Bihar News: सात साल का प्यार, दहेज ने तोड़ा रिश्ता, पुलिस बनी भगवान; मंदिर में कराई शादी
पूर्णिया में महिला थाना पुलिस ने एक अनोखी पहल करते हुए दहेज विवाद में उलझे रिश्ते को बचा लिया। धमदाहा के सिंगड़ा पट्टी में 7 साल पुराना रिश्ता टूटने की कगार पर था, लेकिन थानाध्यक्ष शबाना आजमी ने काउंसलिंग के जरिए दोनों पक्षों को समझाया।
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कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन पूर्णिया की महिला थाना पुलिस ने यह भी साबित कर दिया कि इन हाथों में ममता और समझदारी भी होती है। जिस रिश्ते में दहेज की कड़वाहट और धोखे का जहर घुल चुका था, उसे महिला थाना की थानाध्यक्ष शबाना आजमी ने अपनी सूझबूझ से फिर से मजबूत रिश्ते में बदल दिया। पुलिस की इस अनूठी पहल की अब पूरे जिले में चर्चा हो रही है और लोग खाकी के इस ‘मैरेज मेकर’ रूप की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
7 साल का प्यार दहेज में टूटने की कगार पर
यह मामला धमदाहा के सिंगड़ा पट्टी का है, जहां 7 साल पुराना प्यार दहेज की वजह से टूटने की कगार पर पहुंच गया था। पीड़िता रानी कुमारी ने जब अपनी आपबीती सुनाई, तो मामला सिर्फ कानूनी कार्रवाई का नहीं, बल्कि एक लड़की के भविष्य का बन गया।
थानाध्यक्ष ने निभाई बड़ी बहन की भूमिका
इस मामले में थानाध्यक्ष शबाना आजमी ने सिर्फ सख्ती नहीं दिखाई, बल्कि एक बड़ी बहन और अभिभावक की तरह दोनों पक्षों की काउंसलिंग की। उन्होंने लड़का अमित और उसके परिवार को कानून का आईना दिखाया और रिश्तों की अहमियत समझाई। इसके बाद दहेज की मांग करने वालों का दिल पिघल गया और मामला सुलझने की ओर बढ़ गया।
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थाने से मंदिर तक पहुंची बात, पुलिस बनी गवाह
पुलिस की पहल इतनी असरदार रही कि घंटों चली बातचीत के बाद मामला कोर्ट-कचहरी जाने के बजाय सीधे शादी तक पहुंच गया। थानाध्यक्ष शबाना आजमी की देखरेख में दोनों पक्षों को शहर के पंचमुखी मंदिर ले जाया गया। पुलिस कर्मी खुद इस शादी के गवाह बने और सुरक्षा के बीच अमित और रानी ने सात फेरे लिए।
समाज को मिला बड़ा संदेश
पुलिस की इस सकारात्मक भूमिका ने न केवल एक लड़की की जिंदगी को संवार दिया, बल्कि समाज को यह भी संदेश दिया कि खाकी सिर्फ सजा देने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने के लिए भी होती है। शादी के बाद जब नवदंपति ने पुलिस अधिकारियों का आशीर्वाद लिया, तो माहौल भावुक हो गया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। थानाध्यक्ष शबाना आजमी ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल एफआईआर दर्ज करना नहीं, बल्कि लोगों को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि दोनों परिवारों को समझाकर एक घर बसते देखना सुकून देता है।