फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Patna News ›   bihar jeevika didi 203 rural haat market goat rearing scheme women empowerment rural development

Bihar: जीविका दीदियों की बदलेगी तकदीर! बिहार में बनेंगे 203 मेगा ग्रामीण हाट, अब मिलेगा अपना स्थायी बाजार

Tue, 04 Aug 2026 10:47 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Tue, 04 Aug 2026 10:47 PM IST
सार

बिहार सरकार ने जीविका दीदियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्यभर में 203 ग्रामीण हाट विकसित किए जाएंगे, जहां जीविका समूहों के सभी उत्पाद एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। इन हाटों में आधुनिक सुविधाएं होंगी और नाबार्ड के सहयोग से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

विज्ञापन
bihar jeevika didi 203 rural haat market goat rearing scheme women empowerment rural development
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में जीविका दीदियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए अब अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार ने जीविका दीदियों के उत्पादों की बिक्री और विपणन के लिए राज्यभर में 203 ग्रामीण हाट विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन हाटों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और एक ही स्थान पर जीविका समूहों के उत्पादों की बिक्री होगी। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने समीक्षा बैठक में इस योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन


203 ग्रामीण हाटों के निर्माण की तैयारी पूरी

ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने मंगलवार को पुराने सचिवालय स्थित ग्रामीण विकास मंत्री कार्यालय में जीविका और वीबी-जीरामजी योजना की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि राज्यभर में 203 स्थानों का चयन ग्रामीण हाट निर्माण के लिए किया गया है। नालंदा समेत कुछ अन्य जिलों से अंतिम स्तर के प्रस्ताव भी प्राप्त हो चुके हैं। हाट निर्माण के लिए स्थानों के चयन का कार्य पूरा कर लिया गया है।
विज्ञापन


एक ही छत के नीचे बिकेंगे जीविका दीदियों के उत्पाद

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी ग्रामीण हाटों में जीविका दीदियों के उत्पादों की बिक्री और विपणन की व्यवस्था एक ही छत के नीचे की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जीविका दीदियों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले पोशाकों की आपूर्ति लगातार जारी रहे और इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीण हाटों में होंगी आधुनिक सुविधाएं

सरकार की योजना के अनुसार इन ग्रामीण हाटों में भंडारण कक्ष, दुकानें, बिक्री के लिए शेडयुक्त चबूतरे, शौचालय और आधुनिक सुविधाओं से लैस कार्यालय बनाए जाएंगे। पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के लिए मॉडल डीपीआर तैयार कर लिया गया है। जल्द ही चिन्हित स्थानों पर निर्माण कार्य शुरू होगा। इस परियोजना में नाबार्ड का भी सहयोग लिया जाएगा।

नालंदा से सबसे पहले मिला प्रस्ताव

बैठक में जानकारी दी गई कि ग्रामीण हाट निर्माण के लिए सबसे पहले नालंदा जिले से प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नालंदा में तत्काल कार्य शुरू किया जाए और जिन जिलों से अभी तक प्रस्ताव नहीं मिले हैं, उनकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इन हाटों के निर्माण से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। जीविका दीदियों को अपने उत्पादों के लिए स्थायी बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

जीविका दीदियों के रोजगार पर विशेष फोकस

बैठक में जीविका दीदियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बकरी पालन को विशेष बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि जमुनापारी नस्ल की बकरी पालन को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह नस्ल अधिक दूध देती है और इसका मांस भी काफी लोकप्रिय है। विशेष रूप से पश्चिम चंपारण क्षेत्र में इसकी अच्छी मांग है।

थारू समाज को मिलेगा प्राथमिकता

बकरी पालन को रोजगार से जोड़ने के लिए चंपारण, बांका, जमुई, मुंगेर, शेखपुरा, नवादा, नालंदा, गया, औरंगाबाद तथा कैमूर जिलों में उत्पादन समूह बनाकर महिलाओं को इससे जोड़ा जाएगा। मंत्री ने विशेष निर्देश दिया कि चंपारण के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले थारू आदिवासी समाज को इस योजना में प्राथमिकता दी जाए।

बकरी के दूध की प्रोसेसिंग की भी होगी व्यवस्था

सरकार बकरी के दूध की प्रोसेसिंग की व्यवस्था भी विकसित करेगी, ताकि गाय और भैंस के दूध की तरह इसकी भी आसान उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। चंपारण मीट की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्नत बकरी पालन योजना को समूह आधारित मॉडल पर संचालित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि बकरी का दूध पौष्टिक होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।

नाबार्ड और पशुपालन विभाग के साथ होगा समन्वय

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बकरी पालन से लेकर दूध की आपूर्ति तक की पूरी व्यवस्था को तेजी से विस्तार दिया जाए। उन्होंने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नाबार्ड और पशुपालन विभाग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए।


पोशाक आपूर्ति की भी हुई समीक्षा

बैठक में जीविका दीदियों द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए तैयार किए जाने वाले पोशाकों की सिलाई और पर्याप्त आपूर्ति की भी समीक्षा की गई। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, जीविका के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिमांशु शर्मा, मंत्री के आप्त सचिव सुनील कुमार, अपर मनरेगा आयुक्त संजय सिंह, विनय कुमार समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed