Bihar News: रिशुश्री केस में 15 कंपनियों की कुंडली खंगालने में जुटी सरकारी एजेंसियां, जानिए पूरा मामला
ईडी और एसवीयू को रिशुश्री के खिलाफ जो साक्ष्य मिले, उसके आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। दोनों एजेंसियों की जांच के बाद घोटाले में रिशुश्री का साथ देने में जो लोग शामिल हैं, उन पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। जांच एजेंसियां कंपनियों की कुंडली भी खंगाल रही है।
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बिहार का चर्चित ठेकेदार रिशुश्री केस में सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। दो आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर के निलंबन के बाद अब जांच एजेंसियों की रडार पर रिशुश्री की कंपनी समेत कुल 15 कंपनियां हैं। इन कंपनियों के तार भी रिशुश्री केस से जुड़े हैं। इनके कुंडली खंगाले जा रहे हैं। क्यों कि पिछले 10 साल में इन कंपनियों ने बुडको से टेंडर लिए हैं। इनमें रिशुश्री की भी कंपनी है। आरोप है कि टेंडर लेने में घोटाला हुआ है। कहानी की शुरुआत तब होती है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिशुश्री के ठिकाने पर छापेमारी की थी। इसके बाद केस दर्ज कर मामले की जांच में जुट थी।
इन कंपनियों ने 2016 से लेकर अब तक बुडको का टेंडर लिया
उस वक्त ईडी ने नगर विकास विभाग से बुडको (बिहार शहरी अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड) से रिशुश्री की कंपनी रिलायबल इंटरप्राइजेज समेत 15 कंपनियों की पूरी जानकारी मांगी गई थी। बुडको ने इन कंपनियों को टेंडर दिए थे। अब स्पेशल विजिलेंस की टीम इस मामले की फिर से जांच कर रही है। साथ ही इन 15 कंपनियों की कुंडली खंगालने में जुटी है। इन कंपनियों में अर्बन एनवायर्नमेंटल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, साईं आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीताश्री एंटरप्राइजेज, जैनम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, ईएमएस इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, ऑर्गेनिका प्राइवेट लिमिटेड, ऑर्गेनिका 121 प्राइवेट लिमिटेड, जेएम एनवायरो प्राइवेट लिमिटेड, वीए टेक वबाग प्राइवेट लिमिटेड, तोशिबा वाटर सॉल्यूशंस, केवड़िया कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रिलायबल एंटरप्राइजेज, रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, श्री नेस्टबिल्ड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, भुगन इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों ने 2016 से लेकर अब तक बुडको का टेंडर लिया है।
रिशुश्री के ठिकाने पर हुई छापेमारी
दरअसल, बुधवार को पटना में स्पेशल विजिलेंस की टीम ने ठेकेदार रिशु श्री के ठिकानों पर घंटों तक छापेमारी की थी। जांच में रिशुश्री के नाम पर कई अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ था। इस दौरान टीम को फ्लैट से लगभग दो करोड़ के कीमती आभूषण बरामद हुए हैं। साथ ही 2.5 लाख नकद भी मिले हैं। इसके अलावा कई प्रॉपर्टी के कागजात, जरूरी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच चल रही है। इतना ही नहीं टीम को कई ऐसे साक्ष्य मिले, जिससे स्पष्ट हुआ कि रिशुश्री ने अपनी काली कमाई का साम्राज्य कुछ आईएएस अधिकारियों की मदद से खड़ा किया है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी विभागों में टेंडर दिलाने और ठेकों के बदले अफसरों और ठेकेदारों के बीच सांठगांठ का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
सीधे आईएएस अधिकारियों से बनाता था संबंध
जांच में यह भी पता चला है कि रिशुश्री के संबंध कई आईएएस अधिकारियों के साथ रहे हैं, जिनमें संजीव हंस का नाम भी चर्चा में पहले से ही है। हालांकि, इस बात की पुष्टि के संबंध में विशेष निगरानी इकाई की टीम का कहना है कि इस बिंदु पर फिलहाल जांच की जा रही है। चर्चा यह भी है कि रिशु श्री सीधे आईएएस अधिकारियों से ही बात करता था और फिर अपने अनुरूप काम करता भी था और काम करवाता भी था। जांच में सामने आया है कि रिशुश्री का सरकारी विभागों में नीचे से लेकर ऊपर तक एक मजबूत नेटवर्क था। वह छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक को मोटी रिश्वत देकर पूरा सिस्टम 'सेट' करता था। मनचाही कंपनियों को टेंडर दिलाने के बदले आठ से दस फीसदी तक कमीशन लिया जाता था, जो कई अधिकारियों में बंटता था। सरकारी योजनाओं में जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर बजट पास कराया जाता था और फर्जी बिलों के जरिए सरकारी पैसे का गबन होता था। रिशुश्री खुद भी अपनी छह से सात फर्जी कंपनियों के नाम पर सरकारी काम लेता था। टीम को यह भी पता चला है कि रिशुश्री टेंडर मैनेज करने के बदले अधिकारियों को महंगे तोहफे और सुविधाएं देता था। कुछ अधिकारियों को उसके खर्चे पर विदेश यात्राएं भी कराई गई थीं।