Bihar Budget: बिहार बजट पेश करने की तैयारी में जुटी नीतीश सरकार, इन चीजों पर फोकस; 2020 से अब तक का गणित देखें
Bihar News: बिहार में नई एनडीए बजट लाने की तैयारी में जुट गई है। अगले महीने वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव 2026-27 का बजट पेश करेंगे। लेकिन, इससे पहले तीसरा अनुपूरक बजट लाया जाएगा। जानिए बजट में सरकार पर फोकस किन चीजों पर होगा? 2020 से अब तक के बजट का आकार क्या रहा? विपक्ष का क्या कहना है?
विस्तार
नीतीश सरकार ने 2026-27 के लिए बजट की तैयारी शुरू कर दी है। नए वित्तीय वर्ष के जमा खर्च के लिए फरवरी माह के तीसरे सप्ताह बजट पेश करने की तैयारी चल रही है। हालांकि, सत्र के तारीखों की घोषणा अब तक नहीं हुई है। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार निरंतर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उर्जा, तकनीक, उद्योग समेत कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। बिहार नई अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लक्ष्य पर काम किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता रोजगार सृजन है। इस पर मंथन शुरू हो गया है। इस बार का बजट बिहार के विकास की दृष्टिकोण से काफी अहम होगा।
इधर, वित्त विभाग की ओर से सभी विभागों को पत्र भेज दिया गया है। इसमें तीसरे अनुपूरक बजट के लिए 19 जनवरी तक प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है। बिहर सरकार इस सत्र में वर्ष 2025-26 के लिए तीसरे अनुपूरक बजट लाने की भी तैयारी कर रही है। इसके लिए सभी विभागों से प्रस्ताव मांगा गया है। जिन योजनाओं की खर्च बढ़ाने की जरूरत है, उनमें राशि आवंटित की जाएगी। राशि का प्रावधान अनुपूरक बजट के जरिए ही किया जाएगा। 2025-26 के लिए दो अनुपूरक बजट पेश किया गया है। पहला अनुपूरक बजट (57946) बिहार विधानसभा चुनाव से पहले और दूसरा नई सरकार बनने के बाद। शीत कालीन सत्र में नीतीश सरकार ने 91717 करोड़ का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किया था।
भाजपा ने बताया कैसा होगा इस बार का बजट
इस बार कैसा होगा बिहार का बजट? इस सवाल पर भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि एनडीए सरकार का लक्ष्य गांव, गरीब, किसान, छात्र और युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार ने आगामी पांच साल में एक करोड़ नौकरी और रोजगार का लक्ष्य रखा है। बिहार को अधिक से अधिक उद्योग लगे। राज्य विकसित राज्यों की श्रेणी में आए। सरकार का फोकस इस पर ही है।
राजद ने कहा- राज्य के खजाने की फिजुलखर्ची की जा रही
वहीं राजद का कहना है कि सरकार के खजाने को लुटाने की साजिश है और राज्य के खजाने की फिजुलखर्ची की जा रही है। इस तरह की फिजुलखर्ची के कारण ही बिहार पर 3 लाख करोड़ से ऊपर का कर्जा है। जिसके कारण प्रति व्यक्ति पर 25 हजार रुपये का कर्जा है। महिलाओं को दो लाख की राशि दिए जाने पर दो लाख 70 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त आर्थिक बोझ सरकार को वहन करना होगा, वहीं वेतन मद का एक लाख 05 हजार रुपये देना पड़ेगा। दोनों मिलाकर 3:45 लाख करोड़ रुपए की आवश्यकता पड़ेगी ,जबकि बिहार का कुल बजट तीन लाख करोड रुपये का ही है। वहीं राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने आगे कहा कि सरकार खजाने की खर्चे पर श्वेत पत्र जारी करे और सच्चाई से बिहार की जनता को जानकारी दें।
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पिछले पांच साल में 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ा बिहार का बजट
आंकड़ें बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में बिहार के बजट का आकार तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2020-21 में जहां बजट करीब 2.11 लाख करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 3.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यानी पांच साल में बजट में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। सरकार इसे विकास की रफ्तार तेज होने का संकेत बता रही है। कोरोना काल के दौरान और उसके बाद पेश किए गए बजटों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही शिक्षा, ग्रामीण विकास, कृषि और बुनियादी ढांचे को भी प्राथमिकता मिली। 2022-23 और 2023-24 के बजट में रोजगार सृजन और पलायन रोकने के लिए नई योजनाओं की घोषणा की गई। वहीं 2024-25 और 2025-26 के बजट में शिक्षा को सबसे बड़ा हिस्सा मिला, जबकि स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए भी रिकॉर्ड प्रावधान किए गए।
| वित्तीय वर्ष | कुल बजट |
| 2020-21 | 2.11 लाख करोड़ रुपये |
| 2021-22 | 2.18 लाख करोड़ रुपये |
| 2022-23 | 2.37 लाख करोड़ रुपये |
| 2023-24 | 2.61 लाख करोड़ रुपये |
| 2024-25 | 2.78 लाख करोड़ रुपये |
| 2025-26 | 3.16 लाख करोड़ रुपये |