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Bihar News: गंगा में गंदा पानी छोड़ने वालों पर NGT का डंडा, बिहार के नगर निकायों पर जुर्माने का आदेश
Wed, 05 Aug 2026 06:25 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Wed, 05 Aug 2026 06:25 PM IST
सार
बिहार में गंगा समेत कई नदियों में बिना साफ किया गया सीवेज छोड़े जाने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। NGT ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) को निर्देश दिया है कि गंगा में स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के जरिए गंदा पानी छोड़ने वाले शहरी स्थानीय निकायों पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाए।
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NGT ने बिहार में जुर्माने का दिया आदेश
- फोटो : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
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विस्तार
बिहार में गंगा समेत कई नदियों में बिना साफ किए सीवेज का पानी छोड़े जाने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। NGT ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) को निर्देश दिया है कि गंगा में स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के जरिए गंदा पानी छोड़ने वाले शहरी स्थानीय निकायों पर पर्यावरणीय मुआवजा (जुर्माना) लगाया जाए। साथ ही राज्य सरकार से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और सीवेज नेटवर्क की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी भी मांगी गई है।
गंगा प्रदूषण मामले में NGT कर रहा है सुनवाई
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) उस मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि बिहार से होकर गुजरने वाली गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि वह नहाने के लिए भी सुरक्षित नहीं है। 3 अगस्त को जारी आदेश में NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि बिहार के 27 जिलों में गंगा, सोन, कोसी और बागमती जैसी नदियों में प्रदूषण और फीकल कोलीफॉर्म की अधिक मात्रा की जांच की जा रही है।
बिहार में 43 एसटीपी, लेकिन कई अभी भी अधूरे
राज्य के पर्यावरण विभाग ने NGT को बताया कि बिहार में इस समय 43 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) हैं। इनमें से 15 पूरी तरह चालू हैं, पांच ट्रायल पर चल रहे हैं, नौ का निर्माण जारी है, चार टेंडर की प्रक्रिया में हैं और 10 अभी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) के चरण में हैं।
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NGT ने विभाग से यह भी पूछा है कि चालू STP अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं या नहीं और इनसे निकलने वाला साफ किया गया पानी तय मानकों के अनुरूप है या नहीं। साथ ही निर्माणाधीन STP की प्रगति की जानकारी भी मांगी गई है।
पटना समेत कई शहरों से गंगा में जा रहा है गंदा पानी
हलफनामे के अनुसार पटना में 15 ऐसे नाले हैं, जिनसे हर दिन करीब 349 मिलियन लीटर गंदा पानी बिना साफ किए गंगा में जा रहा है। इसी तरह बक्सर में सात नालों से हर दिन 50 मिलियन लीटर, आरा में पांच नालों से 47 मिलियन लीटर, जमालपुर में पांच नालों से 25 मिलियन लीटर और बरौनी में दो नालों से 23 मिलियन लीटर गंदा पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा डुमरांव में तीन और बड़हिया में छह ऐसे नाले हैं, जिन्हें अब तक सीवेज सिस्टम से नहीं जोड़ा गया है।
सिर्फ नाले जोड़ना स्थायी समाधान नहीं
NGT ने कहा कि बड़ी मात्रा में बिना साफ किया गया सीवेज गंगा में पहुंच रहा है। कई जगह स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी व्यवस्था हो सकती है। इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। अधिकरण ने राज्य सरकार से पूछा है कि सीवेज का पानी नदियों में जाने से रोकने के लिए सीवेज नेटवर्क बनाने की क्या योजना है, इसे कब तक पूरा किया जाएगा, इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा और इसके लिए पर्याप्त पैसा उपलब्ध है या नहीं।
नगर निकायों पर लगेगा पर्यावरणीय जुर्माना
NGT ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि जिन शहरी स्थानीय निकायों की वजह से स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के जरिए बिना साफ किया गया सीवेज गंगा में जा रहा है, उनके खिलाफ पर्यावरणीय मुआवजा यानी जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। तब तक राज्य सरकार और संबंधित विभागों को NGT के सामने सभी जरूरी जानकारी और कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी।
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गंगा प्रदूषण मामले में NGT कर रहा है सुनवाई
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) उस मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसने एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि बिहार से होकर गुजरने वाली गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि वह नहाने के लिए भी सुरक्षित नहीं है। 3 अगस्त को जारी आदेश में NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि बिहार के 27 जिलों में गंगा, सोन, कोसी और बागमती जैसी नदियों में प्रदूषण और फीकल कोलीफॉर्म की अधिक मात्रा की जांच की जा रही है।
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बिहार में 43 एसटीपी, लेकिन कई अभी भी अधूरे
राज्य के पर्यावरण विभाग ने NGT को बताया कि बिहार में इस समय 43 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) हैं। इनमें से 15 पूरी तरह चालू हैं, पांच ट्रायल पर चल रहे हैं, नौ का निर्माण जारी है, चार टेंडर की प्रक्रिया में हैं और 10 अभी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) के चरण में हैं।
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NGT ने विभाग से यह भी पूछा है कि चालू STP अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं या नहीं और इनसे निकलने वाला साफ किया गया पानी तय मानकों के अनुरूप है या नहीं। साथ ही निर्माणाधीन STP की प्रगति की जानकारी भी मांगी गई है।
पटना समेत कई शहरों से गंगा में जा रहा है गंदा पानी
हलफनामे के अनुसार पटना में 15 ऐसे नाले हैं, जिनसे हर दिन करीब 349 मिलियन लीटर गंदा पानी बिना साफ किए गंगा में जा रहा है। इसी तरह बक्सर में सात नालों से हर दिन 50 मिलियन लीटर, आरा में पांच नालों से 47 मिलियन लीटर, जमालपुर में पांच नालों से 25 मिलियन लीटर और बरौनी में दो नालों से 23 मिलियन लीटर गंदा पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा डुमरांव में तीन और बड़हिया में छह ऐसे नाले हैं, जिन्हें अब तक सीवेज सिस्टम से नहीं जोड़ा गया है।
सिर्फ नाले जोड़ना स्थायी समाधान नहीं
NGT ने कहा कि बड़ी मात्रा में बिना साफ किया गया सीवेज गंगा में पहुंच रहा है। कई जगह स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी व्यवस्था हो सकती है। इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। अधिकरण ने राज्य सरकार से पूछा है कि सीवेज का पानी नदियों में जाने से रोकने के लिए सीवेज नेटवर्क बनाने की क्या योजना है, इसे कब तक पूरा किया जाएगा, इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा और इसके लिए पर्याप्त पैसा उपलब्ध है या नहीं।
नगर निकायों पर लगेगा पर्यावरणीय जुर्माना
NGT ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि जिन शहरी स्थानीय निकायों की वजह से स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के जरिए बिना साफ किया गया सीवेज गंगा में जा रहा है, उनके खिलाफ पर्यावरणीय मुआवजा यानी जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। तब तक राज्य सरकार और संबंधित विभागों को NGT के सामने सभी जरूरी जानकारी और कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी।