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Bihar: जांच के बीच IAS विदेश कैसे गए? सांसद का बड़ा सवाल; कहा- बोर्ड का बजट 70 गुना करने की जांच करे एजेंसी
Mon, 29 Jun 2026 02:22 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Mon, 29 Jun 2026 02:22 PM IST
सार
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के वर्ष 2017 से अब तक के वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की जांच की मांग की। उन्होंने बोर्ड के बजट में 10 करोड़ से 700 करोड़ रुपये तक हुई वृद्धि, परीक्षा से जुड़े ठेकों और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की विदेश यात्रा पर सवाल उठाए।
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सांसद सुधाकर सिंह
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की पार्टी से सांसद बने सुधाकर सिंह ने आज एक बार फिर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर निशाना साधा। सोमवार दोपहर उन्होंने पटना में प्रेस वार्ता की। उन्होंने बिहार बोर्ड, री-नीट एग्जाम समेत कई मुद्दों को उठाया। बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) में वर्ष 2017 से अब तक हुए प्रशासनिक, वित्तीय और संविदा संबंधी फैसलों की व्यापक जांच की मांग उठाई है। आरोप लगाया कि परीक्षा समिति में करोड़ों रुपये के कार्यों, संविदा नियुक्तियों, परीक्षा संचालन और विभिन्न कंपनियों को दिए गए ठेकों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है तो बड़े अधिकारियों और निर्णय लेने वाले जिम्मेदार लोगों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
संविदा संबंधी अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं- सुधाकर सिंह
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का वार्षिक बजट वर्ष 2017 से पहले लगभग 10 करोड़ रुपये था, जो बाद में बढ़कर करीब 700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि किन मदों में खर्च की गई, उसका वित्तीय सत्यापन किसने किया और अब तक उसकी स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2017 से अब तक के सभी ऑडिट, भुगतान विवरण, निविदा दस्तावेज और संविदा संबंधी अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं।
कंपनियों के चयन पर भी सवाल उठाए
सुधाकर सिंह ने परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियों के चयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसटीईटी, D.El.Ed., CBT सहित अन्य परीक्षाओं के संचालन के लिए Innovative View, TCS iON और बेल्ट्रॉन जैसी एजेंसियों के साथ लगातार काम किया गया। उनका आरोप है कि कई मामलों में उपलब्ध कराए गए अभ्यर्थियों की संख्या और कंपनियों के दावों के आधार पर भुगतान किया गया तथा बिना स्वतंत्र वित्तीय सत्यापन के करोड़ों रुपये के बिल पास किए गए। उन्होंने पूछा कि संवेदनशील कार्यों के लिए कंपनियों का चयन किन मानकों पर किया गया।
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फर्जी अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी के मामले पर भी सरकार को घेरा
सांसद ने हाल में री-नीट परीक्षा के दौरान फर्जी अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी के मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी के बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल हुआ, उसके कामकाज और उससे जुड़े लोगों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी कंपनी का नाम पहले से जांच के दायरे में रहा है तो उसके सरकारी कार्यों की समीक्षा आवश्यक है।
आईएएस अधिकारी आनंद किशोर की भूमिका पर भी सवाल उठाए
सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रवर्तन निदेशालय किसी मामले में जांच कर रहा है तो यह स्पष्ट किया जाए कि जांच अवधि के दौरान उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई। उन्होंने यह भी मांग की कि उनकी विदेश यात्राओं, यात्रा के उद्देश्य और संबंधित स्वीकृतियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि वित्त विभाग के प्रधान सचिव पद से उन्हें हटाने और बाद में दूसरे महत्वपूर्ण विभाग में तैनाती के पीछे क्या कारण थे।
जांच एजेंसियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों के लिए जिम्मेदार कई अधिकारी अब तक जांच के दायरे से बाहर हैं, जबकि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने फाइलों पर स्वीकृति दी या वित्तीय प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सुधाकर सिंह ने तारणी प्रसाद को दिए गए सेवा विस्तार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि पहले चारा घोटाले से जुड़े मामलों में सेवा विस्तार को लेकर न्यायिक प्रक्रिया चल चुकी है, तो यह स्पष्ट किया जाए कि तारणी प्रसाद को सेवा विस्तार किसके आदेश पर दिया गया और इस मामले में जांच एजेंसियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है।
ये भी पढ़ें- Bihar: बिहार में कानून व्यवस्था तार-तार, डबल मर्डर के गवाह की सरेआम गोली मारकर हत्या; छपरा में भारी बवाल
राजद सांसद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती है तो उसे छोटे और बड़े सभी स्तरों पर समान रूप से जांच करनी होगी। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2017 से अब तक बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सभी वित्तीय लेन-देन, संविदा नियुक्तियों, निविदाओं, परीक्षा संचालन, बायोमेट्रिक कार्यों और आईटी परियोजनाओं की समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही सभी ऑडिट रिपोर्ट और अभिलेख सार्वजनिक करें। सुधाकर सिंह ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसी भी तरह का भ्रम नहीं फैलाएं। अधिकारियों को बचाने की कोशिश नहीं करें। न्यायिक जांच करवाई ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
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संविदा संबंधी अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं- सुधाकर सिंह
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का वार्षिक बजट वर्ष 2017 से पहले लगभग 10 करोड़ रुपये था, जो बाद में बढ़कर करीब 700 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि किन मदों में खर्च की गई, उसका वित्तीय सत्यापन किसने किया और अब तक उसकी स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2017 से अब तक के सभी ऑडिट, भुगतान विवरण, निविदा दस्तावेज और संविदा संबंधी अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं।
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कंपनियों के चयन पर भी सवाल उठाए
सुधाकर सिंह ने परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियों के चयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसटीईटी, D.El.Ed., CBT सहित अन्य परीक्षाओं के संचालन के लिए Innovative View, TCS iON और बेल्ट्रॉन जैसी एजेंसियों के साथ लगातार काम किया गया। उनका आरोप है कि कई मामलों में उपलब्ध कराए गए अभ्यर्थियों की संख्या और कंपनियों के दावों के आधार पर भुगतान किया गया तथा बिना स्वतंत्र वित्तीय सत्यापन के करोड़ों रुपये के बिल पास किए गए। उन्होंने पूछा कि संवेदनशील कार्यों के लिए कंपनियों का चयन किन मानकों पर किया गया।
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फर्जी अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी के मामले पर भी सरकार को घेरा
सांसद ने हाल में री-नीट परीक्षा के दौरान फर्जी अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी के मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जिस कंपनी के बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल हुआ, उसके कामकाज और उससे जुड़े लोगों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी कंपनी का नाम पहले से जांच के दायरे में रहा है तो उसके सरकारी कार्यों की समीक्षा आवश्यक है।
आईएएस अधिकारी आनंद किशोर की भूमिका पर भी सवाल उठाए
सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रवर्तन निदेशालय किसी मामले में जांच कर रहा है तो यह स्पष्ट किया जाए कि जांच अवधि के दौरान उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई। उन्होंने यह भी मांग की कि उनकी विदेश यात्राओं, यात्रा के उद्देश्य और संबंधित स्वीकृतियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि वित्त विभाग के प्रधान सचिव पद से उन्हें हटाने और बाद में दूसरे महत्वपूर्ण विभाग में तैनाती के पीछे क्या कारण थे।
जांच एजेंसियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों के लिए जिम्मेदार कई अधिकारी अब तक जांच के दायरे से बाहर हैं, जबकि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने फाइलों पर स्वीकृति दी या वित्तीय प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सुधाकर सिंह ने तारणी प्रसाद को दिए गए सेवा विस्तार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि पहले चारा घोटाले से जुड़े मामलों में सेवा विस्तार को लेकर न्यायिक प्रक्रिया चल चुकी है, तो यह स्पष्ट किया जाए कि तारणी प्रसाद को सेवा विस्तार किसके आदेश पर दिया गया और इस मामले में जांच एजेंसियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है।
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राजद सांसद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती है तो उसे छोटे और बड़े सभी स्तरों पर समान रूप से जांच करनी होगी। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2017 से अब तक बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सभी वित्तीय लेन-देन, संविदा नियुक्तियों, निविदाओं, परीक्षा संचालन, बायोमेट्रिक कार्यों और आईटी परियोजनाओं की समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही सभी ऑडिट रिपोर्ट और अभिलेख सार्वजनिक करें। सुधाकर सिंह ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसी भी तरह का भ्रम नहीं फैलाएं। अधिकारियों को बचाने की कोशिश नहीं करें। न्यायिक जांच करवाई ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।