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Bihar: माता-पिता से मिलने जा रही बहनों का अपहरण, राजस्थान ले जाकर बेचा; पुलिस ने चार आरोपियों को दबोचा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 06:51 PM IST
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सार
Bihar News: नालंदा पुलिस ने मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश कर तीन नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। बच्चियों को बहला-फुसलाकर बिहार से राजस्थान ले जाया गया था। पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। पढ़ें पूरी खबर...
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
नालंदा पुलिस ने अंतरराज्यीय मानव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन नाबालिग लड़कियों को सकुशल मुक्त कराया है। इस कार्रवाई में गिरोह के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से बिहार समेत कई राज्यों में फैले तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
पुलिस के निर्देश पर विशेष टीम गठित
सदर डीएसपी-2 संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि रहुई थाना क्षेत्र के बेसमक गांव निवासी सहदेव बिंद ने 9 अप्रैल को अपनी 14 वर्षीय बेटी और 13 वर्षीय भतीजी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई।
बीकानेर में मिली लोकेशन
तकनीकी जांच के दौरान दोनों बच्चियों की लोकेशन राजस्थान के बीकानेर में मिली। पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बीकानेर के नया शहर थाना क्षेत्र में छापेमारी की और दोनों बच्चियों को बरामद कर लिया। मौके से चित्तौड़गढ़ निवासी राजेश कुमार उर्फ राजू और उसकी पत्नी अंजलि कुमारी को गिरफ्तार किया गया।
तीन लाख रुपये में खरीदा था
पूछताछ में खुलासा हुआ कि दंपति ने दोनों बच्चियों को नालंदा के नूरसराय निवासी धनवंती देवी उर्फ शोभा से तीन लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर आरोपियों को बिहार लाकर पूछताछ की और उनकी निशानदेही पर राजगीर के ब्रह्मकुंड के पास से मुख्य सरगना धनवंती देवी और उसके सहयोगी पुरुषोत्तम कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
नाबालिग लड़की भी बरामद हुई
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से छत्तीसगढ़ के रायपुर की एक अन्य नाबालिग लड़की भी बरामद हुई, जिसे तस्करी के इरादे से बंधक बनाकर रखा गया था। आरोपी महिला ने स्वीकार किया कि वह गरीब परिवारों की बच्चियों को बहला-फुसलाकर बाहरी राज्यों में बेचती थी।
पंजाब जाने के लिए घर से निकली थीं
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दोनों लड़कियां अपने माता-पिता के पास पंजाब जाने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन पर तस्करों के जाल में फंस गईं। उन्हें झांसा दिया गया कि उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचा दिया जाएगा, लेकिन उन्हें बीकानेर ले जाकर बेच दिया गया।
ये भी पढ़ें- Bihar News: तीन साल से फेल हो रहा MBBS छात्र बना सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड, कई राज्यों में फैला नेटवर्क
बच्चियां बाल कल्याण समिति को सौंपी गईं
सभी बरामद बच्चियों को बाल कल्याण समिति, बिहारशरीफ के सुपुर्द कर दिया गया है। आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और बैंक खातों व पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि तस्करी का उद्देश्य क्या था- यौन शोषण, जबरन विवाह या घरेलू काम के लिए इस्तेमाल।
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पुलिस के निर्देश पर विशेष टीम गठित
सदर डीएसपी-2 संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि रहुई थाना क्षेत्र के बेसमक गांव निवासी सहदेव बिंद ने 9 अप्रैल को अपनी 14 वर्षीय बेटी और 13 वर्षीय भतीजी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई।
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बीकानेर में मिली लोकेशन
तकनीकी जांच के दौरान दोनों बच्चियों की लोकेशन राजस्थान के बीकानेर में मिली। पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बीकानेर के नया शहर थाना क्षेत्र में छापेमारी की और दोनों बच्चियों को बरामद कर लिया। मौके से चित्तौड़गढ़ निवासी राजेश कुमार उर्फ राजू और उसकी पत्नी अंजलि कुमारी को गिरफ्तार किया गया।
तीन लाख रुपये में खरीदा था
पूछताछ में खुलासा हुआ कि दंपति ने दोनों बच्चियों को नालंदा के नूरसराय निवासी धनवंती देवी उर्फ शोभा से तीन लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर आरोपियों को बिहार लाकर पूछताछ की और उनकी निशानदेही पर राजगीर के ब्रह्मकुंड के पास से मुख्य सरगना धनवंती देवी और उसके सहयोगी पुरुषोत्तम कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
नाबालिग लड़की भी बरामद हुई
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से छत्तीसगढ़ के रायपुर की एक अन्य नाबालिग लड़की भी बरामद हुई, जिसे तस्करी के इरादे से बंधक बनाकर रखा गया था। आरोपी महिला ने स्वीकार किया कि वह गरीब परिवारों की बच्चियों को बहला-फुसलाकर बाहरी राज्यों में बेचती थी।
पंजाब जाने के लिए घर से निकली थीं
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दोनों लड़कियां अपने माता-पिता के पास पंजाब जाने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन पर तस्करों के जाल में फंस गईं। उन्हें झांसा दिया गया कि उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचा दिया जाएगा, लेकिन उन्हें बीकानेर ले जाकर बेच दिया गया।
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बच्चियां बाल कल्याण समिति को सौंपी गईं
सभी बरामद बच्चियों को बाल कल्याण समिति, बिहारशरीफ के सुपुर्द कर दिया गया है। आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और बैंक खातों व पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि तस्करी का उद्देश्य क्या था- यौन शोषण, जबरन विवाह या घरेलू काम के लिए इस्तेमाल।