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‘पुल नहीं तो विकास नहीं’: बगहा में सरकार के इस फैसले के खिलाफ उबाल, टूटी उम्मीदों के बाद सड़कों पर उतरे लोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पश्चमि चंपारण Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Tue, 20 Jan 2026 04:21 PM IST
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सार

West Champaran News: बगहा में शास्त्री नगर से बेलवानिया तक प्रस्तावित पुल रद्द होने के खिलाफ सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने धनहा रतवल पुल के चौड़ीकरण को अपर्याप्त बताते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।

West Champaran News: After broken hopes, people took to streets against decision to cancel bridge in Bagaha
सड़क पर उतरकर सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा में मंगलवार को गुस्से से ज्यादा टूटती उम्मीदें सड़कों पर दिखाई दीं। कैलाशनगर इलाके में सैकड़ों लोग हाथों में तख्तियां लिए सरकार के फैसले के विरोध में एकत्र हुए। लोगों की आंखों में आक्रोश और आवाजों में निराशा साफ झलक रही थी।

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किस पुल को लेकर उठा विवाद
विरोध का केंद्र शास्त्री नगर से उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के बेलवानिया तक प्रस्तावित वह पुल है, जिसे स्थानीय लोग वर्षों से अपने विकास का रास्ता मानते आए थे। लोगों का कहना है कि सरकार के हालिया फैसले ने इस बहुप्रतीक्षित पुल निर्माण पर विराम लगा दिया, जिससे क्षेत्र की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है।
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स्वीकृति के संकेतों से जगी थीं उम्मीदें
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जब जनप्रतिनिधियों और एक केंद्रीय मंत्री की ओर से पुल निर्माण को लेकर स्वीकृति के संकेत मिले थे, तब बगहा में पहली बार विकास को इतने करीब महसूस किया गया था। किसानों ने अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार की कल्पना की थी, व्यापारियों ने नए अवसरों की उम्मीद बांधी थी और छात्रों ने आसान आवागमन का सपना देखा था।
 
अचानक फैसले से टूटा भरोसा
लोगों का कहना है कि अचानक आए फैसले ने इन सभी उम्मीदों को एक झटके में तोड़ दिया। प्रदर्शनकारियों का दर्द इस बात को लेकर है कि पुल निर्माण रद्द कर धनहा रतवल पुल के चौड़ीकरण का प्रस्ताव उनके लिए समाधान नहीं है।
 
चौड़ीकरण को बताया अपर्याप्त विकल्प
प्रदर्शन में शामिल लोगों का मानना है कि धनहा रतवल पुल का चौड़ीकरण न तो बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच दूरी को कम करेगा और न ही बगहा को वह पहचान दिला पाएगा, जिसकी क्षेत्र को लंबे समय से जरूरत है। उनका कहना है कि इलाका आज भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है।

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व्यापार और भविष्य से जुड़ा सवाल
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की आवाज एक जैसी थी कि यह पुल सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि उनके भविष्य का आधार था। शास्त्री नगर से बेलवानिया तक पुल बनने से बगहा सीमावर्ती क्षेत्र में एक मजबूत व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर सकता था, लेकिन मौजूदा फैसले ने क्षेत्र को फिर से हाशिये पर धकेल दिया है।
 
सरकार से पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शन के दौरान “पुल नहीं तो विकास नहीं” के नारे गूंजते रहे। लोगों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की और साफ चेतावनी दी कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। उनका कहना है कि जब तक बगहा को उसका हक नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

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