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Bihar News: नक्सलियों से मुठभेड़ में दिखाया साहस, IPS बाबू राम को मिला राष्ट्रपति वीरता पदक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Ashutosh Pratap Singh Updated Wed, 11 Mar 2026 04:13 PM IST
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सार

भुवनेश्वर में आयोजित सीआईएसएफ स्थापना दिवस समारोह में बिहार कैडर के 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी बाबू राम को राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया।

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IPS बाबू राम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के स्थापना दिवस समारोह में बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी बाबू राम को राष्ट्रपति का वीरता पदक प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें नक्सल विरोधी अभियान में दिखाए गए साहसिक नेतृत्व के लिए दिया गया। समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह पदक प्रदान किया।

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सीआईएसएफ स्थापना दिवस समारोह में मिला सम्मान

यह कार्यक्रम भुवनेश्वर के मुंडली परिसर में आयोजित किया गया था। सीआईएसएफ के स्थापना दिवस के अवसर पर देशभर से वरिष्ठ अधिकारी और जवान इस समारोह में शामिल हुए। इसी मंच पर आईपीएस बाबू राम को उनके साहसिक अभियान के लिए सम्मानित किया गया।

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2016 के नक्सल विरोधी अभियान से जुड़ा है सम्मान

यह सम्मान वर्ष 2016 में हुए एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान से जुड़ा हुआ है। उस समय बाबू राम बिहार के औरंगाबाद जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात थे। उस दौर में इलाके में नक्सली गतिविधियां लगातार बढ़ रही थीं। सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि गया और औरंगाबाद की सीमा से लगे घने जंगलों में नक्सलियों का जमावड़ा है। सूचना मिलने के बाद जिला पुलिस और कोबरा कमांडो की संयुक्त टीम तैयार की गई। इस अभियान का नेतृत्व एसपी बाबू राम ने किया। टीम ने लंगुराही और छकरबंधा के जंगलों की ओर बढ़ना शुरू किया। यह इलाका दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है।

लैंडमाइन विस्फोट और मुठभेड़

अभियान के दौरान डुमरी नाला के पास अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। नक्सलियों ने पहले से ही करीब एक किलोमीटर इलाके में लैंडमाइन बिछा रखी थी। लगातार हुए धमाकों से पीछे चल रही कोबरा की दो टुकड़ियों के कुछ जवान घायल हो गए और स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई।

विस्फोट के तुरंत बाद पहाड़ी की ऊंचाई पर छिपे नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। उस समय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती घायल जवानों को सुरक्षित निकालने और नक्सलियों का मुकाबला करने की थी।

बाबू राम ने संभाला मोर्चा

इस कठिन स्थिति में एसपी बाबू राम ने मौके पर मोर्चा संभाला। उन्होंने जवानों को स्थिति के अनुसार तैनात किया और जवाबी कार्रवाई शुरू करवाई। पुलिस और कोबरा कमांडो ने मिलकर नक्सलियों पर दबाव बनाया। मुठभेड़ कई घंटे तक चली और इस दौरान सुरक्षा बलों ने चार नक्सलियों को मार गिराया।
मौके से स्वचालित हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री भी बरामद की गई। इस कार्रवाई से नक्सलियों की घातक योजना विफल हो गई।

घायल जवानों को कंधों पर उठाकर निकाला

मुठभेड़ खत्म होने के बाद सबसे कठिन काम घायल जवानों को सुरक्षित बाहर निकालना था। जंगल का रास्ता बेहद कठिन था और वहां तक वाहन पहुंचना संभव नहीं था। ऐसे में टीम के जवानों ने अपने घायल साथियों को कंधों पर उठाया।करीब आठ घंटे तक पैदल चलकर उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। पूरी रात यह अभियान जारी रहा। घने जंगल और पहाड़ी रास्तों के बीच टीम लगातार आगे बढ़ती रही। इस पूरे अभियान में नेतृत्व और साहस के लिए बाबू राम की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

स्वतंत्रता दिवस पर हुई थी घोषणा

इस ऑपरेशन में दिखाई गई वीरता के आधार पर भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक देने की घोषणा की थी। यह घोषणा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की गई थी। बाद में यह सम्मान उन्हें सीआईएसएफ स्थापना दिवस समारोह में प्रदान किया गया।

2009 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं बाबू राम

आईपीएस बाबू राम बिहार कैडर के 2009 बैच के अधिकारी हैं। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में जिम्मेदारी संभाली है। वे पहले मुजफ्फरपुर रेंज में डीआईजी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। औरंगाबाद में एसपी रहते हुए उन्होंने कई बड़े अभियानों का नेतृत्व किया।

वर्तमान में सीआईएसएफ में तैनात

जुलाई 2025 में उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में भेजा गया। यहां उन्हें उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर तैनाती मिली। वर्तमान में वे सीआईएसएफ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
पुलिस सेवा के दौरान अपराध नियंत्रण और माफियाओं के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर भी वे चर्चा में रहे हैं। भूमि माफिया और शराब माफिया के खिलाफ चलाए गए अभियानों के कारण उनका नाम कई बार सुर्खियों में आ चुका है।

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