Bihar : हाथीपांव पर बिहार को क्या मिली उपलब्धि? UN-WHO को लेकर संजय झा ने नीतीश का योगदान याद किया
लिम्फेटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन अभियान में बिहार को बड़ी सफलता मिली है। UN और WHO ने राज्य की सराहना की है। पहली बार अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों ने TAS-1 सर्वे पास किया है, जिसके बाद इन जिलों में दवा वितरण अभियान बंद कर निगरानी चरण शुरू होगा।
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संजय झा ने नीतीश कुमार को सराहा
इस उपलब्धि के लिए जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने नीतीश कुमार को सराहा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह सफलता जनप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के कुशल नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा पिछले दो दशकों में हर प्रखंड में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को निरंतर मजबूत करने के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने के सुनियोजित प्रयासों का परिणाम है।
सामूहिक प्रयासों का सुखद परिणाम
आगे उन्होंने लिखा कि सरकार द्वारा 'डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट' (DOT) के तहत यह सुनिश्चित किया गया कि दवाएं केवल बांटी न जाएं, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में ही खाई जाएं। इससे फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रमों के तहत केवल 'दवा वितरण' नहीं किया गया, बल्कि उसे 'वास्तविक उपचार कवरेज' में बदला गया। इस तरह यह उपलब्धि सरकार के साथ-साथ बिहार के लाखों स्वास्थ्यकर्मियों, आशा दीदियों और जागरूक जनता के सामूहिक प्रयासों के कारण सुखद परिणाम है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा बिहार को लिम्फेटिक फाइलेरिया (LF/ हाथीपांव) उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सराहा जाना पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है।
इस साल पहली बार बिहार के तीन जिलों (अररिया, मधेपुरा और सुपौल) ने ट्रांसमिशन असेसमेंट…— Sanjay Kumar Jha (@SanjayJhaBihar) July 7, 2026
संजय कुमार झा ने आगे लिखा कि हमें प्रसन्नता है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में माननीय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा किये गए कार्यों की विरासत को आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य के सभी जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के अस्पतालों में जरूरी स्वास्थ्य सुविधा पूरी गुणवत्ता के साथ उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार तत्परता से काम कर रही है। इससे बिहार के आम लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या मेडिकल कॉलेजों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कुल मिलाकर, आज यह विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि बिहार आने वाले दिनों में भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करता रहेगा।
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