Patna: ड्रीम प्रोजेक्ट के लेट होने पर भड़के CM नीतीश, अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम
Patna: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को बख्तियारपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज, आरओबी और ताजपुर-करजान फोरलेन परियोजना का निरीक्षण किया और अधूरे काम को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई। मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाला ताजपुर-करजान पथ कई बार डेडलाइन पार कर चुका है।
विस्तार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को बख्तियारपुर स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए बनाए जा रहे आरओबी और करजान-ताजपुर पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने बख्तियारपुर में अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि आरओबी का अधूरा काम जल्द पूरा कीजिए। इस पर अधिकारियों ने हाथ जोड़कर उन्हें एक महीने में काम पूरा करने का आश्वासन दिया। वहीं करजान-ताजपुर फोरलेन का निरीक्षण करने के दौरान उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
लोगों से मिले मुख्यमंत्री
सुरक्षा अधिकारी तब हैरान रह गए, जब मुख्यमंत्री अचानक जनता से मिलने के लिए लोगों के बीच पहुंच गए। अथमलगोला में मुख्यमंत्री ने जनता से कहा कि जब इस पुल का निर्माण हो जाएगा तो इधर से उधर आने-जाने में लोगों को हर तरह से सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि यह काम बहुत पहले से चल रहा है, कई बार निरीक्षण कर चुके हैं और आज भी देखने आए हैं। करजान-ताजपुर प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। यहां वे अन्य अधिकारियों को निर्माण कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश देते भी दिखे।
ताजपुर-करजान पथ है सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट
दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट ताजपुर-करजान पथ अब तक कई डेडलाइन मिस कर चुका है। अब नया डेडलाइन 2027 का दिया गया है। अधिकारी 62 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग बताई जा रही है। पथ निर्माण विभाग ने भी कई बार निर्माण कंपनी को प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने की हिदायत दी है।
2011 में शुरू हुआ था काम
नवयुगा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 2011 में करजान-ताजपुर प्रोजेक्ट शुरू किया था। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को 2016 तक पूरा करने की समय-सीमा तय की थी। इस दौरान चार बार पुल निर्माण की अवधि बढ़ाई जा चुकी है। पहले मई 2016, फिर 2018, मार्च 2020 और अब मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन कई बार निर्माण के दौरान स्लैब गिर जाने और आर्थिक परेशानियों के कारण प्रोजेक्ट में लगातार विलंब होता गया।
कार्य में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं
मुख्यमंत्री कई बार इस ड्रीम प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने की हिदायत दे चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है। गंगा नदी पर करीब साढ़े पांच किलोमीटर के क्षेत्र में पुल बनना है, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक पिलर के ऊपर स्लैब तक नहीं रखा गया है।
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दोगुनी से ज्यादा हुई प्रोजेक्ट की लागत
इस दौरान प्रोजेक्ट की लागत 1604 करोड़ रुपये से बढ़कर 3923 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, लेकिन प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार के कारण इसके 2027 तक पूरा होने की उम्मीद भी कम ही नजर आती है। इस पथ की कुल लंबाई 51.26 किलोमीटर है। गंगा नदी पर 5.51 किलोमीटर लंबे पुल के साथ 45.75 किलोमीटर सड़क मार्ग का भी निर्माण होना है। इस प्रोजेक्ट के निर्माण से महात्मा गांधी सेतु और राजेंद्र सेतु पर यातायात का बोझ कम होगा तथा उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन में लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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