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Bihar: किस भाजपा विधायक की हत्या की साजिश? पत्र में हैंड ग्रेनेड से हमले का दावा; जेल अधीक्षक समेत चार पर FIR
Sat, 08 Aug 2026 01:28 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 01:28 PM IST
सार
शाहपुर के भाजपा विधायक राकेश रंजन ओझा को निशाना बनाने की कथित साजिश से जुड़े गुमनाम पत्र के मामले में पुलिस ने चार लोगों को नामजद किया है। पत्र में विधायक की हत्या के लिए हैंड ग्रेनेड और शूटर की व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया था।
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भाजपा विधायक राकेश रंजन ने हत्या की साजिश का आरोप लगाया
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भोजपुर जिले के शाहपुर से भाजपा विधायक राकेश रंजन उर्फ राकेश रंजन ओझा की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विधायक के पैतृक गांव ओझवलिया स्थित आवास पर पहुंचे एक गुमनाम पत्र में उनकी हत्या की कथित साजिश का उल्लेख किए जाने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पत्र में हैंड ग्रेनेड की व्यवस्था करने और शूटर के जरिए विधायक पर हमला कराने की बात कही गई है। मामले में भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा, आरा कोर्ट बम ब्लास्ट कांड के आरोपी लंबू शर्मा, बक्सर के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के जोगिया गांव निवासी कुबेर मिश्रा तथा करनामेपुर थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव निवासी हरीश मिश्रा को नामजद किया गया है। करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
आठ जुलाई को डाक से पहुंचा था पत्र
विधायक के मुताबिक, 8 जुलाई को उनके आवास पर डाक के जरिए एक गुमनाम पत्र पहुंचा था। पत्र भेजने वाले ने अपना नाम विकास कुमार और पता शाहपुर, भोजपुर बताया था। पत्र में दावा किया गया था कि भागलपुर जेल में बंद कुछ आरोपियों की ओर से विधायक को निशाना बनाने की कथित योजना तैयार की जा रही है। पत्र में जेल के भीतर बंदियों की गतिविधियों और उनसे मुलाकात को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं। साथ ही विधायक की हत्या के लिए कथित तौर पर हैंड ग्रेनेड की व्यवस्था और शूटर का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
बाद में दर्ज हुई प्राथमिकी
गुमनाम पत्र मिलने के बाद विधायक ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने और सुरक्षा को लेकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। इसके आधार पर 19 जुलाई को सनहा दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद 3 अगस्त को करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस अब पत्र भेजने वाले की पहचान करने के साथ ही पत्र में लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल कर रही है। जांच में तकनीकी साक्ष्यों के अलावा जेल से जुड़े तथ्यों और नामजद किए गए लोगों की संभावित भूमिका को भी शामिल किया गया है।
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2016 में पिता की हुई थी हत्या
विधायक राकेश रंजन ओझा के परिवार का आपराधिक घटनाओं से पुराना संबंध रहा है। वर्ष 2016 में उनके पिता और भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की शाहपुर के सोनबरसा बाजार के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल 2025 को विधायक राकेश रंजन ओझा पर भी गोलीबारी की घटना सामने आई थी। मामले को लेकर शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अब एक बार फिर विधायक की हत्या की कथित साजिश से जुड़ा पत्र सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस पुराने आपराधिक मामलों और मौजूदा घटनाक्रम के बीच किसी संभावित कड़ी की भी जांच कर रही है।
जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी वास्तविकता
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुमनाम पत्र की विश्वसनीयता और उसमें लगाए गए आरोपों की पुष्टि करना है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस पत्र भेजने वाले व्यक्ति तक पहुंचने के साथ-साथ नामजद आरोपियों की भूमिका और कथित साजिश से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। जांच से मिलने वाले साक्ष्यों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विधायक को निशाना बनाने की वास्तविक योजना थी या फिर गुमनाम पत्र के माध्यम से दहशत पैदा करने की कोशिश की गई है।
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आठ जुलाई को डाक से पहुंचा था पत्र
विधायक के मुताबिक, 8 जुलाई को उनके आवास पर डाक के जरिए एक गुमनाम पत्र पहुंचा था। पत्र भेजने वाले ने अपना नाम विकास कुमार और पता शाहपुर, भोजपुर बताया था। पत्र में दावा किया गया था कि भागलपुर जेल में बंद कुछ आरोपियों की ओर से विधायक को निशाना बनाने की कथित योजना तैयार की जा रही है। पत्र में जेल के भीतर बंदियों की गतिविधियों और उनसे मुलाकात को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं। साथ ही विधायक की हत्या के लिए कथित तौर पर हैंड ग्रेनेड की व्यवस्था और शूटर का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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बाद में दर्ज हुई प्राथमिकी
गुमनाम पत्र मिलने के बाद विधायक ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने और सुरक्षा को लेकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। इसके आधार पर 19 जुलाई को सनहा दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद 3 अगस्त को करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस अब पत्र भेजने वाले की पहचान करने के साथ ही पत्र में लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल कर रही है। जांच में तकनीकी साक्ष्यों के अलावा जेल से जुड़े तथ्यों और नामजद किए गए लोगों की संभावित भूमिका को भी शामिल किया गया है।
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2016 में पिता की हुई थी हत्या
विधायक राकेश रंजन ओझा के परिवार का आपराधिक घटनाओं से पुराना संबंध रहा है। वर्ष 2016 में उनके पिता और भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की शाहपुर के सोनबरसा बाजार के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 16 अप्रैल 2025 को विधायक राकेश रंजन ओझा पर भी गोलीबारी की घटना सामने आई थी। मामले को लेकर शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। अब एक बार फिर विधायक की हत्या की कथित साजिश से जुड़ा पत्र सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पुलिस पुराने आपराधिक मामलों और मौजूदा घटनाक्रम के बीच किसी संभावित कड़ी की भी जांच कर रही है।
जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी वास्तविकता
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुमनाम पत्र की विश्वसनीयता और उसमें लगाए गए आरोपों की पुष्टि करना है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस पत्र भेजने वाले व्यक्ति तक पहुंचने के साथ-साथ नामजद आरोपियों की भूमिका और कथित साजिश से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। जांच से मिलने वाले साक्ष्यों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विधायक को निशाना बनाने की वास्तविक योजना थी या फिर गुमनाम पत्र के माध्यम से दहशत पैदा करने की कोशिश की गई है।