Bihar Election: बगैर लड़े नहीं हारती NDA यह सीट! गलती भी हुई, लापरवाही भी; समझें, ताकि सीमा सिंह की तरह न हो
Seema Singh Nomination : कल नामांकन रद्द होने की खबर के बाद आज सुबह से चर्चा रही कि सीमा सिंह को समय दिया गया है। उस चर्चा की हकीकत के साथ यह जानना जरूरी है कि बिहार चुनाव में नामांकन के दौरान सीमा सिंह के कागजात में क्या गलती और क्या लापरवाही थी?
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सीमा सिंह सुर्खियों में हैं। भोजपुरी फिल्म के कारण नहीं, इस बार बिहार विधानसभा की मढ़ौरा सीट से नामांकन रद्द होने के कारण। साथ ही सुर्खियों में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी हैं। चिराग पासवान की स्ट्राइक रेट बिहार विधानसभा चुनाव के पहले खराब हो गई। क्योंकि, सीमा सिंह उन्हीं के पार्टी के चुनाव चिह्न पर उतरी थीं। मैदान में उतरते ही आउट होने की वजह ऐसी है कि यह गलती बाकी प्रत्याशी के मामले में भी हो सकती है। शनिवार को नामांकन रद्द होने की जानकारी आने के बाद से आज, अभी तक यह चर्चा चल रही है कि उन्हें मौका दिया गया है। लेकिन, ऐसा कुछ है नहीं। जिला निर्वाचन पदाधिकारी निर्धारित समय से ज्यादा समय दे ही नहीं सकते। खैर, अभी दूसरे चरण का नामांकन कल तक हो रहा है तो यह जानना चाहिए कि सीमा सिंह के कागजातों में एक गलती और दूसरी लापरवाही क्या थी? लापरवाही तो हर दल कर रहे हैं, यह भी समझिए कैसे?
जिस पीले लिफाफे को पाकर प्रत्याशी गदगद हो उठते हैं, उसी के अंदर की एक गड़बड़ी ने सीमा सिंह के अरमानों पर पानी फेर दिया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने यह सीट चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दी थी। चिराग पासवान की पार्टी ने यह सीट सीमा सिंह को लड़ने के लिए दी थी। लेकिन, पार्टी से मिले पीले लिफाफे के अंदर का कागज गड़बड़ निकला। सारण के जिला निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार शनिवार को जब नामांकन की जांच हो रही थी, तब सीमा सिंह को सूचना दी गई कि उनके फॉर्म B में गड़बड़ी है। वह निर्धारित समय तक उसमें सुधार करवा कर जमा नहीं कर सकीं तो आयोग के प्रावधान के तहत नामांकन रद्द हो गया। फॉर्म B क्या होता है, यह 'अमर उजाला' की इस खबर में समझें। इस फॉर्म में सबसे ऊपर विधानसभा क्षेत्र का नाम लिखना होता है, उसमें लिखा था- *117 सीमा सिंह*, जबकि लिखा जाना चाहिए था- *117 मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र* या *117 मढ़ौरा* या यहां तक कि सिर्फ *117* भी लिखा होता तो काम चल जाता।
सारण जिले की मढ़ौरा सहित सभी 10 सीटों पर पहले ही चरण में 6 नवंबर को मतदान होना है। अब नामांकन के बाद बाकी बचे प्रत्याशियों में से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन किसी एक के साथ चुनाव के पहले डील कर ले, ताकि जीतने पर साथ मिलाया जा सके तो एनडीए के नेता वहां चुनाव प्रचार में जाएंगे अन्यथा मढ़ौरा क्षेत्र से राजग का वास्ता ही एक तरह से खत्म हो गया है। दरअसल, सीमा सिंह के फॉर्म में तो एक गलती हुई और नामांकन रद्द हो गया, लेकिन बिहार चुनाव में उतरने वाले हर दल एक लापरवाही जानबूझ कर कर रहे हैं।
निर्वाचन आयोग से इसी फॉर्म B में एक जगह वैकल्पिक प्रत्याशी का विवरण भी देने का प्रावधान है। मतलब, अगर किसी अन्य कारणवश एक प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया तो वैकल्पिक प्रत्याशी को मौका मिल जाएगा। सीमा सिंह के फॉर्म में तो ऊपर ही निर्वाचन क्षेत्र का नाम गलत हो गया। बाकी का निर्वाचन क्षेत्र सही रहता है, लेकिन वैकल्पिक प्रत्याशी का नाम नहीं रहने के कारण मूल प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने की स्थिति में विकल्पहीनता वाली स्थिति आ जाती है। ऐसा पहले हो चुका है। इससे बचने के लिए ही, चुनाव के लिए नामांकन के समय एक ही प्रत्याशी कई सेट में फॉर्म भरते हैं।