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Bihar News : आधारकार्ड में सुधार करवाने में लोगों के छूट रहे हैं पसीने, पटना जीपीओ में लग रही है रोज भीड़

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Thu, 19 Mar 2026 08:38 AM IST
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सार

Aadhaar cards : आधारकार्ड में सुधार करवाने में लोगों पसीने छूट रहे हैं। रोज बिहार के अलग-अलग कोने से लोग पटना जीपीओ आ रहे हैं, लेकिन उनकी परेशानी दूर नहीं हो रही है।

Crowds gathering to correct errors in Aadhaar cards GPO Patna Bihar News
रात से ही कर रहे हैं इंतजार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मैं पटना जीपीओ का अब तक तीन चक्कर मार चुका हूं। आज चौथी बार यहां आया हूं, लेकिन मेरा काम होगा या नहीं होगा,  इसको लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हूं। यह कहना है खगड़िया जिला के रहने वाले कमलाकांत राय का जो खुद सेवा निवृत फौजी हैं और लगातार पटना के जीपीओ में आ रहे हैंसेवा निवृत फौजी हूं। इसका कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि उनको पासपोर्ट बनवाना है। लेकिन उनके नाम में स्पेलिंग त्रुटि है, जिसका वह सुधार करवाना चाहते हैं। कमलाकांत राय ने बताया कि पहली बार जब वह जीपीओ आए तो पुराना निवास प्रमाण बताकर लौटा दिया। दूसरी बार आया तो आवासीय नहीं मांगकर बैंक पासबुक मांगा,  लेकिन उनलोगों ने उसे भी निरस्त कर दिया। अब तीसरी बार आया हूं, लेकिन मेरा काम होगा या नहीं होगा, यह पता नहीं है।

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हाजीपुर से आई संजना का कहना है कि मैं नवंबर में भी आई थी और इसके लिए तीन बजे लाइन में लगे थे। 8 बजे फॉर्म मिला और शाम के 5 बजे काम कराकर मैं यहां से गई थी। फिर उसे ललित भवन में फॉर्म को जमा किया, लेकिन फिर भी मेरा काम नहीं हुआ। ललित भवन में बोला गया कि सरकार का नियम बदल गया, फिर से जाईये और फिर से करवा कर लाईये।तो क्या छात्र छत्राओं के पास औरकोई काम नहीं है? बा स इसी काम में हमलोग दौड़ते रहें?   ने बताया लिमिट क्रॉस हो गया है जिसे अब सुधार करवाना है। अब सवाल यह है कि जब मेरे जिले में आधार कार्ड बन सकता है तो फिर सुधार क्यों नहीं हो सकता है ? यह सब सिस्टम का दोष है।
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बक्सर से आई एक छात्रा ने बताया कि मेरे आधार कार्ड का लिमिट पार कर गया है। इसको सही करवाने के लिए दो साल से घूम रहे हैं, लेकिन हो नहीं रहा है। सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि मैं दो साल से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फॉर्म नहीं भर पा रही हूं। इसके साथ-साथ मैं दो वर्षों से किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रही हूं, लेकिन इस सिस्टम को क्या कहा जाए। मैं बक्सर से दो साल से लगातार आ रही हूं, लेकिन कुछ भी नहीं हो पा रहा है।

ऐसी एक दो नहीं बल्कि कई कहानियां हैं, जो रोज वहां अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहती हैं, लेकिन समस्या जस की तस हैं। हालांकि, इस संबंध में डाक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं और लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त प्रयास भी किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक केंद्रों की संख्या और तकनीकी सुधार पर ध्यान नहीं दिया जाता, पटना जीपीओ की ये कतारें छोटी होने वाली नहीं हैं।
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