Bihar: बिहार के महाधिवक्ता का त्यागपत्र, नीतीश सरकार में मंत्री भी रहे थे पीके शाही; पद छोड़ने की क्या है वजह?
PK Shahi Resignation : बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार की नई सरकार के गठन के बाद यह एक बड़ा फैसला सामने आया है।
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महाधिवक्ता बनाने को लेकर क्या चर्चा है?
पीके शाही के बारे में कहा जाता है कि कई बड़े केस में उन्होंने सरकार को जीत दिलाई। इतना ही नहीं उन्होंने सरकार को कई संवैधानिक प्रशासनिक एवं नीतिगत मामलों में आगे रखा। नीतीश कुमार के इस्तीफा देने और सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि पीके शाही की जगह सरकार किसी अन्य को महाधिवक्ता बनाना चाहती है। चर्चा में जनसुराज छोड़ कर आए वाईवी गिरी का नाम सबसे अधिक है। वह भी बिहार के जाने माने वकील हैं। हालांकि, चर्चा यह भी है कि दिल्ली में रह रहे और फिलहाल विदेश घूम रहे एक वरीय अधिवक्ता को बिहार का महाधिवक्ता बनाए जाने की बात चल रही है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि ओबीसी कोटे से किसी वरिष्ठ वकील को महाधिवक्ता बनाने की तैयारी में भाजपा है।
कौन हैं पीके शाही?
3 जुलाई 1955 को जन्म लेने वाले प्रशांत कुमार शाही ने 1979 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से लॉ डिग्री ली। इसके बाद पटना आ गए और उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू कर दी। 1990 में 35 वर्ष की उम्र में वह हाई कोर्ट के सरकारी वकील नियुक्त किए गए। 2005 में एनडीए के नेतृत्व में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद पीके शाही को बिहार का महाधिवक्ता बना दिया गया।