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Bihar: कैमूर से महा परिवर्तन आंदोलन का आगाज, पूर्व IPS विनय कुमार बोले- पंचायत चुनाव में उतरेंगे बेदाग मुखिया
Sat, 11 Jul 2026 01:41 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कैमूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कैमूर
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 01:41 PM IST
सार
बिहार के पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं उत्तराखंड हाईकोर्ट की जेल सुधार समिति के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कैमूर से महा परिवर्तन आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में ईमानदार और बेदाग छवि वाले मुखिया उम्मीदवारों को उतारेगी।
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पूर्व आईपीएस विनय कुमार सिंह ने कैमूर से 'महा परिवर्तन आंदोलन' की शुरुआत के लिए एलान किया
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बिहार के पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं वर्तमान में उत्तराखंड हाईकोर्ट की जेल सुधार समिति के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कैमूर से 'महा परिवर्तन आंदोलन' की शुरुआत करते हुए पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था आगामी पंचायत चुनाव में ईमानदार और बेदाग छवि वाले मुखिया उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारेगी।
पूर्व आईपीएस विनय कुमार सिंह बोले- 77 साल बाद भी अपेक्षित बिहार
पूर्व आईपीएस विनय कुमार सिंह ने कहा कि आजादी के 77 वर्ष बाद भी बिहार अपेक्षित विकास नहीं कर सका। उनका दावा था कि 40 वर्ष गरीबों की सरकार, 15 वर्ष सामाजिक न्याय और 20 वर्ष सुशासन के बावजूद राज्य विकास के कई मानकों पर पिछड़ा हुआ है। इसके लिए उन्होंने राजनीतिक दलों की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया।
छह नक्सल प्रभावित जिलों से होगी शुरुआत
विनय कुमार सिंह ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत बिहार के नक्सल प्रभावित छह जिलों गया, औरंगाबाद, कैमूर, आरा, अरवल और जहानाबाद से की जाएगी। इसके तहत प्रखंड और पंचायत स्तर पर तीन-तीन सदस्यों की समितियां गठित होंगी, जो बेदाग छवि वाले मुखिया उम्मीदवारों का चयन करेंगी।
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ये भी पढ़ें- सिर्फ सीट भरने नहीं, जनता की लड़ाई लड़ने पहुंचे हैं विधायक'; गयाजी में सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा संदेश
विकास के लिए दिए पांच सूत्र
पूर्व आईपीएस ने पंचायतों के विकास के लिए पांच प्रमुख सूत्र भी प्रस्तुत किए। इनमें गांव के विवादों का गांव में समाधान, नेतरहाट मॉडल की तर्ज पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ गांव, भ्रष्टाचार पर रोक और बेदाग छवि के आधार पर मुखिया का चयन शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई लोग विकास के बजाय योजनाओं में भ्रष्टाचार के उद्देश्य से मुखिया बनना चाहते हैं, जिससे पंचायत व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि यदि ईमानदार नेतृत्व को बढ़ावा मिले तो गांवों के साथ-साथ बिहार के विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।
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पूर्व आईपीएस विनय कुमार सिंह बोले- 77 साल बाद भी अपेक्षित बिहार
पूर्व आईपीएस विनय कुमार सिंह ने कहा कि आजादी के 77 वर्ष बाद भी बिहार अपेक्षित विकास नहीं कर सका। उनका दावा था कि 40 वर्ष गरीबों की सरकार, 15 वर्ष सामाजिक न्याय और 20 वर्ष सुशासन के बावजूद राज्य विकास के कई मानकों पर पिछड़ा हुआ है। इसके लिए उन्होंने राजनीतिक दलों की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया।
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छह नक्सल प्रभावित जिलों से होगी शुरुआत
विनय कुमार सिंह ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत बिहार के नक्सल प्रभावित छह जिलों गया, औरंगाबाद, कैमूर, आरा, अरवल और जहानाबाद से की जाएगी। इसके तहत प्रखंड और पंचायत स्तर पर तीन-तीन सदस्यों की समितियां गठित होंगी, जो बेदाग छवि वाले मुखिया उम्मीदवारों का चयन करेंगी।
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विकास के लिए दिए पांच सूत्र
पूर्व आईपीएस ने पंचायतों के विकास के लिए पांच प्रमुख सूत्र भी प्रस्तुत किए। इनमें गांव के विवादों का गांव में समाधान, नेतरहाट मॉडल की तर्ज पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ गांव, भ्रष्टाचार पर रोक और बेदाग छवि के आधार पर मुखिया का चयन शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई लोग विकास के बजाय योजनाओं में भ्रष्टाचार के उद्देश्य से मुखिया बनना चाहते हैं, जिससे पंचायत व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि यदि ईमानदार नेतृत्व को बढ़ावा मिले तो गांवों के साथ-साथ बिहार के विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।