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Bihar: राजगीर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के गेट पर जड़ा ताला! जानिए क्यों काम छोड़ हड़ताल पर बैठे 1000 मजदूर?
Tue, 28 Jul 2026 02:35 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 02:35 PM IST
सार
राजगीर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण में लगे करीब एक हजार मजदूरों ने चार महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी। मजदूरों ने स्टेडियम के गेट नंबर-1 पर प्रदर्शन कर निर्माण कार्य रोक दिया है।
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राजगीर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण में लगे मजदूरों में काम रोका
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजगीर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम (स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) के निर्माण में लगे करीब एक हजार मजदूरों ने चार महीने से वेतन नहीं मिलने के विरोध में हड़ताल कर दी। मजदूरों ने स्टेडियम के गेट नंबर-1 को जाम कर दिया और निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप कर दिया। मजदूरों का आरोप है कि निर्माण का जिम्मा संभाल रही शापूरजी पलोंजी कंपनी ने अप्रैल महीने के बाद से उन्हें कोई भुगतान नहीं किया है, जिसके कारण उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।
कंपनी पर मनमानी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने बताया कि वे बिहार के गया, रोहतास, पूर्णिया और बेगूसराय के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से यहां काम करने आए हैं। हेल्पर, फिटर और कारपेंटर का काम करने वाले इन मजदूरों का कहना है कि कंपनी द्वारा मनमाने ढंग से दिहाड़ी काटी जाती है। बारिश होने पर दो-तीन घंटे में ही काम बंद कराकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है और उस दिन की पूरी दिहाड़ी काट ली जाती है। इसके अलावा, 20 दिन काम करने पर केवल 10 दिन का पीएफ (PF) दिया जाता है और रविवार की छुट्टी का भुगतान भी नहीं किया जाता। आठ घंटे की ड्यूटी के लिए मात्र 360-370 रुपये दिए जा रहे हैं, जो अन्य जिलों की तुलना में काफी कम हैं।
ठेकेदार भी हुए परेशान
बेगूसराय से आए मजदूर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी की ओर से ठेकेदारों को भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। कई महीनों से ठेकेदार कर्ज लेकर मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। मजदूरों का कहना है कि कंपनी का कोई भी प्रतिनिधि उनसे बात करने या उनकी समस्याएं सुनने के लिए आगे नहीं आ रहा है, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया है।
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ये भी पढ़ें- तेजस्वी यादव अब भी संतुष्ट नहीं, सरकार से न्यायिक जांच की मांग की; सीएम सम्राट पर भी साधा निशाना
परिवार का पेट पालना हुआ मुश्किल
वेतन नहीं मिलने से मजदूरों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। कामगारों का कहना है कि वे दूर-दराज से अपने परिवार की उम्मीदें लेकर यहां रोजी-रोटी कमाने आए थे। पैसे के अभाव में उनके बच्चों के स्कूलों से नाम काटे जा रहे हैं। भोजन पर प्रति सप्ताह करीब एक हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन गुजारे के लिए उन्हें बमुश्किल 500 रुपये ही मिल पा रहे हैं। हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनका बकाया वेतन नहीं दिया जाता और उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक निर्माण कार्य पूरी तरह ठप रहेगा।
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कंपनी पर मनमानी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने बताया कि वे बिहार के गया, रोहतास, पूर्णिया और बेगूसराय के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से यहां काम करने आए हैं। हेल्पर, फिटर और कारपेंटर का काम करने वाले इन मजदूरों का कहना है कि कंपनी द्वारा मनमाने ढंग से दिहाड़ी काटी जाती है। बारिश होने पर दो-तीन घंटे में ही काम बंद कराकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है और उस दिन की पूरी दिहाड़ी काट ली जाती है। इसके अलावा, 20 दिन काम करने पर केवल 10 दिन का पीएफ (PF) दिया जाता है और रविवार की छुट्टी का भुगतान भी नहीं किया जाता। आठ घंटे की ड्यूटी के लिए मात्र 360-370 रुपये दिए जा रहे हैं, जो अन्य जिलों की तुलना में काफी कम हैं।
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ठेकेदार भी हुए परेशान
बेगूसराय से आए मजदूर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी की ओर से ठेकेदारों को भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। कई महीनों से ठेकेदार कर्ज लेकर मजदूरों के खाने-पीने का इंतजाम कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। मजदूरों का कहना है कि कंपनी का कोई भी प्रतिनिधि उनसे बात करने या उनकी समस्याएं सुनने के लिए आगे नहीं आ रहा है, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया है।
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परिवार का पेट पालना हुआ मुश्किल
वेतन नहीं मिलने से मजदूरों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। कामगारों का कहना है कि वे दूर-दराज से अपने परिवार की उम्मीदें लेकर यहां रोजी-रोटी कमाने आए थे। पैसे के अभाव में उनके बच्चों के स्कूलों से नाम काटे जा रहे हैं। भोजन पर प्रति सप्ताह करीब एक हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन गुजारे के लिए उन्हें बमुश्किल 500 रुपये ही मिल पा रहे हैं। हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनका बकाया वेतन नहीं दिया जाता और उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक निर्माण कार्य पूरी तरह ठप रहेगा।