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Padma Awards 2026 : विश्व बंधु समेत बिहार की तीन विभूतियों ने बढ़ाया मान, लोक कला से लेकर कृषि तक बिखेरी चमक
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Sun, 25 Jan 2026 08:32 PM IST
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सार
Bihar : बिहार के तीन हस्तिययों को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस बात की घोषणा की है। पद्मश्री से सम्मानित होने वालों में भरत सिंह भारती, विश्वबंधु और गोपाल जी त्रिवेदी शामिल हैं।
पद्म श्री से होंगे सम्मानित स्व. विश्व बंधु भरत सिंह भारती और डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यहाँ की मिट्टी में प्रतिभा और तपस्या का अनूठा संगम है। लोक कला को अंतरराष्ट्रीय मंच देने वाले पद्म श्री विश्व बंधु, भोजपुरी गीतों के पर्याय भरत सिंह भारती और कृषि जगत के भीष्म पितामह डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी ने अपने-अपने क्षेत्रों में सेवा और समर्पण की नई इबारत लिखी है।
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लोक संस्कृति के पुरोधा विश्व बंधु को मरणोपरांत मिला पद्म श्री का सम्मान
बिहार की विलुप्त होती लोक गाथाओं को नया जीवन देने वाले सुप्रसिद्ध लोक नर्तक और गुरु विश्व बंधु को साल 2026 के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। हालांकि, इस सम्मान की घोषणा के बीच एक दुखद खबर यह रही कि 95 वर्ष की आयु में 30 मार्च 2025 को दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली। विश्व बंधु ने अपना पहला कार्यक्रम मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समक्ष किया था। 1962 के कांग्रेस अधिवेशन में उनकी नृत्य नाटिका 'ये भारत के गांव' देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी उनके कायल हो गए थे। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उन्होंने 'ई हमर हिमालय' नृत्य नाटिका के जरिए पूरे देश में जन जागृति का शंखनाद किया था। उन्होंने 1959 में सांस्कृतिक संस्था 'सुरांगन' की स्थापना की। डोमकच नृत्य और लोक शैलियों को बचाए रखने के लिए उन्होंने देश-विदेश में 6 हजार से अधिक प्रस्तुतियां दीं। उन्हें पूर्व में संगीत नाटक अकादमी का टैगोर अकादमी पुरस्कार और बिहार सरकार का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी मिल चुका है।
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भोजपुरी लोकगीतों के वैश्विक दूत भरत सिंह भारती
भोजपुरी लोकगीतों की मिठास को सात समंदर पार मॉरिशस तक पहुँचाने का श्रेय भरत सिंह भारती को जाता है। 1962 से ही आकाशवाणी पटना से जुड़े भारती ने अपनी जादुई आवाज से पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है। उन्होंने अपनी टीम के साथ मॉरिशस में 35 से ज्यादा सफल कार्यक्रम कर भोजपुरी को विश्व पटल पर स्थापित किया। आकाशवाणी और दूरदर्शन के माध्यम से उन्होंने लोक संगीत को घर-घर पहुँचाया। उनकी इसी साधना को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें कला के क्षेत्र में विशेष रूप से सम्मानित किया है।
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खेतों में विज्ञान उगाने वाले तपस्वी डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी
मुजफ्फरपुर के मतलुपुर के रहने वाले डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी बिहार के कृषि जगत का एक बड़ा नाम हैं। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के पूर्व कुलपति रहे डॉ. त्रिवेदी ने रिटायरमेंट के बाद भी खुद को कमरे तक सीमित नहीं रखा। वे आज भी गांव में रहकर खुद खेती करते हैं और किसानों को मॉडल फार्मिंग सिखाते हैं। उन्होंने तालाबों को एकीकृत खेती में बदलकर किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता दिखाया है। मक्का और चना जैसी फसलों की उन्नत तकनीक और विज्ञान आधारित कृषि पर उनके लेख और व्याख्यान आज भी नीति निर्माताओं और किसानों के लिए पथ-प्रदर्शक बने हुए हैं।
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