Bihar: भूमि विवाद के निपटारे के लिए बिहार सरकार की बड़ी तैयारी; अब प्रमंडलों में पीठासीन पदाधिकारी
बिहार में सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने भूमि-अर्जन मामलों के निष्पादन में तेजी लाने और प्रभावित लोगों को समय से न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने इस मामले में बड़ी जानकारी दी है। आइये जानते हैं पूरी बात...
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बिहार में भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। विभाग ने राज्य के सभी नौ प्रमंडलीय मुख्यालयों में संचालित भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरणों के लिए नए पीठासीन पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, दरभंगा, भागलपुर, मुंगेर, पूर्णिया, गया और कोशी (सहरसा) प्रमंडल स्थित प्राधिकरणों में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायिक अधिकारियों को पीठासीन पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित किया गया है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण और मुआवजा संबंधी मामलों के निस्तारण में तेजी लाना है।
जानिए किन्हें कहां की जिम्मेदारी मिली?
जारी अधिसूचना के अनुसार, अली अहमद (सेवानिवृत जिला एवं सत्र न्यायधीश) को मुजफ्फरपुर, सम्पूर्णानंद तिवारी (सेवानिवृत अध्यक्ष राज्य परिवहन अपीलीय प्राधिकार) को सारण, देवराज त्रिपाठी (सेवानिवृत जिला एवं सत्र न्यायधीश) को दरभंगा, विजय आनंद तिवारी (सेवानिवृत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश) को भागलपुर, विनोद कुमार तिवारी (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश) को गया, राकेश मालवीय (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश) को मुंगेर, राधे श्याम शुक्ला (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश) को पूर्णिया, हसमुद्दीन अंसारी (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश) को कोसी (सहरसा) और हेमंत कुमार त्रिपाठी (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायधीश) को पटना प्रमंडल के भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में पीठासीन पदाधिकारी बनाया गया है।
सात दिनों के अंदर योगदान देने का निर्देश
मंत्री ने बताया कि सभी पीठासीन पदाधिकारियों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, रहेगा। सभी अधिकारियों को नियुक्ति पत्र मिलने के सात दिनों के भीतर संबंधित कार्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि नए पीठासीन पदाधिकारियों को भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े विवादों की सुनवाई, मुआवजा संबंधी दावों का निस्तारण तथा अधिनियम के तहत संदर्भित मामलों में निर्णय लेने का अधिकार होगा। विभाग का मानना है कि इन नियुक्तियों से भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और प्रभावित लोगों को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।