टी का कटाव शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां प्रतिदिन श्रद्धालु स्नान करते हैं, वहां घाट का किनारा काफी कमजोर हो चुका है। यदि गंगा का जलस्तर बढ़ता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पिछले साल भी हुआ था भारी कटाव
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2025 में भी टीका रामपुर के पश्चिमी हिस्से में बड़े पैमाने पर कटाव हुआ था। उस समय स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं होने के कारण इस वर्ष फिर वही स्थिति उत्पन्न हो गई है। उनका कहना है कि जब गंगा का जलस्तर कम था, उसी समय पुख्ता कटावरोधी कार्य कराया जाता तो आज किसानों की जमीन और फसलें बचाई जा सकती थीं।
यह भी पढ़ें: आज पूरे बिहार में बारिश के आसार, इन 14 जिलों में यलो अलर्ट जारी; पटना में 11 जुलाई तक कैसा रहेगा मौसम?
प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मामले पर सदर अंचलाधिकारी अंजली ने बताया कि मंगलवार को टीका रामपुर गांव में विशेष शिविर लगाया जाएगा। शिविर के दौरान कटाव प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। वहीं, जिला आपदा पदाधिकारी कमल किशोर ने कहा कि मामले की जानकारी प्राप्त कर बाढ़ नियंत्रण विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि आवश्यक कार्रवाई जल्द शुरू की जा सके। फिलहाल दियारा क्षेत्र के किसानों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि गंगा का बढ़ता कटाव उनके खेतों के साथ-साथ अब उनके आशियाने के लिए भी खतरे की घंटी बनता जा रहा है।
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40 किलोमीटर तट पर बढ़ा कटाव का खतरा
करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र में बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा और सदर प्रखंड के गंगा तटीय इलाकों की पड़ताल में कई घाट जर्जर स्थिति में मिले। बरियारपुर में फिलहाल सक्रिय कटाव नहीं दिखा, लेकिन अधिकांश घाट क्षतिग्रस्त पाए गए। वहीं, जमालपुर के सिंघिया, पड़हम और फरदा तथा धरहरा के शिवकुंड और हेमजापुर घाटों पर पहले कराए गए कटावरोधी कार्य भी कई स्थानों पर कमजोर नजर आए।
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टीका रामपुर में आधा किलोमीटर जमीन गंगा में समाई
सबसे भयावह स्थिति टीका रामपुर के चंडिका स्थान के समीप है। यहां पिछले एक माह से लगातार जमीन धंस रही है और गंगा नदी किसानों की खेती योग्य भूमि को अपने आगोश में ले रही है। किसानों द्वारा बोई गई मक्का सहित अन्य फसलें भी कटकर नदी में समा चुकी हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बीते एक महीने में पश्चिम दिशा में लगभग आधा किलोमीटर भूमि गंगा में विलीन हो गई है, जबकि उत्तर दिशा में करीब 40 फीट जमीन कटाव की भेंट चढ़ चुकी है। कटाव लगातार गांव की ओर बढ़ रहा है और अब गांव की आबादी महज लगभग 300 मीटर की दूरी पर रह गई है।
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किसानों ने प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप
स्थानीय किसान रामरूप यादव, सकलदेव मंडल, रूपेश यादव, मनोज बिंद और राजेश कुमार ने बताया कि कटाव की सूचना कई बार अंचल कार्यालय और प्रखंड प्रशासन को दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि यदि जल्द कटावरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पूरा गांव खतरे की जद में आ सकता है। उनका आरोप है कि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए जाने से हर वर्ष उनकी उपजाऊ जमीन गंगा में समाती जा रही है।
मनियारचक घाट पर भी बढ़ा खतरा
उधर, मनियारचक गंगा घाट पर भी खतरे के संकेत मिलने लगे हैं। यहां पहले बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से कटावरोधी कार्य कराया गया था, लेकिन अब घाट के समीप फिर से मिट्टी का कटाव शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां प्रतिदिन श्रद्धालु स्नान करते हैं, वहां घाट का किनारा काफी कमजोर हो चुका है। यदि गंगा का जलस्तर बढ़ता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पिछले साल भी हुआ था भारी कटाव
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2025 में भी टीका रामपुर के पश्चिमी हिस्से में बड़े पैमाने पर कटाव हुआ था। उस समय स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं होने के कारण इस वर्ष फिर वही स्थिति उत्पन्न हो गई है। उनका कहना है कि जब गंगा का जलस्तर कम था, उसी समय पुख्ता कटावरोधी कार्य कराया जाता तो आज किसानों की जमीन और फसलें बचाई जा सकती थीं।
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प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मामले पर सदर अंचलाधिकारी अंजली ने बताया कि मंगलवार को टीका रामपुर गांव में विशेष शिविर लगाया जाएगा। शिविर के दौरान कटाव प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा। वहीं, जिला आपदा पदाधिकारी कमल किशोर ने कहा कि मामले की जानकारी प्राप्त कर बाढ़ नियंत्रण विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि आवश्यक कार्रवाई जल्द शुरू की जा सके। फिलहाल दियारा क्षेत्र के किसानों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि गंगा का बढ़ता कटाव उनके खेतों के साथ-साथ अब उनके आशियाने के लिए भी खतरे की घंटी बनता जा रहा है।