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Bihar: कांप रहा डुमरिया घाट पुल! 110 टन की क्षमता पर गुजरा 210 टन का ट्रक, अब टूटे पुर्जों के सहारे टिका सफर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2026 10:09 PM IST
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सार
मोतिहारी के डुमरिया घाट पुल में स्प्रिंग और नट-बोल्ट टूटने से हादसे का खतरा बढ़ गया है। क्षमता से दोगुना वजन गुजरने के बाद पुल की स्थिति बिगड़ी। नए पुल का निर्माण वर्षों से अधूरा है, जबकि एनएचआई ने सुरक्षा कदम तेज करने की बात कही है।
डुमरिया घाट पुल
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
मोतिहारी से बड़ी खबर सामने आई है। गोपालगंज और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाली गंडक नदी पर बने डुमरिया घाट पुल की स्थिति अब चिंताजनक हो गई है। पुल में गंभीर तकनीकी खराबी आने के बाद इसके सुरक्षित संचालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, पुल के स्प्रिंग और नट-बोल्ट टूट चुके हैं, जिसके कारण संरचना को जरूरी तकनीकी सहारा नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुल पर वाहन गुजरने के दौरान नियंत्रित कंपन नहीं हो पा रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
क्षमता से दोगुना वजन गुजरने के बाद बिगड़ी स्थिति
बताया जा रहा है कि डुमरिया घाट पुल की भार वहन क्षमता लगभग 110 टन निर्धारित है। इसके बावजूद 5 जनवरी को करीब 210 टन वजन वाला मालवाहक वाहन पुल से गुजरा था। इसी घटना के बाद पुल की तकनीकी स्थिति और खराब हो गई।
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स्प्रिंग और नट-बोल्ट टूटे
विशेषज्ञों के मुताबिक, पुल में लगे स्प्रिंग भार संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। वाहन गुजरने के दौरान यही स्प्रिंग दबाव को नियंत्रित कर संरचना को सुरक्षित रखते हैं। लेकिन स्प्रिंग और नट-बोल्ट टूट जाने के कारण अब पूरा भार सीधे पुल पर पड़ रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
वर्षों से अधर में लटका नया पुल निर्माण
डुमरिया घाट पर नए पुल के निर्माण की योजना भी लंबे समय से अधूरी पड़ी हुई है। वर्ष 2008 में करीब 88 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण शुरू किया गया था। हालांकि, वर्ष 2011 में निर्माणाधीन पुल का एक पाया धंस जाने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया। इसके बाद वर्ष 2022 में लगभग 167 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल के निर्माण के लिए दोबारा निविदा जारी की गई। लेकिन निर्माण की तकनीकी समस्याओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। अब स्टील संरचना के आधार पर नया पुल बनाने की योजना तैयार की जा रही है, लेकिन अभी तक जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
ये भी पढ़ें- Bihar News: ‘तेजस्वी को विकास नहीं दिख रहा, मोटा चश्मा लगाना पड़ेगा’; जेडीयू विधायक का बड़ा हमला
पुराने पुल पर दबाव कम करने की तैयारी
एनएचएआई की ओर से कहा गया है कि नए पुल के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही पुराने पुल पर भार नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के बीच आवागमन का अहम माध्यम है। ऐसे में पुल की खराब स्थिति से लोगों में डर का माहौल है और जल्द स्थायी समाधान की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, पुल के स्प्रिंग और नट-बोल्ट टूट चुके हैं, जिसके कारण संरचना को जरूरी तकनीकी सहारा नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुल पर वाहन गुजरने के दौरान नियंत्रित कंपन नहीं हो पा रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
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क्षमता से दोगुना वजन गुजरने के बाद बिगड़ी स्थिति
बताया जा रहा है कि डुमरिया घाट पुल की भार वहन क्षमता लगभग 110 टन निर्धारित है। इसके बावजूद 5 जनवरी को करीब 210 टन वजन वाला मालवाहक वाहन पुल से गुजरा था। इसी घटना के बाद पुल की तकनीकी स्थिति और खराब हो गई।
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स्प्रिंग और नट-बोल्ट टूटे
विशेषज्ञों के मुताबिक, पुल में लगे स्प्रिंग भार संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। वाहन गुजरने के दौरान यही स्प्रिंग दबाव को नियंत्रित कर संरचना को सुरक्षित रखते हैं। लेकिन स्प्रिंग और नट-बोल्ट टूट जाने के कारण अब पूरा भार सीधे पुल पर पड़ रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
वर्षों से अधर में लटका नया पुल निर्माण
डुमरिया घाट पर नए पुल के निर्माण की योजना भी लंबे समय से अधूरी पड़ी हुई है। वर्ष 2008 में करीब 88 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण शुरू किया गया था। हालांकि, वर्ष 2011 में निर्माणाधीन पुल का एक पाया धंस जाने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया। इसके बाद वर्ष 2022 में लगभग 167 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल के निर्माण के लिए दोबारा निविदा जारी की गई। लेकिन निर्माण की तकनीकी समस्याओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। अब स्टील संरचना के आधार पर नया पुल बनाने की योजना तैयार की जा रही है, लेकिन अभी तक जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
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पुराने पुल पर दबाव कम करने की तैयारी
एनएचएआई की ओर से कहा गया है कि नए पुल के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही पुराने पुल पर भार नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के बीच आवागमन का अहम माध्यम है। ऐसे में पुल की खराब स्थिति से लोगों में डर का माहौल है और जल्द स्थायी समाधान की मांग तेज हो गई है।