Bihar Election: विधानसभा की तरह इस बार बिहार पंचायत चुनाव भी, EVM से पड़ेंगे वोट; और क्या-क्या बदल रहा?
Bihar News: बिहार पंचायत चुनाव इस कई मायनों में खास होने वाला है। पहली बार ईवीएम से चुनाव होने जा रहा है। साथ ही नए आरक्षण रोस्टर भी इस बार लागू होगा। जानिए, और क्या-क्या खास होगा इस बार?
विस्तार
बिहार में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि दिसंबर 2026 से पहले हर हाल में पंचायत चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे। इस बार का पंचायत चुनाव कई मायनों में खास होने वाला है, क्योंकि पहली बार बिहार में पंचायत चुनाव ईवीएम के जरिए कराए जाएंगे। अब तक पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से होते रहे हैं। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव के लिए एम-3 (M3) ईवीएम यूनिट खरीदने की तैयारी कर रहा है, जो एम-2 (M2) ईवीएम यूनिट से अधिक उन्नत मानी जाती है। आयोग 32 हजार से अधिक ईवीएम यूनिट खरीदने जा रहा है। इस ईवीएम की खासियत यह है कि इसमें 24 बैलेट यूनिट जोड़ी जा सकती हैं और एक साथ 384 प्रत्याशियों की सूची दर्ज की जा सकती है। मतदान के दौरान एक कंट्रोल यूनिट के साथ छह पदों के लिए छह बैलेट यूनिट आसानी से जोड़ी जा सकती हैं। इन ईवीएम की खरीद पर करीब 64 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, नीतीश सरकार पहले ही पंचायत चुनाव के लिए 200 करोड़ रुपये खर्च की मंजूरी दे चुकी है।
ईवीएम से पंचायत चुनाव कराए जाने के कारण इस बार चुनाव के चरण भी कम होने की संभावना है। वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव 11 चरणों में कराए गए थे, जो 24 सितंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर तक चले थे। इसके अलावा, इस बार विधानसभा चुनाव की तरह सभी बूथों पर वेबकास्टिंग भी कराई जाएगी। निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार पंचायत चुनाव में नया आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा। बिहार पंचायती राज अधिनियम की धारा 13, 38, 65 और 91 के तहत आरक्षण रोस्टर प्रत्येक दो क्रमिक चुनावों के बाद बदलता है। वर्ष 2016 और 2021 के चुनावों में पुराना रोस्टर लागू रहा था, इसलिए 2026 के पंचायत चुनाव में नया रोस्टर प्रभावी होगा। आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। पदों का आरक्षण जिला अधिकारी द्वारा तय किया जाएगा।
इस बार नए आरक्षण रोस्टर पर होंगे चुनाव
पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक कुमार ने कहा कि मौजूदा आरक्षण रोस्टर के 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं, इसलिए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार रोस्टर में बदलाव किया जा रहा है। इससे समाज के सभी वर्गों को नेतृत्व का अवसर मिलेगा। जहां पहले सामान्य वर्ग के लोग नेतृत्व करते थे, वहां अब आरक्षित वर्ग को मौका मिल सकता है और जहां आरक्षित वर्ग नेतृत्व करता था, वहां सामान्य वर्ग को अवसर मिलेगा। आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा और संबंधित वर्गों के लिए तय प्रतिशत के अनुसार सीटें आरक्षित होंगी। विभाग पंचायत चुनाव में जुट चुका है।
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इस बार लागू नहीं हो सकेगा परिसीमन
पिछले काफी समय से पंचायत चुनाव में नए परिसीमन को लागू करने की चर्चा चल रही थी। प्रयास किए जा रहे थे कि पंचायत चुनाव नए परिसीमन के आधार पर कराए जाएं, लेकिन 2021 की जनगणना पूरी नहीं होने के कारण इस बार भी पंचायत चुनाव 30 साल पुराने परिसीमन के आधार पर ही कराए जाएंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा लगातार नए परिसीमन की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि समय के साथ हर क्षेत्र की जनसंख्या बदलती है, ऐसे में कुछ वर्षों के अंतराल पर परिसीमन जरूरी होता है। यदि किसी पंचायत की आबादी अधिक हो जाती है तो परिसीमन के आधार पर नई पंचायत का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास के लिए परिसीमन बेहद जरूरी है।
जानिए कितने पदों पर होंगे पंचायत चुनाव
इस बार पंचायत चुनाव कुल 2,55,379 पदों के लिए कराए जाएंगे। इसमें पंच और वार्ड सदस्य के 1,13,307-1,13,307 पद, मुखिया और ग्राम कचहरी सरपंच के 8,053-8,053 पद, जिला परिषद सदस्य के 1162 पद तथा पंचायत समिति सदस्य के 11,497 पद शामिल हैं।
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