Bihar Band : बांकीपुर विधानसभा चुनाव पर लटकी तलवार! क्यों-क्या होने की आशंका? पुलिस की तैयारी भी जानें
Bihar News : बिहार की एक सीट पर उप चुनाव है। उस सीट पर जहां बुधवार को सड़क पर महासंग्राम जैसी स्थिति थी। उसी कड़ी में कल बिहार बंद का एलान है। हिंसा की आशंका से पुलिस की छुट्टियां रद्द हैं। इंटरनेट सेवाएं बंद हो रहीं। तो क्या चुनाव की तारीख बढ़ेगी?
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के कारण खाली हुई पटना की बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है, लेकिन आज 24 जुलाई को राज्य में तनाव की स्थिति ऐसी है कि इंटरनेट सेवाओं पर रोक तक की नौबत दिख रही है। 23 जुलाई को पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी कर दिया था कि अभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द रहेंगी। 25 जुलाई को तनाव बढ़ाने के लिए बिहार बंद का एलान है। नीट परीक्षा में धांधली समेत विभिन्न मुद्दाें पर दिल्ली से शुरू हुए हंगामे ने बिहार के लगभग हर जिले को प्रभावित कर रखा है, लेकिन सबसे बड़ा हंगामा बुधवार को पटना में हुआ था। वह भी बांकीपुर क्षेत्र में ही। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बांकीपुर उप चुनाव की तारीखें बदल सकती हैं?
बांकीपुर उप चुनाव हाई प्रोफाइल क्यों है?
पिछले 31 साल से यह सीट 'नवीन परिवार' के पास रही। दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा 31 साल पहले यहां से विधायक बने थे। भाजपा नेता नवीन किशोर सिन्हा यहां से इतने मतों से जीतने वाले प्रत्याशी रहे, जितना कई प्रत्याशियों को कुल वोट भी नहीं आया होगा। 2005 में उनका निधन हो गया और 2006 में उप चुनाव के जरिए उनके बेटे नितिन नवीन विधायक बने। तब से वही विधायक थे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। इससे बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई। नितिन बिहार सरकार में मंत्री भी थे। यह पूरी तरह अर्बन बूथों वाला विधानसभा क्षेत्र है। यहां सबसे ज्यादा शिक्षित मतदाता भी हैं। बांकीपुर में जन सुराज के प्रशांत किशोर ने दावा ठोक कर इसे और रोमांचक बना दिया। इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल प्रत्याशी रेखा गुप्ता पिछली बार दूसरे नंबर पर रही थीं। वह भी मैदान में हैं। इसलिए, यह सीट बेहद चर्चा में है। इस सीट पर 57 प्रत्याशियों ने नामांकन पर्चा भरा था। 37 का नामांकन मंजूर हुआ था, जिसमें कुल 25 चुनाव मैदान में हैं।
तारीख बढ़ने का डर क्यों, यह भी जान लें
बांकीपुर उप चुनाव में 30 जुलाई को मतदान होना है, लेकिन बिहार में 22 जुलाई से लगातार हंगामा हो रहा है। पहला हंगामा जिस क्षेत्र में हुआ, वह पूरा का पूरा बांकीपुर विधानसभा का इलाका है। अब, 24 जुलाई से हिंसा-हंगामे के डर से ही पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द की गई हैं। 24 जुलाई को इंटरनेट बंद करने की शुरुआत मुजफ्फरपुर से हो चुकी है। इस जद में कितने जिले आएंगे, यह 25 को बिहार बंद की चल रही तैयारियों पर निर्भर करता है। पटना में हंगामा वामपंथी छात्र संगठन ने किया था और अब उसमें तमाम विपक्षी दल उसके साथ हैं। इसके अलावा नई पीढ़ी के लड़कों को जोड़ने के कारण कई तरह की आशंकाएं हैं। इसे देखते हुए बांकीपुर में चर्चा चल रही है कि कहीं मतदान की तारीख न बदल जाए। 30 जुलाई को मतदान और तीन अगस्त को मतगणना-परिणाम का दिन है। चार अगस्त तक इस प्रक्रिया को पूरा कर लेने का चुनाव आयोग का नोटिफिकेशन है। इस बीच जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, पुलिस-प्रशासन का पूरा ध्यान हिंसक तत्वों पर है। इसलिए यह चर्चा तेजी से आकार ले रही है।
मतदान की तारीख बढ़ने से किसे होगा फायदा?
सभी प्रत्याशी अपने हिसाब से क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। प्रचार में कोई पीछे नहीं है। भाजपा ने लंबी-चौड़ी सूची भी जारी की और उसके हर स्तर, जाति-वर्ग के नेता बांकीपुर में पसीना बहा रहे हैं। कीचड़ हो या धूप, इनकी दौड़ कम नहीं हो रही है। इसी तरह प्रशांत किशोर भी गली-मुहल्ले में बैठकी लगा रहे हैं। राजद का प्रचार कमजोर दिख रहा है, क्योंकि तेजस्वी यादव ही एक बार फिर मैदान से गायब हैं। ऐसे में तारीख बढ़ने की स्थिति में तेजस्वी यादव के पटना लौटकर प्रचार करने से रेखा गुप्ता को ही असल फायदा मिलेगा। बाकी सभी को कमजोर कड़ी ढूंढ़ने में फायदा मिलेगा।