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Bihar Politics: अब दीपक प्रकाश के लिए किस सीट पर होगा खेला? उपेंद्र कुशवाहा ने दिल्ली जाकर क्या किया?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Wed, 10 Jun 2026 04:43 PM IST
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सार
बिहार में पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। उनके पिता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने काफी कोशिश की लेकिन फिलहाल सफल नहीं हो पाएं। इसके बाद वह दिल्ली गए। दिल्ली में मीटिंग के बाद उनके पास क्या-क्या विकल्प बचे? दीपक प्रकाश का क्या होगा? आइये जानते हैं?
मंत्री दीपक प्रकाश और सांसद उपेंद्र कुशवाहा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से मंत्री बनाए गए दीपक प्रकाश को लेकर ऊहापोह की स्थिति अब तक बनी हुई है। नियम के अनुसार, दीपक प्रकाश छह नवंबर तक आराम से मंत्री रह सकते हैं। इसके बाद अगर वह किसी भी सदन के सदस्य रहते हैं तो वह मंत्री बने रहेंगे। अगर सदस्य नहीं रहे तो मंत्री पद का त्याग करना होगा। इधर, दीपक प्रकाश को मंत्री बनाने के लिए उनके पिता और रालोमो के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के नाम पर गए थे। लेकिन, अंतिम मकसद भाजपा के आलाकमान से मिलकर दीपक प्रकाश के लिए बातचीत करना था। वह भाजपा के ऊपर जिस तरह का दबाव बनाना चाहते थे, उसमें कुछ हद तक कामयाब रहे। अब उपेंद्र कुशवाहा के पास पांच विकल्प ही बचे हैं। पहला अपने चार में से किसी एक विधायक का इस्तीफा करवाकर उनकी जगह चुनाव लड़वाना। दूसरा मंत्री ही बदल देना। यानी दीपक प्रकाश से मंत्री पद लेकर अपने चार में से किसी एक को मंत्री बना देना। तीसरा नवंबर के बाद भाजपा से जिसका विधान परिषद् कार्यकाल खत्म हो रहा है, उसमें से किसी एक की सीट पर दीपक प्रकाश की एंट्री करवाना। चौथा विकल्प भाजपा से बांकीपुर सीट लेकर दीपक प्रकाश उपचुनाव में उतारना। पांचवा विकल्प है कि बगावत कर देना। हालांकि, फिलहाल जो परिदृश्य निकलकर सामने आई, उसमें ऐसा नहीं लग रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा बगावत करेंगे।
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उपेंद्र कुशवाहा का क्या कहना है वह जानिए
राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ पूरी प्रतिबद्धता के साथ जुड़े हुए हैं और आगे भी गठबंधन का हिस्सा बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, तब उनके समर्थन में सबसे पहले आवाज उठाने वालों में वह भी शामिल थे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी और भाजपा के बीच वैचारिक समानता नहीं है। कुशवाहा के अनुसार, उनकी राजनीतिक सोच और मूल विचारधारा जनता दल (यूनाइटेड) के अधिक करीब है। उन्होंने याद दिलाया कि वह समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं, जो बाद में जनता दल यूनाईटेड के रूप में विकसित हुई। उनकी वैचारिक निष्ठा और भावनात्मक जुड़ाव आज भी उसी राजनीतिक धारा के साथ बना हुआ है।
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नवंबर में विधान परिषद् की कौन सी सीट खाली हो रही?
इधर, नवंबर में विधान परिषद् की आठ सीटें खाली हो रही है। हालांकि, यह सभी सीटें स्नातक और शिक्षक निर्वाचन वाली हैं। इसमें दीपक प्रकाश के लिए संभावना कम है। भाजपा से नवल किशोर यादव (शिक्षक, पटना), डॉ. एनके यादव (स्नातक, कोशी), जदयू के नीरज कुमार (स्नातक, तिरहुत), कांग्रेस के डॉ. मदन मोहन झा (शिक्षक, दरभंगा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रो संजय कुमार सिंह (शिक्षक तिरहुत), निर्दलीय सर्वेश कुमार (स्नातक, दरभंगा) और आफाक अहमद (शिक्षक सारण) की सीटें आठ सीटें नवंबर में खाली हो रही है। इसके बाद मार्च में राज्यपाल के कोटे से कुछ सीटों पर सदस्यों का मनोनयन होना है। अगर बांकीपुर सीट या ऊपर बताए गए विकल्पों को कुशवाहा नहीं चुनते हैं तो उनके पास एक उम्मीद यही रहेगी कि कुछ मार्च दीपक प्रकाश को आराम देकर अपनी पार्टी के किसी विधायक को मंत्री बनाएं और मार्च में दीपक प्रकाश विधान परिषद् सदस्य के लिए मनोनित करवाने की कोशिश करें।