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Bihar: 'बजट पूरा खर्च नहीं, जो खर्च किए उनमें हजारों करोड़ का हिसाब नहीं'- कैग ने बिहार सरकार का खोला राज

Fri, 24 Jul 2026 06:55 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Fri, 24 Jul 2026 06:55 AM IST
सार

CAG Report Bihar : तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समय बिहार के बजट का आवंटित धन पूरा खर्च नहीं हो पा रहा था और जो खर्च किया अभी गया उसमें भी हजारों करोड़ की राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र सरकार के रिकॉर्ड में नहीं है।

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Financial irregularities of bihar government found in cag report presented in bihar vidhan sabha
सीएजी रिपोर्ट पेश होने के बाद घिरी नीतीश सरकार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीएम सम्राट चौधरी सरकार की वित्तीय व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक विभिन्न विभागों द्वारा खर्च की गई करीब 93 हजार करोड़ रुपये की राशि से जुड़े 62,632 उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अब तक जमा नहीं किए गए हैं। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में काफी बढ़ी है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकार को मिले कुल बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो सका। इस मुद्दे के विधानसभा के मानसून सत्र में भी राजनीतिक रूप से गूंजने के आसार हैं।
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यूसी नहीं मिलने से बढ़ी जवाबदेही पर चिंता

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि का उपयोग प्रमाणित करने के लिए समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। बिहार कोषागार संहिता-2011 के नियमों के अनुसार बजट आवंटन के 18 महीने के भीतर यूसी जमा किया जाना चाहिए, लेकिन बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र अब भी लंबित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक लंबित यूसी का मूल्य पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 26 प्रतिशत बढ़ गया है, जिससे सार्वजनिक धन के उपयोग की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।

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इन विभागों पर सबसे ज्यादा सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र पंचायती राज विभाग के हैं, जहां लगभग 32 हजार करोड़ रुपये का हिसाब लंबित है। इसके बाद शिक्षा विभाग के करीब 19 हजार करोड़ रुपये, नगर विकास एवं आवास विभाग के लगभग 17.8 हजार करोड़ रुपये, ग्रामीण विकास विभाग के 6.4 हजार करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग के करीब 3 हजार करोड़ रुपये से संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए हैं।

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बजट बढ़ा, लेकिन पूरा खर्च नहीं हो सका

कैग की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024-25 में बिहार का कुल बजट बढ़कर 3.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, लेकिन सरकार केवल 2.87 लाख करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। यानी कुल बजट का करीब 21.22 प्रतिशत, लगभग 77,340 करोड़ रुपये, उपयोग में नहीं लाया जा सका। रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति बजट अनुमान और वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को दर्शाती है।

 

वित्त विभाग से मांगा गया जवाब, नहीं मिला स्पष्टीकरण

कैग ने रिपोर्ट में बताया कि लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्रों को लेकर वित्त विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जनवरी 2026 तक विभाग की ओर से कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समय पर यूसी जमा नहीं होने से सरकारी निधियों के उपयोग की प्रभावी निगरानी प्रभावित होती है और वित्तीय जोखिम बढ़ सकता है।

 

केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर भी टिप्पणी

सीएजी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए अपेक्षित केंद्रीय हिस्सेदारी की तुलना में 441.29 करोड़ रुपये कम राशि स्थानांतरित की गई। साथ ही राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग 48 प्रतिशत हिस्सा प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी पर खर्च होने की बात कही गई है, जिसके कारण विकास योजनाओं और पूंजीगत परियोजनाओं के लिए अपेक्षाकृत कम संसाधन उपलब्ध रहे।

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