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Bihar: हौसलों की उड़ान! आर्थिक तंगी को पछाड़ ग्लासगो पहुंचे पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार, आज दिखाएंगे दम

Fri, 24 Jul 2026 08:15 AM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: पटना ब्यूरो Updated Fri, 24 Jul 2026 08:15 AM IST
सार

नालंदा जिले के हरनौत निवासी अंतरराष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार का चयन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। आर्थिक अभाव और जन्मजात दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। आज 24 जुलाई को वे ग्लासगो में 72 किलोग्राम भार वर्ग में भारत की चुनौती पेश करेंगे।

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Bihar to Glasgow Poverty-Stricken Para Powerlifter Jhandu Kumar Ready to Shine at Commonwealth Games
पावरलिफ्टर झंडू कुमार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि हौसले बुलंद हों और सपनों में उड़ान भरने की जिद हो, तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है। इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है बिहार के नालंदा जिले के हरनौत निवासी अंतरराष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने। अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, कठिन संघर्ष और अथक मेहनत के बल पर झंडू ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश का नाम रोशन किया है। 29 वर्षीय झंडू कुमार का चयन वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो, स्कॉटलैंड) के लिए भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग टीम में हुआ है।
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72 किलो भार वर्ग में जलवा बिखेरेंगे
23 जुलाई से 2 अगस्त तक चलने वाले इन खेलों में झंडू आज, 24 जुलाई को, 72 किलोग्राम भार वर्ग स्पर्धा में अपना जलवा बिखेरेंगे। उनके इस ऐतिहासिक चयन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे बिहार और देशभर के खेल प्रेमियों में भारी उत्साह का माहौल है।
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अभावों और कठिनाइयों से भरा शुरुआती सफर
झंडू कुमार का यह मुकाम हासिल करना किसी परीकथा से कम नहीं है, जिसके पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है। चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे झंडू का जीवन शुरुआती दौर से ही चुनौतियों से घिरा रहा। वह जन्म से ही शारीरिक रूप से दिव्यांग थे, लेकिन उनकी यह शारीरिक सीमा कभी उनके सपनों के आड़े नहीं आई। उनके माता-पिता आज भी हरनौत बाजार में सड़क किनारे सब्जी की रेहड़ी (आलू और प्याज) लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके अन्य भाई भी परिवार की इस जीविका में पूरा सहयोग करते हैं। मूल रूप से हरनौत के सबनौह डीह गांव के रहने वाले झंडू का परिवार पिछले कई वर्षों से हरनौत बाजार में ही एक किराए के कमरे में रहकर गुजर-बसर कर रहा है। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने कभी झंडू के सपनों को कमजोर नहीं होने दिया। पढ़ाई के साथ-साथ परिवार के काम में हाथ बंटाने वाले झंडू ने 18 वर्ष की उम्र में खेल के प्रति अपनी गहरी रुचि दिखाई और यहीं से उनके जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। अभावों के बीच पली इस प्रतिभा ने हर कदम पर आने वाली बाधाओं को पार करते हुए आज अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी जगह बना ली है।
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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्णिम सफलताएं
झंडू कुमार की खेल यात्रा उपलब्धियों से भरी रही है और उनकी हर जीत ने भारतीय पैरा खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। वर्ष 2021 में कोलकाता में आयोजित 19वीं सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के 65 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। इसके बाद वर्ष 2025 उनके लिए बेहद सफल रहा। ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में आयोजित 22वीं सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के 72 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने 205 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी वर्ष नई दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में भी उन्होंने 72 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी धाक जमाई है। चीन में आयोजित बीजिंग वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड कप 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने 192 किलोग्राम भार उठाकर कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने मिस्र में आयोजित काहिरा वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 में भी देश का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2026 की शुरुआत भी उनके लिए शानदार रही, जहां रुड़की (उत्तराखंड) में आयोजित 23वीं सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के 72 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद बैंकॉक (थाईलैंड) में आयोजित एशिया–ओशिनिया ओपन पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने एशिया इवेंट और ओपन इवेंट, दोनों में कांस्य पदक हासिल किए। इन तमाम सफलताओं के बाद अब उनका चयन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लासगो, स्कॉटलैंड) के लिए हुआ है, जो उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।

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प्रेरणास्त्रोत और तकनीकी मार्गदर्शन

एक साधारण परिवार के लड़के को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाने के पीछे कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 2019 से कुंदन कुमार पांडे लगातार उनके साथ जुड़े रहे और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रेरित एवं मार्गदर्शन करते रहे। उनके शुरुआती प्रशिक्षण में रॉकस्टार जिम के संचालक एवं प्रशिक्षक की भी अहम भूमिका रही, जिन्होंने उन्हें प्रारंभिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया। इसके बाद उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर (गुजरात) में हुआ। वहां उन्हें पैरालंपिक पदक विजेता एवं द्रोणाचार्य प्रशिक्षक राजेंद्र सिंह रहेलू का कुशल सानिध्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इसके अलावा, बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार ने भी झंडू कुमार को हर स्तर पर सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान किया, जिससे उन्हें अपने सफर को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली। इस सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन ने झंडू को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।


बिहार के पैरा खेल आंदोलन के लिए मील का पत्थर
झंडू कुमार की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बिहार के पैरा खेल आंदोलन के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उनका यह संघर्ष समाज के लिए एक बड़ा संदेश देता है कि यदि प्रतिभा को सही समय पर पहचान, उचित प्रशिक्षण और निरंतर मार्गदर्शन मिले, तो सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद विश्व मंच पर भी सफलता के झंडे गाड़े जा सकते हैं।

बिहारवासियों को झंडू कुमार से हैं उम्मीदें
नालंदा पैरा स्पोर्ट्स संगठन, बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन तथा पूरे बिहार के खेल प्रेमियों को पूरी उम्मीद और विश्वास है कि झंडू कुमार कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। वे देश और राज्य के लिए पदक जीतकर भारत का तिरंगा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर गर्व से लहराएंगे। हरनौत की गलियों से निकलकर स्कॉटलैंड के ग्लासगो तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि हौसले यदि चट्टान जैसे हों, तो आसमान की दूरियां भी कम पड़ जाती हैं।
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