Bihar: सरकार ने 1.86 करोड़ से परिवारों को दिया इस योजना का लाभ, मंत्री संजय सिंह ने बताया क्या है प्राथमिकता
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की ओर से आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला में ‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत ग्रामीण जलापूर्ति की निरंतरता और जल गुणवत्ता पर मंथन हुआ। मंत्री संजय कुमार सिंह ने निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने और समाप्ति की ओर बढ़ रहे O&M अनुबंधों की समय पर निविदा प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।
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लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार सरकार की ओर से शुक्रवार को पटना में जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव (O&M) नीति को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान, कोलकाता और यूनिसेफ बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एकदिवसीय कार्यशाला में ‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण संचालन पर मंथन किया गया।
'जलापूर्ति योजनाओं के संचालन में कोई कमी न हो'
कार्यशाला को संबोधित करते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जलापूर्ति अवसंरचना का निर्माण किया गया है और इन योजनाओं का सुचारु संचालन एवं रख-रखाव सुनिश्चित करना विभाग की निरंतर प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संचालन एवं रख-रखाव नीति के माध्यम से जलापूर्ति सेवाओं की निरंतरता, जल गुणवत्ता की निगरानी तथा सामुदायिक सहभागिता को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया गया है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव (O&M) का अनुबंध समाप्ति की ओर हैं, उनकी समय रहते पहचान की जानी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं के लिए O&M की निविदा प्रक्रिया मौजूदा अनुबंध की अवधि समाप्त होने से पूर्व पूरी की जाए, ताकि किसी भी जलापूर्ति योजना में संचालन एवं रख-रखाव के अभाव में व्यवधान की स्थिति उत्पन्न न हो।
'एक करोड़ 86 लाख ग्रामीण परिवारों को मिला कनेक्शन'
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के विशेष सचिव संजीव कुमार ने कहा कि ‘हर घर नल का जल’ योजना के पश्चात राज्य में ग्रामीण जलापूर्ति क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। राज्य में अब तक 1.20 लाख से अधिक ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण कर 1.86 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं रख-रखाव के लिए विभाग द्वारा चार वर्ष पूर्व व्यापक O&M नीति लागू की गई थी, जिसके क्रियान्वयन से जुड़े अनुभवों को इस कार्यशाला में साझा किया गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान के निदेशक प्रियतू मंडल ने जल गुणवत्ता को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए बिहार की प्रगति की प्रशंसा की। कार्यशाला में O&M नीति के प्रावधानों में एकरूपता, रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस मौके पर यूनिसेफ इंडिया और बिहार के वॉश विशेषज्ञों, आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर गोपाल नाइक समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला स्तर के पदाधिकारी मौजूद रहे।