Bihar: गन्ना किसानों पर दोहरी मार, 9 साल से क्यों नहीं हो रहा भुगतान? चीनी मिल के खिलाफ विरोध हो रहा तेज
बिहार-उत्तर प्रदेश सीमा से सटे महाराजगंज में नौ वर्षों से लंबित गन्ना भुगतान को लेकर किसानों ने मोर्चा खोल दिया। अब बगहा के किसानों ने गरौरा चीनी मिल परिसर में धरना दे रहे हैं, जिससे गन्ना आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। बड़ा सवाल यह है कि किसानों की आवाज अब तक क्यों नहीं सुनी गई?
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बिहार-उत्तर प्रदेश सीमा से सटे महाराजगंज जिले में स्थित गरौरा चीनी मिल के खिलाफ बगहा क्षेत्र के दर्जनों किसानों का सब्र आखिरकार टूट गया। लाखों रुपये के गन्ना बकाया भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने चीनी मिल परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि उनका गन्ना भुगतान पिछले नौ वर्षों से लंबित है, लेकिन न तो मिल प्रबंधन सुनवाई कर रहा है और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल की जा रही है।
सवाल: कब तक जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन बगहा के नौरंगिया स्थित गरौरा चीनी मिल के कांटा परिसर में पिछले 24 घंटे से लगातार जारी है। आक्रोशित किसानों ने गन्ना लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों को कांटा परिसर में ही रोक दिया है, जिससे मिल को गन्ने की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
ठंड की मार फिर भी लड़ रहे किसान
कड़ाके की ठंड, भूख और थकान के बावजूद किसान अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए धरनास्थल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल किसान उमाशंकर सहनी, कलाम मियां, मुन्ना अंसारी, परशुराम गुप्ता, धीरज गुप्ता, सुनील गोड़, मुमताज अंसारी और नेमा यादव ने बताया कि भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। रोजमर्रा की आवश्यकताएं पूरी करना कठिन हो गया है और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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क्यों नहीं सुनी जा रही किसानों की आवाज?
किसानों का कहना है कि उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, भुगतान नहीं। आरोप है कि जब किसान मिल प्रबंधन से मिलने पहुंचे तो उन्हें अपमानित कर परिसर से बाहर निकाल दिया गया।
स्थिति की गंभीरता इस बात से भी जाहिर होती है कि किसानों के अनुसार, कर्ज और बकाया भुगतान के तनाव में कुछ किसानों की असमय मौत तक हो चुकी है, इसके बावजूद मिल प्रबंधन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि बीते 24 घंटे में चीनी मिल की ओर से कोई भी प्रतिनिधि किसानों से बातचीत करने नहीं पहुंचा।