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Bihar News: खनन कार्यालय में घूसखोरी का भंडाफोड़, 50 हजार लेते ऑपरेटर समेत दो गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाजीपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 08:30 PM IST
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सार
वैशाली के हाजीपुर में निगरानी विभाग की टीम ने खनन कार्यालय में छापेमारी कर 50 हजार रुपये रिश्वत लेते डाटा एंट्री ऑपरेटर और एक परिचारी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई गिट्टी भंडारण दुकान के लाइसेंस के नाम पर घूस मांगने की शिकायत के बाद की गई।
गिरफ्तार दोनों कर्मचारियों के साथ निगरानी विभाग की टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वैशाली जिले के हाजीपुर में पटना निगरानी विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खनन विभाग के कार्यालय में छापेमारी की। इस दौरान 50 हजार रुपये रिश्वत लेते एक डाटा एंट्री ऑपरेटर और एक परिचारी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार दोनों कर्मियों को खनन कार्यालय से सर्किट हाउस लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।
लाइसेंस के नाम पर मांगी जा रही थी घूस
जानकारी के अनुसार, बिदुपुर प्रखंड के माइल गांव स्थित मीनाक्षी एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर राजीव कुमार के स्टाफ ने गिट्टी भंडारण दुकान के लाइसेंस के लिए खनन विभाग पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। इस मामले में फरवरी महीने में निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने जांच की और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई की।
जाल बिछाकर पकड़ा गया आरोपी
निगरानी विभाग ने सत्यापन के बाद खनन कार्यालय में ट्रैप लगाया। इसी दौरान डाटा एंट्री ऑपरेटर और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी को 50 हजार रुपये घूस लेते हुए पकड़ लिया गया। गिरफ्तार डाटा एंट्री ऑपरेटर की पहचान मोतिहारी जिले के कालू पाकर निवासी रमन प्रसाद के पुत्र राहुल कुमार रोशन के रूप में हुई है, जबकि परिचारी छपरा जिले के टरवा मगरपाल निवासी स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद यादव के पुत्र प्रमोद कुमार बताए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने बताई पूरी कहानी
निगरानी टीम के डीएसपी सदानंद सिंह के अनुसार, बिदुपुर प्रखंड के माइल गांव स्थित मीनाक्षी एंटरप्राइजेज के स्टाफ जिम्मेदार कुमार (निवासी दाउदनगर, बिदुपुर थाना) ने 6 फरवरी को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि गिट्टी भंडारण दुकान के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन दिया गया था और इस काम की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।
ये भी पढ़ें: सीएम नीतीश ने अपने सांसद पर की कार्रवाई, गिरधारी यादव को जदयू ने नोटिस भेजा; जानिए पूरा मामला
शिकायतकर्ता ने बताया कि 28 जनवरी को वे लाइसेंस के सिलसिले में खनन कार्यालय, हाजीपुर गए थे, जहां उनकी मुलाकात डाटा एंट्री ऑपरेटर राहुल कुमार रोशन से हुई। उन्होंने सभी कागजात देने के बाद बताया कि काम हो जाएगा, लेकिन पहले 10 हजार रुपये देने होंगे। इसमें 5 हजार रुपये ऑनलाइन चालान और 5 हजार रुपये ऑनलाइन प्रक्रिया शुल्क बताया गया। दबाव में आकर उन्होंने 10 हजार रुपये दे दिए।
इसके बाद 30 जनवरी को फिर मिलने पर ऑपरेटर ने बताया कि चालान जमा हो गया है, लेकिन लाइसेंस के लिए 50 हजार रुपये “ऑफिस फीस” अलग से देनी होगी। जब उन्होंने इस फीस के बारे में पूछा, तो कहा गया कि यह पैसा “ऊपर तक देना होता है।” निगरानी विभाग की टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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लाइसेंस के नाम पर मांगी जा रही थी घूस
जानकारी के अनुसार, बिदुपुर प्रखंड के माइल गांव स्थित मीनाक्षी एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर राजीव कुमार के स्टाफ ने गिट्टी भंडारण दुकान के लाइसेंस के लिए खनन विभाग पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। इस मामले में फरवरी महीने में निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने जांच की और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई की।
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जाल बिछाकर पकड़ा गया आरोपी
निगरानी विभाग ने सत्यापन के बाद खनन कार्यालय में ट्रैप लगाया। इसी दौरान डाटा एंट्री ऑपरेटर और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी को 50 हजार रुपये घूस लेते हुए पकड़ लिया गया। गिरफ्तार डाटा एंट्री ऑपरेटर की पहचान मोतिहारी जिले के कालू पाकर निवासी रमन प्रसाद के पुत्र राहुल कुमार रोशन के रूप में हुई है, जबकि परिचारी छपरा जिले के टरवा मगरपाल निवासी स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद यादव के पुत्र प्रमोद कुमार बताए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने बताई पूरी कहानी
निगरानी टीम के डीएसपी सदानंद सिंह के अनुसार, बिदुपुर प्रखंड के माइल गांव स्थित मीनाक्षी एंटरप्राइजेज के स्टाफ जिम्मेदार कुमार (निवासी दाउदनगर, बिदुपुर थाना) ने 6 फरवरी को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि गिट्टी भंडारण दुकान के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन दिया गया था और इस काम की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि 28 जनवरी को वे लाइसेंस के सिलसिले में खनन कार्यालय, हाजीपुर गए थे, जहां उनकी मुलाकात डाटा एंट्री ऑपरेटर राहुल कुमार रोशन से हुई। उन्होंने सभी कागजात देने के बाद बताया कि काम हो जाएगा, लेकिन पहले 10 हजार रुपये देने होंगे। इसमें 5 हजार रुपये ऑनलाइन चालान और 5 हजार रुपये ऑनलाइन प्रक्रिया शुल्क बताया गया। दबाव में आकर उन्होंने 10 हजार रुपये दे दिए।
इसके बाद 30 जनवरी को फिर मिलने पर ऑपरेटर ने बताया कि चालान जमा हो गया है, लेकिन लाइसेंस के लिए 50 हजार रुपये “ऑफिस फीस” अलग से देनी होगी। जब उन्होंने इस फीस के बारे में पूछा, तो कहा गया कि यह पैसा “ऊपर तक देना होता है।” निगरानी विभाग की टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।